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Shantividhi (Hindi Article)
वृद्धावस्थामें इंद्रियां अकार्यक्षम होने लगती हैं, उदा. कम सुनाई देना, कम दिखाई देना, विविध रोग निर्माण होना इत्यादि । देवताओंकी कृपासे इन व्याधियोंका परिहार हो एवं शेष आयु सुखपूर्वक बीते, इस हेतु शास्त्रके अनुसार ५० वर्षसे १०० वर्षकी आयुतक प्रत्येक ५ वर्षोपरांत शांतिविधि करनी चाहिए ।
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`वर्ष श्राद्ध करनेसे उस विशिष्ट लिंगदेहको गति प्राप्त होनेमें सहायता मिलनेसे उसका प्रत्यक्ष व्यष्टिस्तरका ऋण लौटानेमें सहायता होती है । यह हिंदू धर्म द्वारा व्यक्तिगतस्तरपर प्रदत्त, ऋणमोचनकी एक उपासना ही है, तो पितृपक्षकें निमित्तसे पितरोंका ऋण समष्टिस्तरपर लौटानेका, श्राद्ध यह एक समष्टि उपासना ही है ।
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Nariyal phodkar udghatan kyon kiya jata hai? (Hindi Article)
किसी भी समारोह अथवा कार्यको पूर्ण करनेके लिए देवताके आशीर्वाद आवश्यक हैं । शास्त्रीय पद्धति अनुसार उद्घाटन करनेसे दैविक तरंगोंका कार्यस्थलपर आगमन सुरक्षाकवचकी निर्मितिमें सहायक होता है ।
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Puja mein upyukta vividha ghatakon ka mahatva (Hindi Article)
देवतापूजनमें पूजासामग्री होना आवश्यक ही है । यह घटक ईश्वरीय कृपा प्राप्त होनेमें महत्त्वपूर्ण कडी है । प्रत्येक घटकका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व समझ लेनेसे, इन घटकोंके प्रति मनमें भाव निर्माण होता है ।
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Pujaki purvatayari (Hindi Article)
पूजाके माध्यमसे निर्मित चैतन्यको ग्रहण करनेकी क्षमता पूजकमें निर्माण हो, इस हेतु हिंदू धर्ममें सगुणसे निर्गुणकी ओर ले जानेवाली देवतापूजनकी पूर्वतैयारी जैसी कृतियां बताई गई हैं ।
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Pitrupaksha mein Dattatray devata ka naamjap kyon karte hai? (Hindi Article)
श्राद्ध जैसी विधियोंमें दत्तात्रेय देवताका विशेष महत्त्व है । दत्तात्रेयकी शक्ति व उनका चैतन्य विधिके स्थलपर प्रक्षेपित होता है, साधकोंको शक्ति व चैतन्यका लाभ मिलता है और उनका अनिष्ट शक्तिसे संरक्षण होता है ।
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मृत व्यक्तिके मुखसे दूषित तरंगें निकलती हैं, जिनके कारण अनिष्ट शक्तियां मृतदेहकी ओर आकर्षित होती हैं और उसे अपने वशमें कर लेती हैं । मृत व्यक्तिके मुखमें गंगाजल डालकर तुलसीदल रखनेसे उनकी ओर आकर्षित सात्त्विक तरंगें दूषित तरंगोंको नष्ट करती हैं ।
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जिस तिथिपर हमारा जन्म होता है, उस तिथिके स्पंदन हमारे स्पंदनोंसे सर्वाधिक मेल खाते हैं । इसलिए उस तिथिपर परिजनों एवं हितचिंतकोंद्वारा हमें दी गई शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद सर्वाधिक फलित होते हैं ।
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Devatapujan (Hindi Article)
जैसे हम घर आए अतिथिका स्वागत आदरपूर्वक करते हैं, उसी प्रकार भगवानका करें । देवताका आवाहन करना, उन्हें बैठनेके लिए आसन देना, उन्हें पैर धोनेके लिए जल देना, इस प्रकार क्रमानुसार सोलह उपचारोंके माध्यमसे विधिवत भावपूर्ण धर्माचरण धर्मशास्त्रमें सिखाया गया है ।
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Devalay mein darshan ki yogya paddhati (Hindi Article)
`देवालय' अर्थात् जहां भगवानका साक्षात् वास है । दर्शनार्थी देवालयमें इस श्रद्धासे जाते हैं कि, वहां उनकी प्रार्थना भगवानके चरणोंमें अर्पित होती है और उन्हें मन:शांति अनुभव होती है ।
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Devataki purna golakar arati hi kyon utari jati hai? (Hindi Article)
`पंचारतीके समय आरतीकी थालीको पूर्ण गोलाकार घुमाएं । इससे ज्योतिसे प्रक्षेपित सात्त्विक तरंगें गोलाकार पद्धतिसे गतिमान होती हैं । आरती गानेवाले जीवके चारों ओर इन तरंगोंका कवच निर्माण होता है ।
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