पाश्चिमात्योंका प्रभाव

वैलेंटाईन डे की पश्‍चिमी कुप्रथा छोडें !

विभिन्न डेद्वारा वासना, कामांधता, विकृति, अश्लीलता एवं अनैतिकताका दर्शन होता है । ये सभी सुख क्षणिक हैं । इस प्रकारका अधर्माचरण करनेसे चरित्रका हनन होता है; भोगवाद.. Read more »

३१ दिसंबर मनाना, अर्थात मानसिक एवं सांस्कृतिक धर्मांतर !

नववर्ष प्रतिपदा (चैत्र-प्रतिपदा) से अधिक ३१ दिसंबरकी रात्रिको अधिक महत्त्व देनेवाले केवल नामके हिंदु हैं । भारतीय संस्कृतिके अनुसार चैत्र-प्रतिपदा (गुढीपाडवा), ही हिंदुओंका नववर्ष दिन है । किंतु, आजके हिंदु ३१ दिसंबरकी रात्रिमें नववर्षदिन मनाकर अपनेआपको धन्य मानने लगे हैं । Read more »