हिंदू राष्ट्र-स्थापनाके लिए जागृति करनेवाले परिणामकारक उपक्रम !

सारणी

१. हिंदू राष्ट्र-स्थापनाकी दृष्टिसे हिंदुओंका संगठन बढानेवाले अभियान !
२. व्यापक हिंदूजागृति करनेवाले अभियान
३. हिंदुओंकी अपनी अधिकृत दूरचित्रवाहिनी (चैनल) होना अत्यावश्यक !


 

हिंदू राष्ट्र-स्थापनाके लिए कार्य करते समय हमें धर्मशिक्षा, धर्मजागृति, धर्मरक्षा, हिंदूसंगठन तथा धर्मक्रांति इन पांच मार्गोंका अवलंब करना होगा । इसी कार्यके एक भागकी दृष्टिसे हिंदू जनजागृति समिति गत १० वर्षोंसे धर्मशिक्षा तथा धर्मजागृति इन विषयोंसे संबंधित अभियान बडी मात्रामें चला रही है । इनमें प्रभावी रहे कुछ अभियान अन्य संगठन भी चला सकते हैं ।

 

१. हिंदू राष्ट्र-स्थापनाकी दृष्टिसे हिंदुओंका संगठन बढानेवाले अभियान !

सद्यःस्थितिमें समाचार-पत्र, दूरचित्रवाहिनियां इत्यादि प्रसारमाध्यम; जालस्थल, व्याख्यान, फलक, भित्तिपत्रक जैसे अनेकविध माध्यमोंद्वारा जागृति की जाती है । माध्यमोंकी मर्यादा तथा हिंदुओंकी सद्यःस्थितिका विचार करें, तो हिंदुओंमें प्रतिदिन जागृति होनेके लिए क्या कर सकते हैं, इसका विचार हमें करना होगा । समाज, राष्ट्र तथा धर्मके विषयमें जागृति करनेके लिए अल्पव्ययी एवं प्रभावी अभिनव माध्यमोंके पर्याय चुनने होंगे । ऐसे ही कुछ चुनिंदे माध्यमोंके लाभ आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं ।

१ अ. हिंदुओंमें जागृति करनेका प्रभावी माध्यम : हिंदू धर्मजागृति सभा !

हिंदुओंमें जागृति होनेके साथ ही उनका संगठन निर्माण होनेके लिए वर्ष २००७ से हिंदू जनजागृति समिति हिंदू धर्मजागृति सभाका आयोजन कर रही है । वर्ष २०१३ तक, अर्थात गत ६ वर्षोंमें समितिने ७ राज्योंमें लगभग ९०० धर्मजागृति सभाओंके माध्यमसे ११ लाख हिंदुओंतक धर्मपर होनेवाले आघातोंको पहुंचाया है ।

१ अ १. हिंदू धर्मजागृति सभाका आयोजन

अ. बडा आयोजन होते हुए भी अल्प मनुष्यबल लगना

ऐसी सभाओंके लिए किया जानेवाला आयोजन बडा होता है; परंतु समितिने कुछ स्थानोंपर मात्र ८-१० कार्यकर्ताओंको लेकर ही ऐसी सभाएं यशस्वी की हैं ।

आ. प्रत्येकको अपनी इच्छा, क्षमता तथा समय के अनुसार धर्मकार्यमें सहभागी होना संभव होना

इस सभाके लिए समाजसे विविध प्रकारकी साहायताकी आवश्यकता होती है, जैसे कार्यकर्ताओंकी निवास व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, होर्डिंगके लिए प्रायोजक, प्रसार हेतु वाहन, ध्वनिव्यवस्था । इस प्रकारकी सहायता स्थानीय हिंदू धर्माभिमानियोंद्वारा विनामूल्य अथवा अल्प मूल्यमें प्राप्त हो सकता है । इसके द्वारा एक प्रकारसे वे सभाके कार्यसे जुड जाते हैं ।

इ. ८ मास चलाने योग्य अभियान

इस अभियानके ये सर्व लाभ देखकर हिंदू जनजागृति समिति पूरे वर्ष (वर्षाके दिन छोडकर) ऐसी सभाओंका आयोजन करती है ।

१ अ २. हिंदू धर्मजागृति सभाओंके लाभ

अ. घर-घर जाकर धर्मजागृति करना तथा हिंदुत्वके विषयमें आस्था रखनेवाले लोगोंको ढूंढना कठिन होता है । किसी परिसरमें हिंदू धर्मजागृति सभाका आयोजन करनेसे उस भागके हिंदुओंमें धर्मजागृति होती है और हिंदुत्वके विषयमें आस्था रखनेवाले लोगोंको ढूंढना सुलभ हो जाता है । धर्मजागृति सभामें प्रस्तुत की जानेवाली हिंदू धर्मपर आए संकटोंकी शृंखला सुनकर उन संकटोंके विरोधमें कुछ करनेकी उर्मी धर्माभिमानी हिंदुओंमें निर्माण होती है । सभाके उपरांत दिए जानेवाले अभिप्राय पत्रोंमें धर्मसत्संग, धर्मजागृति तथा स्वरक्षा प्रशिक्षण इनमें जिन्हें सहभागी होना संभव हो, वे उन अभियोनोंके माध्यमसे सक्रिय बननेका निर्धार करते हैं ।

आ. धर्मजागृति सभाके लिए श्रोता बनकर आए कुछ हिंदुत्ववादी गुट उनके परिसरमें अथवा गांवमें इसी प्रकारकी धर्मसभाका आयोजन करते हैं और समितिको आमंत्रित करते हैं । पुणे जनपदके एक गांवमें आयोजित सभा देखकर उनके आसपासके गांवोंके लोगोंने उनके गांवोंमें भी धर्मसभाका आयोजन किया ।

इ. इन सभाओंमें हिंदू राष्ट्र-स्थापनाके लिए प्रतिदिन १ घंटा दें !, ऐसा आवाहन किया जाता है । कर्महिंदू इस आवाहनको प्रतिसाद दे रहे हैं । ऐसे हिंदुओंके लिए धर्मशिक्षावर्ग तथा धर्मजागृतिपर अभियान समिति उपलब्ध करा देती है ।

ई. मनुष्यबल अल्प होनेके कारण हिंदू जनजागृति समिति निरंतर सर्वत्र नहीं पहुंच सकती, ऐसे कई स्थानोंपर सभा लेनेके उपरांत स्थानीय युवकोंने उन्हें संभव हो, ऐसे उपक्रम समितिके मार्गदर्शनानुसार स्थानीय स्तरपर चलाना आरंभ किया । महाराष्ट्रके संभाजीनगर (औरंगाबाद)तथा जालना इन जनपदोंके २९ ग्रामीण क्षेत्रोंसे समिति सभाओंके कारण जुड गई । इन गांवोंके ४५० से भी अधिक धर्माभिमानी समितिके प्रासंगिक अभियानोंमें सहभाग लेते हैं । सभाके उपरांत उनमेंसे न्यूनतम १०० धर्माभिमानी राष्ट्ररक्षा तथा धर्मरक्षाके प्रत्येक आंदोलनमें सहभागी होते हैं ।

उ. हिंदू धर्मजागृति सभाके उपरांत देवताओंकी विडंबना रोकना, हिंदुओंका धर्मांतर रोकना, लव जिहादको प्रतिबंध करना, राष्ट्रध्वजका अवमान रोकना इत्यादि धर्म एवं राष्ट्र रक्षाके अभियानोंमें धर्माभिमानी हिंदू सक्रिय सहभाग ले रहे हैं ।

१ अ ३. हिंदू धर्मजागृति सभाके लाभ बतानेवाले कुछ उदाहरण

अ. आपसी मतभेदोंको भूलकर हिंदुओंने धर्मरक्षणार्थ एकत्रित आना

आंध्रप्रदेशके निलगुंद (जनपद बदामी) गांवके हिंदू युवकोंके दो गुटोंमें आपसी मतभेदोंके कारण झगडे होते थे । उन्हें भूलकर वे संगठित हो गए । पूर्वमें वे गांवके मुसलमानोंसे डरते थे; परंतु सभाके पश्‍चात उनका संगठन बढा और उन्होंने मस्जिदपर लगाया पाकिस्तानका ध्वज निकालनेके लिए पुलिसको बाध्य किया ।

आ. धर्मपर होनेवाले आक्रमणोंके विरोधमें हिंदुओंने मार्गपर उतरना

आंध्रप्रदेशके भैसाना गांवमें रूसमें गीतापर पाबंदी यह वृत्त समझते ही इस घटनाका निषेध करनेके लिए १ सहस्रसे भी अधिक दूकानें २ घंटोंके लिए बंद कर एक फेरी निकाली गई । यह जागृति इस सभाका परिणाम होनेका सूत्र वहांके व्यापारियोंने बताया ।

इ. लव जिहादको प्रतिबंध करना

एक स्थानपर सभाके उपरांत युवकोंने परिसरके अनुसार गुट बनाए । वे एक-दूसरेके संपर्कमें रहते हैं । अब वहां लव जिहाद की घटना ध्यानमें आए, तो सभी एकत्रित आकर जिहादियोंको वैध मार्ग से विराेध करते हैं । इस कारण उस शहरमें लव जिहादकी घटनाएं न्यून हो गईं हैं ।

१ अ ४. सक्रिय होने हेतु इच्छुकोंके लिए ब्यौरा बैठक

धर्मजागृति सभा सुननेके उपरांत राष्ट्र एवं धर्म कार्य करनेकी इच्छा रखनेवालोंके लिए हिंदू जनजागृति समिति धर्मरक्षाके विषयमें विविध अभियानोंकी सूचिका अभिप्रायपत्र सभाके स्थानपर रखती है । जिसे जिस विषयमें रूचि है, वह उस अभियानमें सहभागी होनेके लिए अभिप्रायपत्रमें नोंद करता है । इन अभिप्राय देनेवालोंकी एक बैठक सभाके पश्‍चात तुरंत ४-५ दिनोंमें ली जाती है । सभाके दिन ही इस बैठकका स्थान तथा समय बताया जाता है । अभिप्रायपत्र देनेवालोंको बैठकके दिन स्मरण दिलाया जाता है । इस कारण बैठकके लिए अच्छा प्रतिसाद भी मिलता है ।

बैठकके लिए उपस्थित हिंदू धर्माभिमानियोंको उनकी क्षमताके अनुसार अभियान उपलब्ध कराए जाएं, तो वे हिंदुत्वके लिए सक्रिय हो जाते हैं । ऐसे सक्रिय धर्माभिमानियोंकी समय-समयपर बैठकोंका आयोजन कर यह संगठन हम बलशाली बना सकते हैं ।

१ आ. विशेष लोकप्रिय बनी हुईं धर्मजागृतिपर प्रदर्शनियां !

१ आ १. आयोजन

सार्वजनिक धार्मिक उत्सव, मंदिरोंमें होनेवाले धार्मिक उत्सव, मेलोंके स्थान, विवाह समारोह, कार्यालय, राष्ट्रजागृतिसे संबंधित कार्यक्रम इत्यादि प्रसंगोंमें धर्मशिक्षा, धर्मरक्षा तथा राष्ट्ररक्षा इन विषयोंकी प्रदर्शनिका आयोजन समिति करती है । हिंदू जनजागृति समितिने धर्मशिक्षा, धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा, क्रांतिकारी पुरुष, बांग्लादेशी एवं कश्मीरी हिंदुओंपर होनेवाले अत्याचार, लव जिहाद, गोरक्षा, गंगारक्षा तथा हिंदू राष्ट्रकी स्थापना जैसे ९ विषयोंसे संबंधित धर्मजागृतिपर प्रदर्शनियोंकी निर्मिति की है ।

अब तक इन फलक प्रदर्शनियोंका २ सहस्र ५०० से भी अधिक स्थानोंपर आयोजन किया गया है । समाजके अनेक प्रतिष्ठित, हिंदुत्वनिष्ठ, संत आदिने इन प्रदर्शनियोंका अवलोकन किया है और धर्मजागृतिके कार्यमें योगदान दिया है ।

१ आ २. फलनिष्पत्ति

समितिको इस अभियानका सर्वाधिक लाभ इस वर्ष हुए महाकुंभपर्वमें हुआ । समितिने कुंभके स्थानपर इन ९ विषयोंपर आधारित प्रदर्शनी लगाई थी । इस प्रदर्शनीका लाभ २ लाखसे भी अधिक भाविकोंने तथा १०० संत-महंतोंने लिया । इस प्रदर्शनीके कारण समितिके कार्यमें सहभागी होनेके लिए भारतभरके २ सहस्रोंसे भी अधिक संपर्क प्राप्त हुए । साथ ही ४० संतोंने अपने-अपने क्षेत्रमें भी यह प्रदर्शनी लगानेके लिए समितिको आमंत्रित किया और इस हेतु सर्व प्रकारकी सहायता की । इस कारण समिति अब तक जहां पहुंच नहीं पाई थी, ऐसे स्थानोंपर भी समितिका कार्य आरंभ हुआ ।

इसी प्रकार सर्व हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंको फलक प्रदर्शनियोंका आयोजन करना संभव हो, इस हेतु इन फलकोंकी कलाकृतियां (आर्टवर्क) समितिने आप सभीके लिए, उपलब्ध करा दी हैं । इन फलकोंके नीचे आप अपने संगठनका नाम डालकर यह अभियान चला सकते हैं ।

 

२. व्यापक हिंदूजागृति करनेवाले अभियान

२ अ. जालस्थल अर्थात वेबसाईट

हिंदू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए आजके निद्रिस्त हिंदू समाजको जागृत करने हेतु उसतक पहुंचकर उसे धर्मशिक्षा देना तथा राष्ट्र एवं धर्म पर होनेवाले आघातोंके विषयमें अद्यतन जानकारी सब तक तुरंत पहुंचाना अत्यावश्यक हो गया है । इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है वेबसाईट !

२ अ १. समितिके हिंदूजागृतिजालस्थलकी लोकप्रियता !

समितिके जालस्थलपर रखे धर्मरक्षा तथा धर्मशिक्षा के लेखनको हिंदुओंद्वारा अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है । समितिके जालस्थलकी प्रमुख विशेषता यह कि पूरे विश्‍वके किसी भी कोनेमें रहनेवाले हिंदू धर्माभिमानी समितिके जालस्थलके ऑनलाईन निषेध अभियान अथवा स्वाक्षरी अभियानके माध्यमसे राष्ट्ररक्षा तथा धर्मजागृति एवं धर्महानि रोकनेके कार्यमें सहभागी होते हैं । इन ऑनलाईन अभियानोंके माध्यमसे २१० से भी अधिक घटनाओंमें देवताओंकी विडंबना रोकनेके लिए समितिको यश प्राप्त हुआ है । यह जालस्थल नियमितरूपसे पढनेवाले ३ सहस्र ९०० से भी अधिक लोगोंने कार्यमें सहभागी होनेकी इच्छा प्रदर्शित की है । ऐसे लोगोंको धर्मसेवा उपलब्ध करा देनेका प्रयत्न समिति कर रही है ।

२ अ २. अलेक्सा क्रमांक (अलेक्सा नंबर)

किसी भी वेबसाईटकी दृष्टिसे अलेक्सा मानांकन १ लाखसे भी अल्प होना, यह वह वेबसाईट अधिक प्रमाणमें लोकप्रिय होनेका दर्शक होता है । www.hindujagruti.org का मानांकन ८०,९२९ अर्थात १ लाखसे अल्प है । इसके विपरीत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघकी अधिकृत वेबसाईटका मानांकन २७,३९,८८५ और विश्‍व हिंदु परिषदकी अधिकृत वेबसाईटका मानांकन ७,५९,४७७ अर्थात १ लाखसे भी अधिक है ।(मई/जून के आंकडे लेना) इससे ध्यानमें आता है कि जालस्थलका प्रभावी प्रसार करनेपर जालस्थल लोकप्रिय होते हैं तथा धर्मरक्षाका कार्य भी करते हैं ।

२ आ. जागो लघुसंदेश

धर्मजागृतिका और एक प्रभावी माध्यम है भ्रमणभाष ! आज प्रत्येकके हाथमें भ्रमणभाष होता है । इसका उपयोग राष्ट्र एवं धर्म हेतु हमने किया, तो बहुत कुछ साध्य हो सकता है । ऐसा प्रयत्न हिंदू जनजागृति समितिने २०१० से आरंभ किया है । किसी भी मेसेजिंग कंपनीका व्ययी आधार न लेते हुए कार्यकर्ताओंकी शृंखलाद्वारा तथा इंटरनेटकी विनामूल्य मेसेजिंग सुविधाओंका लाभ लेते हुए समिति प्रतिदिन लगभग ३ लाखसे भी अधिक हिंदुओंतक समाज, राष्ट्र तथा धर्म पर होनेवाले आघात लघुसंदेशोंके माध्यमसे पहुंचा रही है । जिन्हें एस्एम्एस्में रूचि है, वे स्वयं ही उनके संपर्कमें आनेवाले कइयोंको वह संदेश भेजते हैं ।

२ आ १. एस्एम्एस् भेजनेके लिए ऐसी यंत्रणा बनाएं !

जागो एस्एम्एस् भेजनेके लिए एक यंत्रणा बनानी पडेगी । उस दिनकी ताजा घटनाओंपर एक लघुसंदेश सिद्ध कर, उसे संगठनकी रचनाके अनुसार प्रत्येक जनपदके प्रमुखके पास भेज सकते हैं । तदनंतर अनुक्रमसे तालुका, विभाग तथा कार्यकर्ताओंके गुटतक यह शृंखला चला सकते हैं । मात्र २५-३० रुपयोंके एस्एम्एस् रिचार्ज कूपनका लाभ लेकर एक माहभर १००-५०० लोगोंको लघुसंदेश भेज सकते हैं । समिति ऐसे एस्एम्एस् प्रतिदिन भेजती है । ये एस्एम्एस् प्राप्त करनेके लिए अपने नाम स्वागतकक्षपर दें ! समितिद्वारा प्राप्त एस्एम्एस् आपके संपर्कके लोगोंको आप भेज सकते हैं ।

२ आ २. लघुसंदेशोंके लिए संपर्क क्रमांक कैसे प्राप्त करें ?

परिजन, सगेसंबंधी, मित्र, व्यवसायके निमित्तसे परिचित हुए हिंदू इन सभीके संपर्कोंका लघुसंदेशके लिए उपयोग कर सकते हैं ।

२ आ ३. जागो अभियानके लाभ एवं फलनिष्पत्ति

अ. एस्एम्एस् यंत्रणा भविष्यकालीन हिंदुओंकी संपर्कयंत्रणाका आरंभ बन सकती है ।

आ. लव जिहाद, धर्म-परिवर्तन जैसे समितिद्वारा पुरस्कृत ग्रंथोंका अधिकाधिक वितरण करनेके लिए भी इस अभियानका लाभ हुआ ।

इ. पुणेमें एक अचानक तय हुए कार्यक्रमका प्रसार जागो संदेशद्वारा करनेपर इस अभियानके लिए भारी मात्रामें उपस्थिति प्राप्त हुई ।

ई. कश्मीरके हिंदू युवकोंको जागो लघुसंदेशोंका अत्यंत आधार लगता है और वे इन लघुसंदेशोंको अन्यत्र भी भेजते हैं ।

उ. अंदमानके श्री. गुप्ताजीने उनके संपर्कके २५ से भी अधिक हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंको जागो लघुसंदेश भेजनेकी व्यवस्था करना मान्य किया है ।

ऊ. मुंबईके हिंदुत्वनिष्ठ निर्मल मूलचंदानी १० सिमकार्डके माध्यमसे ३५० लोगोंको जागो लघुसंदेश भेजते हैं और ये ३५० जन आगे अनेक लोगोंको लघुसंदेश भेजते हैं । देशभरके ३ लाख लोगोंतक लघुसंदेश भेजनेकी यंत्रणा उन्होंने निर्माण की है ।

ए. जागो लघुसंदेशके माध्यमसे प्राप्त संपर्कोंके कारण समितिका कार्य शीघ्र ही हिमाचल प्रदेशमें आरंभ होनेवाला है । संक्षेपमें, लघुसंदेशोंका नियमित वाचन करनेवाला एक प्रकारसे हिंदू संगठनोंका एक सदस्य बन जाता है । उनमें संगठनके प्रति विश्‍वास निर्माण होता है । इसका परिणाम उस क्षेत्रमें होनेवाले हिंदुत्वसे संबंधित अभियान अथवा कार्यक्रमोंकी फलश्रुतिसे दिखाई देता है ।

 

३. हिंदुओंकी अपनी अधिकृत दूरचित्रवाहिनी (चैनल) होना अत्यावश्यक !

स्वा. सावरकर इत्यादि प्रभावी वक्ताओंके लिखित भाषण पढनेकी अपेक्षा उनके स्वर-मुद्रित भाषण सुनना अधिक प्रभावकारी होता है । इसका कारण यह है कि हम पढते समय तेजतत्त्वसे संबंधित नेत्रोंका उपयोग करते हैं और सुनते समय आकाशतत्त्वसे संबंधित कानोंका प्रयोग करते हैं । दूरचित्रवाहिनीपर देखना और सुनना साथ-साथ होनेसे यह माध्यम सर्वाधिक प्रभावी है । अतः, हिंदुओंके लिए अपना अधिकृत दूरचित्रवाहिनी (चैनल) आरंभ करना अत्यावश्यक हो गया है । हिंदुत्ववादी संगठनोंको अपना अधिकृत दूरचित्रवाहिनी आरंभ करनेके लिए प्रयत्न करने चाहिए ।