इतिहास

भारत के दक्षिण-पूर्व किनारे का महत्त्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र – रामेश्वरम् !

रामेश्वरम्, यह हिन्दुओंकी पवित्र चारधाम यात्रा में से दक्षिणधाम है। हिन्दुओंकी जीवनयात्रा की पूर्णता बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी तथा रामेश्वरम् इन चार धामोंकी यात्रा के पश्चात ही होती है। रामेश्वरम्, यह तीर्थक्षेत्र भारतवर्ष के १२ प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर भव्य है। इस के विस्तार एवं भव्यता के संदर्भ में तुलना करनेवाला अन्य कोई भी मंदिर भारत में नहीं है। Read more »

भक्तिमती शबरीमैया

रत्नगर्भा वसुुंधराका एक अंश इस देवभूमि भारतके, गर्भसे न जाने कितने अनमोल रत्नोंका उदय हुआ है । जीवनके प्रत्येक क्षेत्रमें उनके नाम और कार्यके बलपर युगो-युगोंसे इस भूमिकी पवित्रता अक्षुण्ण रही है । ऐसा ही एक भक्तिरत्न है, ‘शबरी’, जिसकी जीवनचर्या आज भी हमें हिन्दू धर्मकी महानताका, श्रीगुरुके चैतन्यमय वचनपर दृढ श्रद्धाका तथा भगवद्भक्तिका पाठ पढाती है । Read more »

धनुषकोडी – एक ध्वस्त और उपेक्षित तीर्थस्थल !

धनुषकोडी, भारतके दक्षिण-पूर्वी शेष अग्रभागपर स्थित हिन्दुआेंका यह एक पवित्र तीर्थस्थल है ! यह स्थान पवित्र रामसेतुका उगमस्थान है । ५० वर्षोंसे हिन्दुआेंके इस पवित्र तीर्थस्थलकी अवस्था एक ध्वस्त नगरकी भान्ति हुई है । २२ दिसम्बर १९६४ मेें इस नगरको एक चक्रवातने ध्वस्त किया । तदुपरान्त शासनद्वारा इस नगरको ‘भूतोंका नगर’ घोषित कर उसकी अवमानना की गई । Read more »

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