आप हमें किस प्रकार साहाय्य कर सकते है ?

पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों को नम्र विनती !

हिन्दुत्व के कार्य में सम्मिलित होने के लिए धर्मप्रेमियों को आवाहन !

हिन्दू धर्मप्रसार एवं हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए पूर्णकाल धर्मसेवा करने हेतु सिद्ध हों !

हिन्दू धर्म की यह विशेषता है कि जब जब धर्म को ग्लानि आती है, तब तब धर्म की पुनर्स्थापना होती है । हिन्दू धर्म को आद्य शंकराचार्य, समर्थ रामदासस्वामी, स्वामी विवेकानंद समान तेजस्वी धर्मप्रसारकों की परंपरा मिली है । इन धर्मप्रसारकों ने समय की आवश्यकता को ध्यानमें लेते हुए हिन्दू धर्म की पुनर्स्थापना के लिए धर्मप्रसार एवं धर्मरक्षा की । वर्तमान समय में केवल भारत में ही नहीं, अपितु संपूर्ण पृथ्वी पर ही आई एक प्रकार की ग्लानि हम अनुभव का रहे हैं । ऐसे धर्मग्लानि के समय में धर्मसंस्थापना के लिए कार्य करना काल के अनुसार साधना है ।

वर्तमान समय में भारत में धर्माधिष्ठित राज्यव्यवस्था अर्थात ”हिन्दू राष्ट्र” स्थापित करना यह साधना सिद्ध होगी । भारत में ”हिन्दू राष्ट्र” स्थापित करने के लिए ‘सनातन संस्था’ एवं ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ ये संगठन निरंतर कार्यरत हैं । तब भी वर्तमान परिस्थिति में भारतवर्ष एवं हिन्दू धर्म के सामने जो चुनौतियां हैं, उनका विचार किया जाए, तो धर्म के लिए सर्मिपत कार्य करनेवाले धर्मवीरों की बहुत आवश्यकता है ।

. ध्यानमें लें कि त्याग साधना है ! : हिन्दू धर्म, धर्म के लिए त्याग करना सिखाता है । धर्म ने गृहस्थाश्रम के व्यक्ति को भी जीवन के अंतिम समय में वानप्रस्थाश्रम (बन में जाकर साधना करना ) एवं उसके आगे संन्यासाश्रम (सर्वस्व का त्याग करना) स्वीकार करने अर्थात त्याग करने की सीख दी है; क्योंकि त्याग किए बिना मनुष्यजन्म का सार्थक (आध्यात्मिक उन्नति) नहीं होती ।

हिन्दू धर्म के अनुसार त्याग साधना है । इसलिए चरण-दर-चरण त्याग करने की क्षमता बढाना अपेक्षित है । अंत में धर्म का आचरण एवं रक्षा के लिए तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए तन, मन एवं धन इन सबका अर्थात सर्वस्व का त्याग करना होता है । इस दृष्टिकोण से पूरा समय धर्म की सेवा करना सर्वस्व का त्याग करने का प्रथम चरण है ।

२. हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए पूरा समय योगदान करें ! : नौकरी अथवा व्यवसाय संभाल कर आज अनेक धर्मप्रेमी धर्मप्रसार की सेवा कर ही रहे हैं । परंतु अब धर्मकार्य के लिए अपना पूरा समय योगदान करने का समय आ गया है । कालमहिमा के अनुसार वर्ष २०२३ में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना निश्चित रूप से होगी; परंतु काल के अनुसार इस संधिकाल में साधना के रूप में पूरा समय धर्मसेवा करने से हमारी शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति होगी । जो धर्मप्रेमी पूर्णकाल सेवा नहीं कर सकते, उनको धर्मसेवा के लिए अधिकाधिक समय देने का प्रयास करना चाहिए ।

‘धर्माे रक्षति रक्षितः ।’ (मनुस्मृति, अध्याय ८, श्लोक १५) अर्थात ‘जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा धर्म अर्थात ईश्वर करता है’, इस वचन के अनुसार धर्मकार्य करनेवालों की रक्षा भगवान श्रीकृष्ण निश्चित ही करेंगे’, ऐसी श्रद्धा रखें । पारिवारिक समस्याएं तथा आर्थिक अडचनों के विषय में कोई चिंता न कर शीघ्रता से पूरा समय साधना करने का कदम उठाएं एवं महद्भाग्य से प्राप्त इस मनुष्यजन्म का सार्थक कर लें !’

– (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२.९.२०१७)


सनातन के विविध आश्रमों में निम्न उपकरणों की आवश्यकता ।

सनातन के विविध आश्रमों में सैकडों साधक पूर्णकालीन साधना कर रहे हैं । राष्ट्र एवं धर्म के कार्य के लिए अधिक से अधिक समय देना संभव हो, इस हेतु पूर्णकालीन साधना को आरंभ करनेवाले साधक एवं राष्ट्र एवं धर्मप्रेमियों की संख्या दिन-ब-दिन बढती जा रही है । इसलिए वर्तमान में आश्रमों में नीचे दिए उपकरणों की तत्परता से आवश्यकता है ।

उपकरण आस्थापन का नाम स्पेसिफिकेशन्स आवश्यक संख्या प्रत्येक का लगभग मूल्य
(रुपयों में)
एकूण मूल्य
(रुपयों में)
१. धुलाई यंत्र वॉशिंग मशीन वर्लपूल, सैमसंग, एल.जी. गोदरेज, ६.५ किलो क्षमता का तथा सेमी- एटोमेटिक २५ १५००० ३७५०००
२. एयार कूलर केनस्टार अथवा अन्य २० लिटर टैंक वाला २५ १०००० २५००००
३. वातानु- कूलन यंत्र एयर कंडीश्नर ब्लू स्टार, एल जी, कैरियर इत्यादि १.५ टन का स्प्लीट वाता- नुकूलन यंत्र ३७००० २२२०००
४. पेडेस्टल फैन रेमी अथवा अन्य ४०० एम.एम. हाईस्पीडवाला ३५ ३,००० १,०५,०००
५. एल.ई.डी. टयूबलाईट विप्रो २० वैट ५० ६५० ३२,५००
६. इस्त्री फिलिप्स मॉडेल एचडी ११३४ एच आइ १०८ दिवा जीसी ८३ अथवा अन्य आस्थापन ड्राइ आयर्न लिनिशड् कोटेड सोलप्लेट (linished coated solplate) २० १२००० २४०००
कुल मिला कर मूल्य (रुपयों में) १०,०८,५००

जो पाठक, हितचिंतक अथवा धर्माभिमानी उपरोक्त उपकरण क्रय करने हेतु धनरूप में सहायता करना चाहते हैं, वे श्री. विनायक आगवेकर को [email protected] संगणकीय पते पर संपर्क करें ।

धन का त्याग कर राष्ट्र एवं धर्म के कार्य में सम्मिलित होने के अवसरका लाभ उठाएं ।


विविध औषधीय गुणों से युक्त ‘सनातन दंतमंजन’ से होनेवाले लाभ ध्यान में लीजिए तथा दांतों को स्वस्थ रखने के लिए उसका उपयोग आज से ही प्रारंभ करें !

‘अबतक सनातन संस्था ने विविध नित्योपयोगी उत्पादों की निर्मिति की है । उनमें से एक उत्पाद है ‘सनातन दंतमंजन’ !

१. दंतमंजन का महत्त्व : मसूढों की सूजन एवं रक्तस्राव से बचानेवाला, मुख की दुर्गंध को रोकनेवाला, साथ ही अरुचि (मुंह का स्वाद चला जाना) नष्ट करनेवाले सनातन दंतमंजन का उपयोग करने से अभीतक अनेक पाठक, हितचिंतक, साथ ही साधकों को विविध लाभ हुए हैं ।

२. सनातन दंतमंजन के औषधीय उपयोग

अ. दंतमंजन के नियमित उपयोग से मसूढे एवं दांत बलशाली होते हैं ।
आ. मसूढों की सूजन, साथ ही उससे पीब एवं रक्त बहना बंद होता है ।
इ. दांतों की कीडे रुककर दांतों के स्वास्थ्य में सुधार होता है ।
ई. दातों में लगे कीडे तथा मुंह की दुर्गंध रुकती है ।
उ. दांत जड से सशक्त होते हैं ।

प्रतिदिन टूथपेस्ट एवं ब्रश से दांत मांजने की अपेक्षा दंतमंजन से दांत मांजना हितकारी है । इससे दांत एवं मसूढों का मर्दन (मालिश) होने से मसूढे अधिक सशक्त होते हैं । जो पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमी सनातन दंतमंजन का उपयोग करने हेतु इच्छुक हैं, वे सनातन के निकट के साधकों से अथवा ९३२२३१५३१७ इस क्रमांक पर अपनी मांग प्रविष्ट करें ।


१४ फरवरी २०१६

सनातन प्रभात के सभी पाठकों, हितचिंतकों और धर्मप्रेमियों से विनती !

‘सनातन संस्था के कार्य का वटवृक्ष दिनोंदिन फल-फूल रहा है । राष्ट्र-धर्म के कार्य में स्वयं को झोंककर सेवा करने के इच्छुक साधकों की संख्या भी दिनोंदिन बढ रही है । इसलिए, सनातन के अनेक आश्रमों और सेवाकेंद्रोंमें निम्नांकित बरतनों की शीघ्र आवश्यकता है ।

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जो पाठक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमी उपर्युक्त बरतन देना चाहते हैं या उसके लिए धनराशि अर्पित करना चाहते हैं, वे श्रीमती क्षमा राणे इनसे संपर्क करें ।’