धार्मिक कृती

हमें तिथि के अनुसार जन्मदिन क्यों मनाना चाहिए ?

जन्मदिन अर्थात जीव की आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति । यद्यपि ज्योतिषशास्त्रानुसार जन्मदिन की तिथि के ‘घाततिथि’ होती है । तथापि उस तिथि पर लाभ अधिक होने से जन्मदिन तिथि के अनुसार मनाना उचित होता है ।

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हिन्दू संस्कृति का प्रतीक `नमस्कार’

ईश्वरके दर्शन करते समय अथवा ज्येष्ठ या सम्माननीय व्यक्तिसे मिलनेपर हमारे हाथ अनायास ही जुड जाते हैं । हिंदू मनपर अंकित एक सात्त्विक संस्कार है `नमस्कार’ । भक्तिभाव, प्रेम, आदर, लीनता जैसे दैवीगुणोंको व्यक्त करनेवाली व ईश्वरीय शक्ति प्रदान करनेवाली यह एक सहज धार्मिक कृति है ।

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आरती कैसे करें ?

उपासकके हृदयमें भक्तिदीपको तेजोमय बनानेका व देवतासे कृपाशीर्वाद ग्रहण करनेका सुलभ शुभावसर है `आरती’ । कोई कृति हमारे अंत:करणसे तब तब होती है, जब उसका महत्त्व हमारे मनपर अंकित हो । इसी उद्देश्यसे आरतीके अंतर्गत विविध कृतियोंका आधारभूत अध्यात्मशास्त्र यहां दे रहे ।

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शांतिविधी

वृद्धावस्थामें इंद्रियां अकार्यक्षम होने लगती हैं, उदा. कम सुनाई देना, कम दिखाई देना इत्यादि । देवताओंकी कृपासे इन व्याधियोंका परिहार हो एवं शेष आयु सुखपूर्वक बीते, इस हेतु शास्त्रके अनुसार ५० वर्षसे १०० वर्षकी आयुतक प्रत्येक ५ वर्षोपरांत शांतिविधि करनी चाहिए |

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