व्यक्तिस्वतंत्रता का उद्घोष करनेवालों के यह क्यों समझ में नहीं आता कि . . .

व्यक्तिस्वतंत्रता का उद्घोष करनेवालों के यह क्यों समझ में नहीं आता कि, जीवन में निहित अधिकांश भाग प्रारब्ध पर निर्भर होता है ?