अंनिस

डॉ. दाभोलकर हत्या प्रकरण में घोटालेबाज अंनिस (अंधविश्‍वास निर्मूलन समिति) की जांच की गई, तो प्रमाण मिल सकते हैं ! – सनातन संस्था

डॉ. दाभोलकर की हत्या होकर ४ वर्ष बीतने आए; किंतु उनके हत्यारे अभी नहीं मिले और ‘अंनिस’वालों ने सनातनपर प्रतिबंध लगाने का हुआं लगा रखा है !

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हिन्दुत्वनिष्ठों द्वारा विरोध के पश्‍चात अंधविश्‍वास निर्मूलन समिति की ओर से आयोजित प्राथमिक शिक्षकों की कार्यशालाएं रद्द !

सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षकों के लिए‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रकल्प’ के नामपर अंधविश्‍वास निर्मूलन समिति की ओर से जळगाव जनपद में तहसील स्तर की कार्यशालाआें का आयोजन किया गया था ।

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पुरोगामी संतोंद्वारा रचित अभंगों का (भक्तिगीतों का) अपने सुविधा के अनुरुप अर्थ न निकालें ! – सतीश कोचरेकर

मराठी साम वाहिनी पर २४ जून को ‘पंढरपुर वारी में पुरोगामी क्यों घुसे ?’ इस विषय पर चर्चासत्र का आयोजन किया गया था. इसमें हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. सतीश कोचरेकर एवं राष्ट्रीय प्रवचनकार डॉ.सच्चिदानंद शेवडे ने पुरोगामियों के झूठ को उजागर किया ! प्रस्तुत कर रहें हैं इसीका वृत्तांत . . .

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आदर्श गणेशोत्सव और खडिया मिट्टी से बनीं गणेशमूर्तियों की प्रतिष्ठापना करने हेतु उद्बोधन के लिए शहर में फेरी निकालने का कोल्हापुर के हिंदुत्वनिष्ठों का निर्णय !

अंधश्रद्धा निर्मूलन समितिद्वारा हस्तक्षेप किए जाने के कारण गणेशोत्सव के समय में श्री गणेश का अत्यंत अनादर हो रहा है। ये अंनिसवाले स्वयं कुछ करने के स्थान पर शासन यंत्रणा को साथ में लेकर ‘मूर्तिदान’ अभियान चला रहे हैं।

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वारकरी संप्रदाय एवं हिन्दू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्वावधान में, ‘सनातन धर्म’ के प्रति हो रहें ‘संयुक्त अभियान’

हाल ही में, श्रीक्षेत्र आळंदी में, स्वानंद सुखनिवासी सदगुरु जोग महाराजद्वारा स्थापित वारकरी शिक्षण संस्था का शताब्दिपूर्ति महोत्सव संपन्न हुआ। प्रस्तुत कर रहें हैं इसी का वृत्तांत, विस्तार से . . .

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कागज की लुगदी से श्रीगणेशमूर्ति बनाने के विषय में महाराष्ट्र शासन द्वारा किया गया निर्णय अयोग्य – राष्ट्रीय हरित आयोग का आदेश

कागज की लुगदी से मूर्ती बनाने के लिए कहकर शासन द्वारा अयोग्य निर्णय किया गया था । यहां से आगे शासन इस प्रकार से अयोग्य निर्णय लेकर हमारी धर्मभावनाआें से न खेलें ।

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जहां विज्ञान कि मर्यादा समाप्त होती है, वहां अध्यात्म का प्रांत आरंभ होता है ! – शास्त्रज्ञ डॉ. सुबोध पंडित

विद्यार्थियों ने कहना चाहिए कि, मुझे यह ज्ञात नहीं है; परंतु वह जान लेने की मेरी सिद्धता है । कोई ऐसा दावा न करे कि मैं सर्वज्ञ हूं । कोई एक घटना किसप्रकार हुई, यह जान कर उस पर प्रयोग करे, परंतु ध्यान में रहे कि, परमेश्‍वर ही सर्वाेच्च शक्ति है ।

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‘सनबर्न फेस्टिवल’ : कुछ अनुत्तरित प्रश्‍न !

‘सनबर्न फेस्टिवल’ के उपलक्ष्य मेें पैसेवाले नियम एवं कानून से भी अधिक वर्चस्ववाले सिद्ध होते हैं, यह दिखाई दिया । इससे सरकार तथा पुलिस-प्रशासन की ‘धृतराष्ट्र-गांधारी’ मानसिकता स्पष्ट हुई ।

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