दाहिने हाथसे भोजन क्यों करना चाहिए ?

१. दाहिने हाथ से भोजन करने से शरीर की सूर्यनाडी कार्यरत होती है । इससे ब्रह्मांडस्थित उच्च देवताओं की क्रियाशक्ति की तरंगें जीव की ओर आकर्षित होती हैं । इन तरंगों के कारण जीव की नाभि के सर्व ओर विद्यमान पंचप्राण कार्यरत होते हैं । इन पंचप्राणों के कार्यरत होने से प्राणशक्ति बढने में सहायता मिलती है, जिससे सूक्ष्मस्तर पर अन्न का पाचन भली-भांति होकर जीव की कार्यक्षमता बढती है; इसलिए बाएं हाथ की अपेक्षा दाहिने हाथ से भोजन करना अधिक फलदायी है ।

२. दाहिने हाथ से भोजन करते समय जीव को दाहिने, अर्थात सूर्यनाडी से कार्यरत तेजतत्त्वरूपी स्पंदनों का लाभ प्राप्त होता है । उंगलियों से प्रक्षेपित तेज के स्पर्श से अन्न के ग्रास में विद्यमान रज-तमयुक्त स्पंदनों को नष्ट किया जाता है । इस प्रकार ग्रास उदर में जाने से पूर्व आध्यात्मिक दृष्टि से शुद्ध होने में सहायता मिलती है । इसलिए दाहिने हाथ से भोजन करने के लिए कहा जाता है । यह उचित आचार है ।

बाएं हाथ से भोजन क्यों नहीं करना चाहिए ?

१. बाएं हाथ से भोजन करने से इस हाथ से प्रक्षेपित तरंगों के कारण ब्रह्मांडस्थित उच्च देवताओं की इच्छाशक्ति से संबंधित तरंगें जीव की ओर आकर्षित होती हैं । इन तरंगों के कारण जीव के शरीर में इच्छाशक्ति कार्यरत होती है ।

२. बाएं हाथ से भोजन करने से जीव के शरीर की चंद्रनाडी कार्यरत होती है । इस नाडी की कार्यशक्ति के कारण शरीर के उपप्राणों का कार्य बढता है । उपप्राणों का कार्य बढने से शरीर में अन्न का पाचन भली-भांति नहीं हो पाता । बाएं हाथ से भोजन करने के कारण उपप्राण कार्यरत होते हैं एवं इससे अन्न से प्रक्षेपित सात्त्विक तरंगों का लाभ अल्प मात्रा में मिलता है ।

३. दार्इं नाडी, क्रियाशील एवं मारक तत्त्वका प्रतिनिधित्व करनेवाली मानी जाती है । इसे शुभकर्म करने में अग्रस्थान दिया गया है । दाहिनी नाडी क्रियात्मकता में शिवस्वरूप है । बायां हाथ अशुभ कर्म करने का प्रतीक माना गया है; क्योंकि बाएं हाथ से की हुई क्रिया के फलस्वरूप देह के उपप्राण जागृत होकर उनके वेगवान उत्थापन से शरीर की अन्य त्याज्य वायु भी जागृत होती है । इससे देह रज-तमात्मक स्पंदनों से दूषित होती है; इसलिए बाएं हाथ से भोजन करना निषिद्ध माना गया है ।

४. बाएं हाथ से किए गए कृत्य अशुभता का प्रतीक माने जाते हैं; क्योंकि बाएं हाथ से किए गए कृत्य में तेजतत्त्व का आधार दाहिने हाथ की तुलना में अल्प होता है । इसलिए इन कृत्यों में अनिष्ट शक्तियों का हस्तक्षेप अधिक होता है ।

संदर्भ : सनातन का ग्रंथ, ‘भोजनके समय एवं उसके उपरांतके आचार

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