हिंदू जनजागृति समितिकी स्थापना एवं कार्य

धर्मबंधुओ, भारतभूमि एक स्वयंभू हिंदु राष्ट्र है । किंतु, अधर्मी शासकोंने इस हिंदु राष्ट्रको धर्मनिरपेक्ष घोषित कर इसे कलंकित किया है । वर्तमान लोकतंत्र हिंदु धर्मपर आधारित न होनेके कारण हिंदु समाज एवं राष्ट्रका परम पतन हुआ है । यह पतन रोकनेके लिए एवं भारतभूमिको पुनः वैभवसंपन्न बनानेके लिए भारतमें धर्मकी संस्थापना होना परम आवश्यक है । इस धर्मसंस्थापनाके लिए, अर्थात धर्मपर आधारित हिंदु राष्ट्रकी स्थापनाके लिए ७ अक्टूबर २००२ को हिंदू जनजागृति समितिकी स्थापना की गई । उस समयसे आजतक इन १२ वर्षोंमें हिंदू जनजागृति समितिने धर्मशिक्षा, धर्मजागृति, राष्ट्ररक्षा, धर्मरक्षा एवं हिंदूसंगठन, इस पांचसूत्री उपक्रमको सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया ।

अ. धर्मशिक्षा : हिंदु समाजको धर्मकी शिक्षा देनेके लिए समितिकी ओरसे पूरे भारतमें १६० से अधिक धर्मशिक्षावर्ग चलाए जाते हैं । इसके अतिरिक्त, हिंदुओंको अपने घरोंमें ही धर्मकी शिक्षा मिले इस हेतु सनातन संस्था और हिंदू जनजागृति समितिने धर्मसत्संगोंकी ३६७ भागोंमें रचना की है । ये धर्मसत्संग ३ राष्ट्रीय एवं ८० से अधिक स्थानीय दूरदर्शन प्रणालोंसे (केबलपर) प्रसारित किए जा चुके हैं । हिंदुओंकी आगामी पीढीको धर्मकी शिक्षा मिले, इसके लिए समितिद्वारा २०० स्थानोंपर बालसंस्कारवर्गोंका आयोजन किया जाता है ।

आ. धर्मजागृति : हिंदु धर्मजागृति सभा, यह समितिका सबसे बडा उपक्रम है । समितिने आजतक ७ भाषाओंमें ११ राज्योंमें ९२० से अधिक धर्मजागृति सभाओंका आयोजन किया है । समितिकी ओरसे कश्मीरी हिंदुओंकी रक्षा, बांग्लादेशी हिंदुओंकी दुर्दशा, धर्मशिक्षा, धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा, हिंदु राष्ट्र, क्रांतिकारी पुरुषोंका स्मरण गंगारक्षा, गोरक्षा इत्यादि विषयोंपर समाजको जागृत करनेवाली प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं ।

इ. धर्मरक्षा : देवताओंका निरादर, मंदिरोंकी असुरक्षा, मंदिरोंका सरकारीकरण, सार्वजनिक उत्सवोंमें होनेवाले अनाचार, संतोंकी निंदा, सरकारके हिंदुद्रोही अधिनियम, लव जिहाद, धर्म-परिर्वतन, गंगाप्रदूषण, गोहत्या इत्यादि धर्महानिके विरुद्ध समिति आंदोलन करती है अथवा धर्मजागृतिसे संबंधित अभियान चलाती है । महाराष्ट्र्रमें अंधश्रद्धा निर्मूलन तथा मंदिरोंका सरकारीकरण, इन हिंदुविरोधी अधिनियमोंके विरुद्ध जनजागृति की है । परिणामस्वरूप, शासनने २ लाख मंदिरोंके सरकारीकरणका प्रस्ताव पीछे ले लिया और अंधश्रद्धा निर्मूलन अधिनियमके २७ में से १६ हिंदुविरोधी धाराओंको निरस्त कर, एक अध्यादेशके माध्यमसे इसे महाराष्ट्रमें लागू कर दिया गया ।

आपातकालमें हिंदुओंकी रक्षा हो, इसके लिए समितिकी ओरसे १०० से अधिक स्थानोंपर स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्गचलाए जाते हैं ।

ई. राष्ट्ररक्षा : राष्ट्रीय प्रतीकोंका अपमान, भारतीय मानचित्रका विकृतिकरण, इतिहासका विकृतिकरण इत्यादि राष्ट्र्रहानिके विरुद्ध हिंदू जनजागृति समितिने अनेक सफल आंदोलन किए हैं । इन आंदोलनोंके कारण महाराष्ट्र सरकारने प्लास्टिकके राष्ट्र्रध्वज फहराने, बेचने एवं निर्माणपर प्रतिबंध लगा दिया है । समितिने पाठ्यपुस्तकोंमें हिंदुओंके पराक्रमपूर्ण इतिहासका विकृतिकरण रोकनेके लिए गोवामें विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकोंको संगठित कर जनआंदोलन चलाया था । फलस्वरूप, गोवा शासनको यह पुस्तक ही पाठ्यक्रमसे निकाल देनी पडी ।

उ. हिंदूसंगठन : हिंदु समाजको संगठित करनेके लिए समितिने वर्ष २०१२ एवं वर्ष २०१३ के जून मासमें स्थानीय स्तरपर कार्य करनेवाले हिंदु संगठनोंका अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन आयोजित किया । हिंदु राष्ट्रके लिए हिंदूसंगठन इस एक सूत्री कार्यक्रमके लिए २१ राज्योंसे ७० संठनोंके अधिकारी एक साथ आए थे । इसका परिणाम यह हुआ कि अब हिंदुओंके राष्ट्रीय एवं धार्मिक समस्याओंको लेकर प्रत्येक माह पूरे देशमें लगभग ५० स्थानोंपर आंदोलन होता है । वर्ष २०१३ में १० राज्योंमें २० स्थानोंपर प्रांतीय हिंदू अधिवेशन आयोजित किए गए ।

ईश्‍वरकी कृपा, संतोंके आशीर्वाद तथा लगनसे कार्य करनेवाले कार्यकर्ताओं एवं धर्मप्रेमियोंके सहयोगके बलपर समितिका कार्य पूरे देशमें फैल गया है । हिंदू जनजागृति समितिद्वारा गत ग्यारह वर्षसे प्रज्वलित हिंदु राष्ट्र-स्थापनाके यज्ञकुंडकी उत्तुंग ज्वालाएं अब केवल भारततक सीमित न रहकर देश-विदेशके हिंदुओंतक एकताका संदेश लेकर पहुंच गई हैं ।


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पू. डॉ. चारुदत्त प्रभाकर पिंगळे, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ हैं । आप चिकित्सा महाविद्यालय में प्राध्यापक थे । वर्ष १९९६ में आपने सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी के मार्गदर्शन में साधना आरंभ की । वर्ष १९९९ से २००२ तक दैनिक सनातन प्रभात की पश्‍चिम महाराष्ट्र आवृत्ति के निवासी संपादक रहे । ईश्‍वरप्राप्ति की तीव्र तडप, शरणागतभाव और नम्रता आदि विशेषताआें से युक्त पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी को वर्ष २०१२ में सनातन संस्था का २२ वां संत घोषित किया गया । आप, अनेक धर्मप्रेमियों और साधकों को साधना के विषय में मार्गदर्शन करते हैं । पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने, कुंभमेले का महत्त्व एवं पवित्रता की रक्षा, श्री गंगाजी की महिमा, गुरुकृपायोगानुसार साधना, धर्मशिक्षण फलक, देवनदी गंगा की रक्षा करें ! आदि ग्रंथों का संकलन भी किया है ।

वर्तमान में आप, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक हैं तथा पूरे भारत में हिन्दूसंगठन और धर्मजागृति के लिए कार्य करते हैं । हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के उद्देश्य से गोवा में अबतक हुए तीन अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनों का आयोजन आप ही के नेतृत्व में हुआ है ।

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