आप हमें किस प्रकार साहाय्य कर सकते है ?

पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों को नम्र विनती !

हिन्दुत्व के कार्य में सम्मिलित होने के लिए धर्मप्रेमियों को आवाहन !


२५ अप्रैल २०१८

सर्वत्र के वाचक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमियों को नम्र विनती !

सनातन के आश्रमों का पुर्ननिर्माणकार्य, साथ ही नूतनीकरण करना आरंभ है । अतः पंखों की (फॅन की) शीघ्र आवश्यकता !

‘राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति के लिए सिद्ध रहकर प्रभावी रूप से कार्य करनेवाली सनातन संस्था एकमात्र संगठन है । विभिन्न स्थानों पर संस्था के
आश्रम तथा सेवाकेंद्र हैं । वहां सैंकडो साधक पूरा समय रहकर धर्मप्रसार की साधना कर रहे हैं । राष्ट्र एवं धर्म कार्य हेतु अधिक समय देनेवाले साधक, धर्मप्रेमियों की संख्या प्रतिदिन बढती जा रही है । अतः वर्तमान में आश्रम तथा सेवाकेंद्रों का नया निर्माणकेंद्र तथा पुर्ननिर्माणकार्य (रिनोव्हेशन) करना आरंभ है, उसके लिए पंखों की (फॅन की) शीघ्र आवश्यकता है ।

जो अर्पणदाता नएं पंखे अर्पण कर सकते हैं अथवा उसे खरीदने के लिए धनरूप में सहायता करने की इच्छा रखते हैं, वे इस क्रमांक पर संपर्क करें ।

नाम तथा संपर्क क्रमांक : श्रीमती भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

संगणकीय पता : [email protected]

टपाल का पत्ता : श्रीमती भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी,
बांदिवडे, फोंडा, गोवा पिन – ४०३४०१

‘सत्कार्य के लिए अर्पण देने के लिए इच्छुक अर्पणदाताओं, धन के त्याग द्वारा राष्ट्र एवं धर्म के कार्य में साqम्मलित रहने की इस संधी का लाभ ऊठाएं !’

– (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (२०.४.२०१८)


८ मार्च २०१८

साधकों के लिए सूचना तथा वाचक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों को नम्र विनती !

सनातन-निर्मित ‘नामजप यंत्र’की निर्मिती में सहायता कर धर्मकार्य में सम्मिलित हों !

‘अध्यात्म में नामजप को अनन्यसाधारण महत्त्व है । वह साधना का आधार है । सर्वसाधारण लोगों के मन पर देवता के नामजप का
संस्कार हो, इस उद्देश्य से सनातन संस्था की ओर से ‘नामजप यंत्र’ का उत्पादन किया जाता था; किंतु कुछ तांत्रिक अडचनों के कारण उत्पादन बंद करना बाध्य हुआ । इस यंत्र के कारण समाज को होनेवाला पृथक लाभ ध्यान में रखते हुए अब अद्ययावत नामजप यंत्र सिद्ध करने का संस्था की इच्छा है ।

नामजप यंत्र सिद्ध करने की सेवा शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण हो, उसके लिए निर्मिती की प्रक्रिया की जानकारी होनेवाले तथा यंत्र सिद्ध कर धर्मकार्य में
सम्मिलित होनेवाले इच्छुक साधक, वाचक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमी सौ. भाग्यश्री सावंत को ७०५८८८५६१० इस क्रमांक पर अथवा [email protected] इस संगणकीय पते पर संपर्क कर सकते हैं ।

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)


३ मार्च २०१८

सर्वत्र के पाठक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमियों से विनम्र अनुरोध !

सनातन के आश्रमों के नवीकरण से संबंधित निर्माण कार्य की सेवाआें के लिए निम्न सेफ्टी इक्विपमेंटस् (सुरक्षा उपकरण) देकर राष्ट्र-धर्म के कार्य के लिए सहायता करें !

राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति हेतु प्रतिबद्ध रहकर प्रभावशाली कार्य करनेवाली सनातन संस्था एकमात्र संगठन है । विविध स्थानोंपर सनातन संस्था के आश्रम तथा सेवाकेंद्र हैं । उनका नए सिरे से निर्माण कार्य, साथ ही नवीकरण चल रहा है । इसके अंतर्गत वास्तु का रंगकाम तथा सुधार करने की सेवाएं चल रहे हैं; इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से निम्न Safey Equipments (सुरक्षा उपकरण) की आवश्यकता है ।

जो हितचिंतक अथवा धर्मप्रेमी उपर्युक्त उपकरण दे सकते हैं अथवा उनका क्रय करने के लिए धन के रूप में सहायता करने के इच्छुक हैं, वे अपनी जानकारी [email protected] इस संगणकीय पतेपर अथवा निम्न डाक पतेपर भेजें । इसमें यदि कोई शंका हो, तो सौ. भाग्यश्री सावंत से ७०५८८८५६१० इस भ्रमणभाष क्रमांक पर संपर्क करें।

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)

– सद्गुरु श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (२८.२.२०१८)


२६ फरवरी २०१८

सर्वत्र के पाठक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमियों से विनम्र अनुरोध !

राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति के व्यापक उद्देश्य से आयोजित किए जानेवाले विविध कार्यक्रमों के लिए सभागार अथवा प्रांगण की उपलब्धता कराएं !

१. धर्मप्रेमियों को क्रियाशील बनानेवाले समिति के विविध कार्यक्रम ! : हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से हिन्दू धर्मजागृति सभाएं, हिन्दूसंगठन सम्मेलन, हिन्दू अधिवेशन आदि राष्ट्र एवं धर्मजागृति से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । हिन्दूसंगठन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण ऐसे कार्यक्रमों का समाज द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर प्राप्त होकर उससे अनेक हिन्दू भाई धर्मकार्य के लिए क्रियाशील बन रहे हैं । कई धर्मप्रेमी ‘हमारे गांव/नगर में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कीजिए’, यह मांग कर रहे हैं ।

२. कार्यक्रमों के लिए सभागार अथवा प्रांगणों की आवश्यकता ! : धर्मप्रेमियों की मांग के अनुसार समिति कई शहरों में हिन्दू धर्मजागृति सभाएं तथा हिन्दू अधिवेशनों का आयोजन करने के लिए प्रयासरत है । अतः इन कार्यक्रमों के लिए पाठक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमी अपना स्वयं का अथवा परिचितों का सभागार अथवा प्रांगण (खुली भूमि) उपलब्ध करवाकर धर्मकार्य में अपना योगदान दें । इन कार्यक्रमों के लिए विद्यालय-महाविद्यालय, मंदिर, औद्योगिक केंद्र, सहकारिता गृहनिर्माण संस्थाएं (को-ऑपरेटिव हाऊसिंग सोसाईटी) के सभागार अथवा प्रांगण उपलब्ध करवाने के लिए भी प्रयास किए जा सकते हैं।

अपने नगर में यदि आप का स्वयं का अथवा दूसरों के द्वारा सभागार अथवा प्रांगण निःशुल्क अथवा अल्प मूल्य में उपलब्ध हो, तो उसकी जानकारी [email protected] इस संगणकीय पतेपर अथवा निम्न डाक पतेपर भेजें । संगणकीय पता न हो, तो श्री. शिवाजी वटकर को भ्रमणभाष क्रमांक ९३२२५३३५९५ पर सूचित करें।

(डाक के लिए पता : श्री. शिवाजी वटकर, सनातन आश्रम, १०७, सनातन संकुल,
देवद, पोस्ट – ओ.एन्.जी.सी. तहसील – पनवेल, जनपद – रायगढ ४१०२२१)

– सद्गुरु श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (९.२.२०१८)

विशेष : महाराष्ट्र के कई जिलों में विराट हिन्दू धर्मजागृति सभाआें का आयोजन किया जा रहा है । उसके लिए अनेक धर्मप्रेमी सहयोग दे रहे हैं । धुळे की सभा के लिए हितचिंतक श्री. जुगलकिशोर बन्सीला गिंदोडिया ने प्रांगण उपलब्ध करा दिया था । वहां की सभा संपन्न होने के पश्‍चात उनके द्वारा दी गई प्रतिक्रिया अत्यंत अर्थपूर्ण है । अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, ‘आज वास्तविक रूप में यह प्रांगण पवित्र बन गया । ऐसी सभाआें के लिए हमारा यह प्रांगण सदैव ही उपलब्ध रहेगा ।’

८ जनवरी २०१८

सनातन के रामनाथी आश्रम के विस्तारीकरण हेतु विविध प्रकार के फर्श (टाईल्स) की आवश्यकता !

सनातन के आश्रम अर्थात् हिन्दु धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा हेतु निरंतर प्रयास करनेवाली साधकों की आध्यात्मिक पाठशाला ही ! आश्रम में रहकर पूरे समय के लिए साधना करने के लिए तथा राष्ट्र एवं धर्म के कार्य को सहायता करने के लिए इच्छुक साधक तथा धर्मप्रेमियों की संख्या प्रति दिन बढती जा रही है । अतः रामनाथी आश्रम का विस्तारीकरण का (expansion) कार्य आरंभ है । उसके लिए आगे प्रस्तुत की गई टाईल्स की आवश्यकता है ।

जो वाचक, हितचिंतक अथवा धर्मप्रेमी उपर्युक्त टाईल्स उपलब्ध कर सकते हैं वा विक्रय करने हेतु धनरूप में सहायता कर सकते हैं, वे स्वयं की जानकारी [email protected] इस संगणकीय पते पर अथवा डाक पते पर भेजें । यदि कुछ संदेह है, तो सौ. भाग्यश्री सावंत को ७०५८८८५६१० इस भ्रमणभाष क्रमांक पर संपर्क करें ।

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)

धन के त्याग द्वारा राष्ट्र एवं धर्म के कार्य में सम्मिलित होने की संधी न गवाएं !


८ जनवरी २०१८

सामाजिक संकेतस्थलों (Social Media) पर धर्मप्रसार करने के लिए विविध विषयों के पोस्ट सिद्ध करने की सेवा में सम्मिलित रहें !

‘फोटोशॉप’ तथा ‘कोरल’ इस संगणकीय प्रणाली का ज्ञान होनेवाले साधकों को सेवा की अमूल्य संधी !

सनातन संस्था तथा हिन्दु जनजागृति समिति के संकेतस्थल पर राष्ट्ररक्षण, धर्मजागृति, साधना, आचारधर्म इत्यादि विषयों पर अनमोल ज्ञानसंपदा उपलब्ध है । फेसबुक, ट्विटर, वॉटसअ‍ॅप के समान सामाजिक प्रसारमाध्यमों द्वारा इस ज्ञान का व्यापक स्तर पर प्रसार किया जा रहा है । इस के अंतर्गत राष्ट्र एवं धर्म पर आनेवाली आपत्ती, साथ ही अन्य विषयों के संदर्भ में जनसाधारणों को जानकारी देनेवाले वाचनीय तथा प्रबोधन पर पोस्टस् सिद्ध की जाती हैं । उन्हें समाज द्वारा उत्स्फूर्त प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है ।

ये पोस्ट सिद्ध करने की सेवा करने के लिए फोटोशॉप (Photoshop) अथवा कोरल (Corel) इस संगणकीय प्रणाली का (सॉफ्टवेअर्स) ज्ञान अथवा अनुभव होनेवाले साधकों की त्वरित आवश्यकता है । इच्छुक साधक पूरे समय के लिए अथवा कुछ कालावधी के लिए सनातन आश्रम में निवास कर अथवा घर बैठ कर सेवा कर सकते हैं । घर बैठकर सेवा करनेवालों को प्रतिदिन न्यूनतम 2 घंटा इस सेवा के लिए व्यतीत करना अपेक्षित है ।

सेवा हेतु इच्छुक होनेवाले जनपद सेवकों के माध्यम से आगे की सारणीनुसार अपनी जानकारी [email protected] इस संगणकीय पते पर अथवा डाक पते पर भेजें । यदि इस में कुछ संदेह है, तो श्री. गिरीजय प्रभुदेसाई को 9503097675 इस क्रमांक पर संपर्क करें ।

(डाक के लिए पता : श्री. गिरीजय प्रभुदेसाई, द्वारा सनातन आश्रम, 24/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा)

यदि इच्छुक साधक ने स्वयं किसी भी विषय पर आर्टवर्क सिद्ध किया है, तो उपर्युक्त जानकारी के साथ भेजें ।


८ जनवरी २०१८

साधक, वाचक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों को सेवा की सुवर्णसंधी !

सनातन की अमूल्य ग्रंथसंपदा तथा सनातन प्रभात नियतकालिकों की सेवा करने हेतु गुजराथी भाषा का ज्ञान होनेवालों की आवश्यकता !

‘सनातन संस्था पृथक विषयों पर अमूल्य ज्ञान प्रदान करनेवाली दुर्मिळ ग्रंथसंपदा प्रकाशित करती है । साथ ही मराठी, कन्नड, हिन्दी, अंग्रेजी तथा गुजराथी इन ५ भाषाओं में प्रकाशित करती है । साथ ही इन ५ भाषाओं में सनातन प्रभात नियतकालिक भी प्रकाशित किया जाता है । समाजमन को अध्यात्म, साधना, राष्ट्र एवं धर्म के संदर्भ की जानकारी देने के लिए इन माध्यमों का मूल्यवान हिस्सा है ।

सनातन के ग्रंथ तथा गुजराथी मासिक सनातन प्रभात की सेवा करने हेतु संगणकीय ज्ञान होनेवाले गुजराथी भाषा के जाणकारों की आवश्यकता है । मराठी अथवा हिन्दी भाषा का लिखान गुजराथी में अनुवादित करना, उसका मुद्रितशोधन करना, गुजराथी लिखान की संरचना (फॉरमैटिंग) करना, लिखान संकेतस्थल पर ‘अपलोड’ करना, ये पृथक सेवाएं उपलब्ध हैं । गुजराथी का ज्ञान होनेवाले इच्छुक साधक, वाचक, हितचिंतक तथा धर्मप्रेमी पूरे समय के लिए अथवा कुछ कालावधी के लिए आश्रम में निवास कर सेवा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं । यदि ये सेवा आश्रम में रहकर सीखी गई, तो पश्चात् घर में रहकर भी करना सहज होगा ।

उपर्युक्त कोई भी सेवा करने की इच्छा रहनेवाले जनपदसेवकों के माध्यम से आगे की सारणीनुसार अपनी जानकारी [email protected] इस संगणकीय पते पर अथवा डाक पते पर भेज सकते हैं । यदि इसमें कुछ संदेह हैं, तो सौ. भाग्यश्री सावंत को ७०५८८८५६१० इस क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं ।

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)

 

तपशील जानकारी
१. नाम तथा जनपद
२. शिक्षण
३. आयु (वर्ष)
४. संपर्क क्रमांक
५. आश्रम में निवास कर या घर में रहकर सेवा करने की इच्छा है ?
६. सेवा के लिए प्रतिदिन अथवा सप्ताह में कितना समय व्यतीत कर सकते हैं ?
७. क्या संगणक अथवा इंटरनेट की सुविधा है ?

– (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा 


१ दिसंबर २०१७

फेसबुक, ट्विटर आदि सामाजिक प्रसारमाध्यमों द्वारा धर्मप्रसार कर घरबैठे आंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यापक सेवा कीजिए !

आज के दिन समाजमनपर सामाजिक प्रसारमाध्यमों का (सोशल मीडिया का) बहुत प्रभाव है । जनसामान्यों द्वारा फेसबुक, ट्विटर, गुगल प्लस, इन्स्ट्राग्राम, वॉट्स एक आदि सामाजिक प्रसारमाध्यमों का बडी मात्रा में उपयोग किया जाता है ।

१. सामाजिक प्रसारमाध्यमों द्वारा घरबैठे धर्मप्रसार कीजिए !

सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति के संकेतस्थलोंपर वाचनीय ज्ञानसंपत्ति उपलब्ध है । साधक, साथ ही पाठक, हितचिंतक, जिज्ञासु एवं धर्मप्रेमी अपने परिवार के सदस्य, परिजन, स्नेही, कार्यालय स्थित सहयोगी, परिचित आदि से इन संकेतस्थलोंपर निहित बहुमूल्य जानकारी, साथ ही ऑडिओ एवं वीडीयो भेजकर धर्मप्रसार के इस अमूल्य अवसर का लाभ उठा सकते हैं । इस जानकारी को यदि अधिकाधिक लोगोंतक पहुंचाया गया, तो केवल पूरे भारत में ही नहीं, अपितु आंतरराष्ट्रीय स्तरपर भी घरबैठे धर्मप्रसार किया जा सकता है ।

२. राष्ट्र-धर्म, साथ ही अध्यात्म के विषय में अमूल्य ज्ञान देनेवाले विविध संकेतस्थल !

संकेतस्थल का नाम भाषा उपलब्ध लेखन
१. www.Hindujagruti.org मराठी, हिंदी एवं अंग्रेजी राष्ट्र एवं धर्मपर हो रहे आघात, हिन्दुआें की समस्याएं एवं उनका समाधान, साथ ही हिन्दूसंगठन, हिन्दू राष्ट्र, राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति से संबंधित अभियान आदि विषयोंपर आधारित वाचनीय लेखसंपत्ति
२. www.Sanatan.org मराठी, हिंदी, अंग्रेजी एवं कन्नड धर्म, अध्यात्म, आचारधर्म, त्यौहार-उत्सव एवं व्रत, साधना आदि विषयोंपर शास्त्रीय परिभाषा में अमूल्य जानकारी
३. www.SanatanPrabhat.org मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती एवं कन्नड नियतकालिक सनातन प्रभात – राष्ट्र, धर्म, राजनीति आदि विषयों के समाचार (संपादकीय दृष्टिकोणोंसहित), साथ ही साधना, आचारधर्म आदि विषयों के लेख
४. www.Balsanskar.com मराठी, हिंदी, अंग्रेजी एवं कन्नड भावी पीढी को सुसंस्कार मिलकर आदर्श पीढी बनने की दृष्टि से उपयुक्त लेखन
५. www.SSRF.ORG ५. www.SSRF.ORG २२ भाषाआें में आध्यात्मिक अनुसंधानपर आधारित लेखमाला

३.  संकेतस्थल www.Balsanskar.com बच्चे एवं अभिभावक इन दोनों के लिए मार्गदर्शक लेखन उपलब्ध !

www.Balsanskar.com इस संकेतस्थलपर आदर्श बालक कैसे बने ?, अच्छी आदतों को कैसे अपनाएं ?, अभ्यास का सुनियोजन कैसे करना चाहिए ? आदि विषयोंपर आधारित लेखमाला है । देवता, संत, ऋषि-मुनी, हिन्दू राजाआें, भारतीय स्वतंत्रतासेनाआें की कथाएं, साथ ही राष्ट्र एवं धर्म के प्रति अपने मन में प्रेम उत्पन्न होने हेतु उपयुक्त लेखन की उपलब्धता है । अभिभावकों के लिए भी आदर्श अभिभावक कैसे बने ?, बच्चों को सुसंस्कार देने का क्या महत्त्व है ?, बच्चों की समस्याआें का समाधान कैसे ढूंढना चाहिए ? आदि विषयपर आधारित अमूल्य एवं वाचनीय जानकारी उपलब्ध है ।

४. जिज्ञासुआें को साधना का महत्त्व समझानेवाले संकेतस्थल www.SSRF.ORG पर २२ भारतीय एवं विदेशी भाषाआें में लेखसंपत्ति उपलब्ध !

संकेतस्थल www.SSRF.ORG पर मनुष्य के जीवन में निहित विविध समस्याआें का क्या कारण है ?, इन समस्याआें के निराकरण के संदर्भ में साधना का क्या महत्त्व है ?, साधना द्वारा आनंदप्राप्ति कैसे होती है ?, तीव्रगति से आध्यात्मिक उन्नति हेतु क्या करना चाहिए ? आदि विषयों की आध्यात्मिक अनुसंधानपर आधारित लेखमाला उपलब्ध है । यह लेखन हिंदी अंग्रेजी, तमिल, नेपालीसहित पोर्तुगीज, फ्रेंच, जर्मन, रुसी, स्लोव्हेनियन, इंडोनेशियन, रोमेनियन, विएत्नामीस, क्रोएशियन, स्पैनिश, मलेशियन, हंगेरियन, सर्बियन इन भाषाआें में उपलब्ध है ।

५. संकेतस्थलों द्वारा धर्मप्रसार कैसे करना चाहिए ?

अ. प्रत्येक लेख के (आर्टिकल के) अंत में निहित फेसबुक, ट्विटर, गुगल प्लस आदि के आईकॉनपर क्लिक करने से उस लेख को प्रसारित (शेअर) किया जा सकता है ।

आ. स्वयं को अच्छी लगी जानकारी अथवा वेबपेज को यदि प्रसारित करना हो, तो उसकी संगणकीय मार्गिका (लिंक) को कॉपी कर उसे हम दूसरों को भेज सकते हैं ।

संकेतस्थलों के माध्यम से धर्मप्रसार करने के संदर्भ में यदि कोई अभिनव संकल्पनाएं अथवा विशेषतापूर्ण सूत्र सूझ गए अथवा धर्मप्रसार करने के पश्‍चात समाज के यदि अच्छा प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ हो, तो उसकी जानकारी संगणकीय पता [email protected] पर भेजें ।

– सद्गुरु श्रीमती बिंदा सिंगबाळजी, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (१४.९.२०१७)


२६ नवंबर २०१७


महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की विविध कलाआें के अनुसंधान हेतु ग्रंथों की आवश्यकता !

महर्षि अध्यात्म विद्यालय में ‘विविध कला और विद्याआें का अखिल मानवजाति को लाभ हो’, इस उद्देश्य से उनका अभ्यास एवं विविध अंगों से अनुसंधान किया जा रहा है । इसी के संदर्भ में कला विषयक इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आटर्स, देहली द्वारा प्रकाशित निम्नलिखित कुछ ग्रंथों की आवश्यकता है – शिल्पप्रकाश, संगीतनारायण (२ भाग), रागलक्षणम्, चित्रसूत्रम्, कलातत्त्वकोश (५ भाग)
यह ग्रंथ कोई अर्पण करने के इच्छुक हों, तो कु. तेजल पात्रीकर से ९५६१५७४८२४ अथवा ७९७२४४८९०२ क्रमांक पर संपर्क करें ।

इ-मेल : [email protected]


२६ नवंबर २०१७

जनसामान्यों में राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति के विषय में क्रियाशीलता उत्पन्न करनेवाले उद्बोधक ध्वनिचित्रचक्रिकाएं (व्हिडीआे सीडी) दिखाने हेतु प्रोजेक्टरों की आवश्यकता !

पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों को हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य में यथाशक्ति योगदान देने का स्वर्णिम अवसर !

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लक्ष्य को साकार बनाने हेतु सनातन संस्था प्रतिबद्ध है । विविध ग्रंथ, सनातन प्रभात नियतकालिक, साथ ही उद्बोधक ध्वनिचित्रचक्रिकाआें के माध्यम से संस्था की ओर से राष्ट्र एवं धर्म के विषय में जनसामान्यों में जागृति की जा रही है । इन उद्बोधक ध्वनिचित्रचक्रिकाआें को प्रोजेक्टरपर दिखाया जाता है । अतः इससे एक ही समयपर अनेक धर्मप्रेमी उनसे लाभ उठा सकते हैं और उससे उनमें क्रियाशीलता उत्पन्न हो रही है । धर्मप्रसार के अंतर्गत विविध कार्यक्रमों हेतु भी प्रोजेक्टर का उपयोग किया जा रहा है । अतः उपलब्ध प्रोजेक्टर एवं उनके परदों की संख्या अल्प होने के कारण इस कार्य हेतु प्रोजेक्टर एवं उनके परदों की आवश्यकता है ।

वस्तुएं मूल्य (रुपयों में) आवश्यक संख्या कुल मूल्य
१. प्रोजेक्टर ३०,००० १४ ४,२०,०००
२. प्रोजेक्टर हेतु परदा (स्क्रीन का आकार ६ × ८ फीट) ८००० १४ १,१२०००
कुल ५,३२,०००

उपर्युक्त वस्तुआें का क्रय करने हेतु जो पाठक, हितचिंतक अथवा धर्मप्रेमी आर्थिक सहायता दे सकते हैं अथवा सुस्थिति में युक्त उसका परदा अर्पण के रूप में देकर इस कार्य में गिलहरी का योगदान दे सकते हैं, वे सौ. भाग्यश्री से संगणकीय पता [email protected] अथवा निम्न डाक पतेपर सूचित करें । इसके संदर्भ में यदि कोई शंका हो, तो ७०५८८८५६१० से संपर्क करें ।

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)


२६ नवंबर २०१७

संगणकीय क्षेत्र में कार्यरत साधक, साथ ही पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों के लिए सेवा का बहुमूल्य अवसर !

संकेतस्थल (वेबसार्इट) से संबंधित प्रौद्योगिकी की विविध सेवाआें हेतु जानकारों की तुरंत आवश्यकता

धर्मशिक्षा, धर्मजागृति एवं राष्ट्ररक्षा के व्यापक कार्यों को शीघ्रता के साथ करने का प्रभावशाली माध्यम है संकेतस्थल (वेबसाईट) ! विविध संकेतस्थलों द्वारा आंतरराष्ट्रीय स्तरपर किए जानेवाले धर्मप्रसार के कार्य में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है । अतः संकेतस्थल से संबंधित सेवा करनेवाली साधकों की संख्या अल्प पड रही है । संकेतस्थल से संबंधित तांत्रिक सेवाएं करना, विविध संगणकीय परियोजनाएं बनाना, ई.आर्.पी. प्रणाली के विषय में तांत्रिक सेवाएं सीख लेना आदि सेवाआें हेतु पूर्णकालिक अथवा कुछ अवधि के लिए रामनाथी आश्रम में रहकर अथवा घरबैठे सेवा करने के इच्छुक संगणकीय क्षेत्र में कार्यरत जानकारों की आवश्यकता है ।

इस सेवा करने हेतु इच्छुक व्यक्तियों के लिए Web-design (Html, CSS, jQuery), PHP, Mysql, WordPress CMS, PrestaShop, Laravel or similar PHP framework, Android/iPhone App Development, React Native or similar mobile development framework, Website Security, Linux Administration इन संगणकीय भाषा का एवं प्रौद्यौगिकी का उत्तम ज्ञान होना आवश्यक है ।
संकेतस्थल के माध्यम से सेवा कर धर्मकार्य में गिलहरी का योगदान देने के इच्छुक जनपदसेवक के माध्यम से निम्न सारणी के अनुसार अपनी जानकारी को संगणकीय पता [email protected] अथवा निम्न डाक के पतेपर भेजें । इसके संदर्भ में यदि कोई शंका हो, तो सौ. भाग्यश्री सावंत से ७०५८८८५६१० संपर्क करें । (उपर दी गई संगणकीय भाषाआें के अतिरिक्त अन्य भाषाएं अथवा प्रौद्योगिकी का यदि उत्तम ज्ञान हो, तो आप उस विषय में भी सूचित कर सकते हैं ।)

नाव एवं संपर्क क्रमांक : सौ. भाग्यश्री सावंत – ७०५८८८५६१०

र्इमेल पता : [email protected]

(डाक के लिए : सौ. भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१)

घटक विवरण :

१. नाम एवं जनपद

२. संपर्क क्रमांक

३. शिक्षा

४. आयु (वर्ष)

५. संगणकीय क्षेत्र का अनुभव (यदि हो, तो)

६. कौन-कौनसी संगणकीय भाषाएं ज्ञात हैं ?

७. उपर्युक्त सेवाआें में से आप कौन-कौनसी सेवाएं कर सकते हैं ?

८. सेवा हेतु समय देने का स्वरूप (आश्रम में रहकर अथवा घरबैठे सेवा करेंगे ?) एवं प्रतिदिन शनिवार/रविवार कितने घंटोंतक)


२६ नवंबर २०१७

विविध भारतीय भाषाआें का ज्ञान होनेवाले साधक, वाचक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमियों के लिए ज्ञानदान के कार्य में सम्मिलित होने का बहुमूल्य अवसर !

सनातन द्वारा निर्मित सर्वांगस्पर्शी बहुमूल्य ग्रंथसंपत्ति सभी भारतीय भाषाआें में प्रकाशित हो, इसके लिए भाषांतर की व्यापक सेवाआें में सम्मिलित हों !

१. सनातन द्वारा प्रकाशित विविध भाषाआें के ग्रंथ अनमोल ज्ञानामृत ! : अध्यात्मप्रसार एवं चिरकाल कार्य करनेवाला सर्वोत्तम माध्यम है ग्रंथ ! सनातन संस्था ने अध्यात्म का शास्त्रशुद्ध भाषा में विवेचन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सुवर्णमध्य को साधकर सुलभ भाषा में ज्ञान देनेवाले अमूल्य ग्रंथों का निर्माण किया है । ये ग्रंथ जिज्ञासुआें के लिए अत्यंत मार्गदर्शक सिद्ध हो रहे हैं । इन ग्रंथों के विषय में अनेक साधक एवं जिज्ञासुआें को प्राप्त अनुभूतियां तो इन ग्रंथों में व्याप्त चैतन्य को सिद्ध करनेवाला अ श्रेणी का प्रमाणपत्र ही हैं ।

२. विविध भारतीय भाषाआें का ज्ञान हानेेवालों के लिए सेवा का बहुमूल्य अवसर ! : अबतक सनातन के कुछ ग्रंथ ११ भाषाआें में उपलब्ध हो चुके हैंं । इन ग्रंथों का पूरे भारत में व्याप्त सभी जिज्ञासुआेंतक पहुंचना आवश्यक है; किंतु अन्य भाषाआें के ज्ञानवाले मनुष्यबल के अभाव के कारण यह कार्य धीमी गति से चल रहा है । ग्रंथनिर्माण के इस व्यापक कार्य को गति मिले; इसके लिए मराठी, हिन्दी, अंग्रेज, कन्नड, बंगाली, ओरिया, गुजराती, गुरुमुखी, आसामी आदि भारतीय भाषाआें का ज्ञान होनेवाले घरबैठे अथवा आश्रम में रहकर इस सेवा में सम्मिलित हो सकते हैं । इस सेवा हेतु इच्छुक साधक, साथ ही पाठक, हितचिंतक एवं धर्मप्रेमी अपने जनपदसेवक के माध्यम से निम्न सारणी के अनुसार अपनी जानकारी को संगणकीय पता [email protected] पर भेजें ।

विवरण जानकारी

१. नाम
२. जनपद
३. संपर्क क्रमांक
४. शिक्षा
५. कौनसी भाषा ज्ञात है ?
६. आश्रम में रहकर अथवा घरबैठे सेवा करेंगे ?
७. प्रतिदिन अथवा सप्ताह में सेवा हेतु कितना समय दे सकते हैं ?
८. क्या आपके पास संगणक एवं इंटरनेट की सुविधा है ?

– (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळजी, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (१९.११.२०१७)


हिन्दू धर्मप्रसार एवं हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए पूर्णकाल धर्मसेवा करने हेतु सिद्ध हों !

हिन्दू धर्म की यह विशेषता है कि जब जब धर्म को ग्लानि आती है, तब तब धर्म की पुनर्स्थापना होती है । हिन्दू धर्म को आद्य शंकराचार्य, समर्थ रामदासस्वामी, स्वामी विवेकानंद समान तेजस्वी धर्मप्रसारकों की परंपरा मिली है । इन धर्मप्रसारकों ने समय की आवश्यकता को ध्यानमें लेते हुए हिन्दू धर्म की पुनर्स्थापना के लिए धर्मप्रसार एवं धर्मरक्षा की । वर्तमान समय में केवल भारत में ही नहीं, अपितु संपूर्ण पृथ्वी पर ही आई एक प्रकार की ग्लानि हम अनुभव का रहे हैं । ऐसे धर्मग्लानि के समय में धर्मसंस्थापना के लिए कार्य करना काल के अनुसार साधना है ।

वर्तमान समय में भारत में धर्माधिष्ठित राज्यव्यवस्था अर्थात ”हिन्दू राष्ट्र” स्थापित करना यह साधना सिद्ध होगी । भारत में ”हिन्दू राष्ट्र” स्थापित करने के लिए ‘सनातन संस्था’ एवं ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ ये संगठन निरंतर कार्यरत हैं । तब भी वर्तमान परिस्थिति में भारतवर्ष एवं हिन्दू धर्म के सामने जो चुनौतियां हैं, उनका विचार किया जाए, तो धर्म के लिए सर्मिपत कार्य करनेवाले धर्मवीरों की बहुत आवश्यकता है ।

. ध्यानमें लें कि त्याग साधना है ! : हिन्दू धर्म, धर्म के लिए त्याग करना सिखाता है । धर्म ने गृहस्थाश्रम के व्यक्ति को भी जीवन के अंतिम समय में वानप्रस्थाश्रम (बन में जाकर साधना करना ) एवं उसके आगे संन्यासाश्रम (सर्वस्व का त्याग करना) स्वीकार करने अर्थात त्याग करने की सीख दी है; क्योंकि त्याग किए बिना मनुष्यजन्म का सार्थक (आध्यात्मिक उन्नति) नहीं होती ।

हिन्दू धर्म के अनुसार त्याग साधना है । इसलिए चरण-दर-चरण त्याग करने की क्षमता बढाना अपेक्षित है । अंत में धर्म का आचरण एवं रक्षा के लिए तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए तन, मन एवं धन इन सबका अर्थात सर्वस्व का त्याग करना होता है । इस दृष्टिकोण से पूरा समय धर्म की सेवा करना सर्वस्व का त्याग करने का प्रथम चरण है ।

२. हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए पूरा समय योगदान करें ! : नौकरी अथवा व्यवसाय संभाल कर आज अनेक धर्मप्रेमी धर्मप्रसार की सेवा कर ही रहे हैं । परंतु अब धर्मकार्य के लिए अपना पूरा समय योगदान करने का समय आ गया है । कालमहिमा के अनुसार वर्ष २०२३ में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना निश्चित रूप से होगी; परंतु काल के अनुसार इस संधिकाल में साधना के रूप में पूरा समय धर्मसेवा करने से हमारी शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति होगी । जो धर्मप्रेमी पूर्णकाल सेवा नहीं कर सकते, उनको धर्मसेवा के लिए अधिकाधिक समय देने का प्रयास करना चाहिए ।

‘धर्माे रक्षति रक्षितः ।’ (मनुस्मृति, अध्याय ८, श्लोक १५) अर्थात ‘जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा धर्म अर्थात ईश्वर करता है’, इस वचन के अनुसार धर्मकार्य करनेवालों की रक्षा भगवान श्रीकृष्ण निश्चित ही करेंगे’, ऐसी श्रद्धा रखें । पारिवारिक समस्याएं तथा आर्थिक अडचनों के विषय में कोई चिंता न कर शीघ्रता से पूरा समय साधना करने का कदम उठाएं एवं महद्भाग्य से प्राप्त इस मनुष्यजन्म का सार्थक कर लें !’

– (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२.९.२०१७)

राष्ट्र एवं धर्म रक्षा के लिए कार्यरत
हिन्दू जनजागृति समिति को
दिया गया धर्मदान ‘सत्पात्र दान’ होगा !