रात्रि नींद के पूर्व करने योग्य मंत्र पाठ, प्रार्थना एवं नामजप

        वर्तमान काल में, मनुष्य सोने से पूर्व अनेक कार्य करता है । यदि उन कार्यों के बीच भगवन का स्मरण भी हो, तब निद्रा में सामना होने वाले अनेक बाधाओं पर विजय प्राप्त हो सकता है । इस लेख के द्वारा, हम समझेंगे तथा अपने जीवनशैली में उपयोग करने का प्रयत्न कर सकते हैं।

१. रात्रिसूक्त

        ‘सौरसूक्त’ समान ‘रात्रिसूक्त’ भी है । निद्रा को ‘निद्रादेवी’ संबोधित किया गया है । देवी के अनेक रूपों में से निद्रा को भी उनका एक स्वरूप बताया है । बिछौने पर लेटे-लेटे रात्रिसूक्त दो-तीन बार बोलें । जिन्हें वेदोक्त रात्रिसूक्त आता है, वे उसका पाठ करें ।

२. नींद के पूर्व बोलने योग्य श्लोक / मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
– श्रीदुर्गासप्तशती, अध्याय ५, श्लोक १६

        अर्थ : जो देवी प्रत्येक प्राणिमात्र में निद्रा के रूप में विद्यमान हैं, उन्हें त्रिवार नमस्कार है । यह श्लोक बोलते रहें । इससे शनैः-शनैः विचारचक्र रुक जाते हैं और लय लग जाती है तथा दस-पंद्रह मिनटों में निद्राधीन हो जाते हैं ।

आ. दुःस्वप्न न आएं, इसलिए निम्नलिखित मंत्र बोलें

रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम् ।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति ।।

अर्थ : सोते समय मनुष्यद्वारा श्रीराम, स्कंद अर्थात कार्तिकेय, हनुमान, गरुड एवं भीम का स्मरण करने पर उसके दुःस्वप्नों का नाश होता है ।

        सोने से पूर्व मनःपूर्वक प्रार्थना करें, ‘हे ईश्वर, दान यही दीजिए, आपका विस्मरण कभी न हो ।’

३. निद्रा देवी अथवा उपास्यदेवता से प्रार्थना करें ।

१. ‘दिन भर में स्वयं से हुए शुभ-अशुभ एवं पुण्य-पापात्मक कर्म तथा ज्ञात अथवा अज्ञानवश हुए सभी कर्म परमेश्वर को अर्पित करें । दिन भर में स्वयं से हुए अपराधों के लिए भगवान से क्षमा मांगें ।’

२. अपने उपास्यदेवता से इस प्रकार प्रार्थना करें, ‘निद्रा में भी अंतर्मन में नामजप होता रहे, शांत निद्रा लगने दीजिए ।’

अ. प्रार्थना कर सोने के संदर्भ में हुई अनुभूतियां

निद्रादेवी से प्रार्थना करने पर तुरंत निद्रा आना

‘२५.८.२००६ को रात्रि में मुझे निद्रा नहीं आ रही थी । इसलिए मैंने निद्रादेवी से प्रार्थना की, ‘हे निद्रादेवी, मुझे नींद आ जाए एवं रात्रि में मुझे किसी भी अनिष्ट शक्ति का कष्ट न हो ।’ तदुपरांत मुझे तुरंत निद्रा आ गई ।’ – कु. कौशल नितीन कोठावळे, मीरज, महाराष्ट्र. (आयु १० वर्ष)

आ. उपास्यदेवता का नामजप करते-करते सो जाना चाहिए ।

संदर्भ ग्रंथ : सनातन का ग्रंथ, ‘शांत निद्रा के लिए क्या करें ?

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