लेख

जब राजपूत वीरांगना ‘किरण देवी’ से अकबर को मांगनी पडी अपने प्राणों की भीख

एक पतिव्रता और साहसी महिला ने प्राणों की बाजी लगाकर न केवल अपनी इज्जत की रक्षा की, अपितू भविष्य में नारियों को उसकी वासना का शिकार बनने से भी बचा लिया। और उसके बाद वास्तव में नौरोज मेला बंद हो गया।

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माउंटआबू के चारों दिशाओं में विराजमान हैं भगवान हनुमान

राजस्थान का माउंटआबू एक पहाड़ी क्षेत्र होने के अलावा एक ऐसा शहर है जो कण-कण से अपनी आध्यात्मिकता का एहसास कराता है। जहां भगवान शंकर, भगवान राम, भगवान विष्षु, भगवान कृष्ण और भगवान दत्तात्रेय से जुड़े कई प्राचीन मंदिर है।

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शबरीमाला देवस्थान में महिलाओंके प्रवेशपर प्रतिबंध ‘योग्य अथवा अयोग्य’ ?

‘सनातन प्रभात’ के केरल स्थित एक वाचक अधिवक्ता श्री. के.जी. मुरलीधरन ने ‘शबरीमाला देवस्थान में महिलाओंके प्रवेशपर प्रतिबंध योग्य अथवा अयोग्य’ ?’ इस प्रसिद्ध हुए लेख पर, इस देवस्थान की परंपरा की बारे में हमें जानकारी दी है, वो आप के लिये प्रसिद्ध कर रहें हैं, क्यों, इस मंदिर में महिलाओंपर प्रवेश प्रतिबंधित है !

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पुनः उभर रहा है स्वाभाविक भारत : प्रो. कुसुमलता केडिया

आदित्यनाथ योगी जी का मुख्यमंत्री बनना स्वाभाविक भारत के उभार का प्रमाण है। ये भारतीय सांस्कृतिक चेतना, साधना और मर्यादा के ध्वजावाहक हैं।

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मुट्ठीभर लोगों के तुष्टिकरण हेतु और कितने दिनोंतक बहुसंख्यकों की बली चढाई जाएगी ?

‘देश में लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था है’ ऐसा कहना, एक तरह से जनता को धोखा देना है ! जबतक कानून में समानता नहीं है, तबतक यह लोगों का राज्य है, ऐसा हम कैसे कह सकते हैं ? मुट्ठीभर लोगों के तुष्टिकरण हेतु और कितने दिनोंतक बहुसंख्यकों की बली चढाई जाएगी ?

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मिडिया का ‘हिन्दू’विरोधी अजेंडा !

भारत में न्यूज चैनलों के नामपर २४ घंटे समाचार देनेवाले चैनलों का वास्तविक रूप है हिन्दू धर्म में व्याप्त (कथित) कामियों को बढा-चढाकर प्रस्तुत करना और हिन्दुत्व हेतु कार्य करनेवाले व्यक्ति एवं संगठनों को अपकीर्त करना।

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योगी आदित्यनाथ जी के मुख्यमंत्री बनने के राजनैतिक अर्थ : प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज

आदित्यनाथ योगी जी का करोडों मतदाताओं वाले राज्य में सत्तासीन होना नये युग की शुरूआत है। यह भारतीय लोकतंत्र के स्वस्थ स्वरूप की सहज गतिशीलता का प्रमाण है।

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विधानसभा चुनाव २०१७ में विजय के निहितार्थ : प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को हिन्दुओं के क्षोभ और असन्तोष की अचानक भनक लग गयी। उनके सम्पूर्ण आचरण में हिन्दुत्व की कोई छाप नहीं है, परन्तु एक कुशल राजनेता के नाते उन्होंने हिन्दुओं का मन छू लिया है। इसी से उन्हें हिन्दू समाज का आषीर्वाद मिल गया है। इसमें मोदी लहर जैसी कोई बात नहीं है।

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पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं के प्रति बढ़ती असहिष्णुता . . .

दादरी में अखलाक की हत्या के बाद राजनेताओं से लेकर अभिनेताओं और साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों को देश असुरक्षित लगने लगा, पुरस्कार वापसी की मुहिम शुरू हो गई परन्तु प. बंगाल की दु:खद और चिंताजनक घटनाक्रमों पर सन्नाटा फैला हुआ है, क्यों ?

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राजा-महाराजाओं के ऐतिहासिक भवन एवं राजमहलों का उत्तम प्रकार से जतन करनेवाला राजस्थान !

छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्श को सामने रखकर महाराष्ट्र में राजनीति तो चलती ही रहती है; परंतु उनके इतिहास के साक्षी बने ‘सिंधुदुर्ग’ इस सागरी किले की तथा उसमें स्थित विश्‍व के एकमात्र शिवराजेश्‍वर मंदिर की हो रही ‘उपेक्षा’ को, दुर्भाग्यपूर्ण मानना पडेगा !

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