गुरु-शिष्य परंपरा के द्वारा पुनः एक बार धर्मसंस्थापना का कार्य करने का समय आ गया है – पू. नीलेश सिंगबाळजी

आज भी हिन्दू धर्म पर लव जिहाद, मंदिर सरकारीकरण, गोहत्या, साधु-संत एवं हिन्दुत्वनिष्ठों की हत्याएं, हिन्दुओं का वंशविच्छेद और धर्मांतरण आदि अनेक आघातों के कारण हिन्दू धर्म संकट में है । Read more »

साधना करने से मनोबल बढकर संकटों का सामना करने के लिए बल प्राप्त होता है – सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडयेजी

ईश्‍वर का भक्त बनने हेतु साधना करना आवश्यक होता है । जैसे पेट पालने के लिए धन अर्जित करना पडता है, उसी प्रकार ईश्‍वर का भक्त बनने हेतु साधना करना आवश्यक होता है । Read more »

‘शिवराज्याभिषेक दिन : हिन्दू राष्ट्र संकल्प-दिन’ इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद !

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी के कारण गुजरात में तथा आदरणीय श्री. येडीयुरप्पा के कारण कर्नाटक राज्य में इतिहास थोडा बढाया गया; परंतु देश से छत्रपति शिवाजी महाराज के विचार समाप्त करने का षड्यंत्र चल रहा है । Read more »

गुरुकृपायोग के अनुसार साधना कर हिन्दू राष्ट्र के साक्षी और भागीदार बनेंगे – सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडयेजी

साधना करते समय केवल क्षात्रतेज नहीं, अपितु उसके साथ ब्राह्मतेज भी आवश्यक होता है । किसी भी बात को पूर्णता तक पहुंचाने हेतु ईश्‍वर के साथ में होने की आवश्यकता होती है । Read more »

आनेवाले भीषण आपातकाल का सामना करने हेतु साधना ही आवश्यक – सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडये

नेक संतों और द्रष्टाओं ने इससे पूर्व ही ‘आनेवाला समय और भी अधिक कठिन होगा’, ऐसा बताया ही है । इस स्थिति का सामना करने हेतु केवल भगवान ही हमारी सहायता कर सकते हैं और उसके लिए साधना करना ही अनिवार्य है । Read more »

देश में धर्माधिष्ठित राज्य स्थापन होने हेतु प्रतिदिन समाज का उद्बोध करना चाहिए – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे

बालोपसना के कारण मनुष्य सत्त्वगुणी और उसके उपरांत गुणातीत होता है; परंतु सत्त्वगुण की ओर जाने के लिए प्रतिदिन साधना कर साधक बनना पडेगा । Read more »

भीषण आपातकाल से पार लगने हेतु ईश्‍वर का भक्त होना आवश्यक – श्रीमती राजश्री तिवारी, हिन्दू जनजागृति समिति

जो ईश्‍वर का भक्त है, ईश्‍वर किसी भी स्थिति में उसकी रक्षा करते ही हैं । अतः आनेवाले भीषण आपातकाल से पार लगने हेतु ईश्‍वर का भक्त बनना आवश्यक है । Read more »

हिन्दू देश में सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर पाएं; इसके लिए संवैधानिक पद्धति से हिन्दू राष्ट्र की मांग की जानी चाहिए – सुनील घनवट

देश के विभाजन के उपरांत पाकिस्तान और बांग्लादेश ने उनके देश के बहुसंख्यक नागरिकों के धर्म पर आधारित इस्लामी राजतंत्र का स्वीकार किया; परंतु भारत ने यहां के बहुसंख्यक हिन्दुओं की उपेक्षा कर धर्मनिरपेक्ष राजतंत्र आरंभ किया । Read more »

पद, प्रतिष्ठा और लालच की अनदेखी कर केवल धर्म के लिए निरपेक्षता के साथ कार्य करना आवश्यक – मनोज खाडये

विगत ७४ वर्ष के लोकतंत्र ने देश को निर्धनता, बडी मात्रा में भ्रष्टाचार, नक्षलवाद, अराजकता जैसे विषैले और कडवे फल दिए हैं । इसलिए जनता के कल्याण हते आदर्श हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता है । Read more »

ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों में विश्‍व को दिशा दिखाने की क्षमता होती है – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी

भगवान का यह वचन है कि ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों में विश्‍व को दिशा दिखाने की क्षमता होती है । आद्य शंकराचार्यजी से लेकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीतक अनेक महापुरुषों ने हमारे सामने हिन्दू राष्ट्र का (ईश्‍वरीय राज्य) का लक्ष्य रखा है । Read more »

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