गुरुपूर्णिमा निमित्त परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश

आपातकाल में जीवित रहने के लिए साधना करें !

परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

‘गुरुपूर्णिमा सनातन संस्कृति को प्राप्त गौरवशाली गुरुपरंपरा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करने का दिन है । जिस प्रकार गुरु का कार्य समाज को आध्यात्मिक उन्नति के लिए मार्गदर्शन करना है, उसी प्रकार समाज को कालानुसार मार्गदर्शन करना भी गुरुपरंपरा का कार्य है ।

वर्तमान में भारत सहित संपूर्ण पृथ्वी संकटकाल से गुजर रही है । इस पूरे वर्ष में बाढ स्थिति, दंगे, महामारी, आर्थिक मंदी आदि संकटों का परिणाम देश को भुगतना पडा है । वर्ष २०२० से २०२३ तक की अवधि भारत ही नहीं, अपितु संपूर्ण संसार के लिए आपदाओं का काल रहनेवाला है । इस अवधि में सामान्य जनता को आर्थिक मंदी, गृहयुद्ध, सीमापार युद्ध, पृथ्वी पर युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पडेगा । ऐसे आपातकाल में जीवित रहना और सुसह्य जीवन जीना एक चुनौती सिद्ध होनेवाली है ।

श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है कि ‘न मे भक्तः प्रणश्यति ।’, अर्थात ‘मेरे भक्त का नाश नहीं होता ।’ साधारणतः सामान्य लोग साधना नहीं करते । अतः आपातकाल में बडी मात्रा में जीवहानि होती है । आपातकाल में स्वयं भगवान साधना करनेवाले भक्त की रक्षा करते हैं । वर्तमान में चल रहे आपातकाल से पार होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए साधना आवश्यक है ।

गुरु केवल देहधारी रूप में ही नहीं, अपितु तत्त्व रूप में भी कार्यरत रहते हैं । साधना करनेवाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रूप से देहधारी गुरु अथवा अप्रत्यक्ष रूप से गुरुतत्त्व की कृपा होती रहती है । साधना आरंभ करने पर प्रत्येक व्यक्ति गुरुतत्त्व की कृपा का अनुभव कर पाएगा । केवल आपातकाल से पार होने के लिए नहीं, अपितु अनेक जन्मों की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को साधना करनी चाहिए ।

‘गुरुपूर्णिमा से आप सभी को साधना करने की बुद्धि हो’, इसलिए मैं मेरे गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी के चरणों में प्रार्थना करता हूं ।’

– (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था.

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं
श्रीचितशक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी का गुरुपूर्णिमा निमित्त संदेश

आपातकाल साधना हेतु इष्टकाल होने के कारण साधना प्रारंभ करें !

‘वर्तमान आपदाओं का काल यद्यपि कठिन है, तथापि यह साधना के लिए इष्टकाल है । जिस प्रकार सूर्योदय, सूर्यास्त, ग्रहण इत्यादि संधिकाल में साधना करने से लाभ होता है, वैसा ही लाभ वर्तमान आपातकाल में साधना करने से होता है । विज्ञान के कारण अहंकार बढा हुआ समाज अपना मनोधैर्य बढाने के लिए धार्मिक कार्यक्रम देखना, ईश्‍वर को प्रार्थना करना, योगसाधना आदि कर ईश्‍वरनिष्ठ बनने लगा है, यह इस आपातकाल का सुपरिणाम ही कहना पडेगा; इसलिए इस गुरुपूर्णिमा से गुरुतत्त्व अथवा गुरुरूपी संतों की शरण में जाकर उचित साधना प्रारंभ करें । सर्वशक्तिमान ईश्‍वर या ईश्‍वर के सगुणरूप गुरु की शरण में पहुंचे बिना आत्मशांति अथवा मोक्ष नहीं मिलता, यह समझ लेें ।’

– (श्रीसत्शक्ति) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ

साधना कर मनुष्यजन्म का कल्याण करें !

‘आजकल भोगवाद बढ गया है । इसलिए लोग ईश्‍वर की भक्ति अथवा साधना करना नहीं चाहते । प्रत्यक्ष में संकटकाल आने पर यही लोग प्रश्‍न करते हैं कि ‘ईश्‍वर हमारे लिए क्या करते हैं?’ यदि ऐसा लगता है कि ‘ईश्‍वर को हमारे लिए कुछ करना चाहिए’, तो प्रथम साधना आरंभ करें । ईश्‍वर की भक्ति अथवा साधना करने से ईश्‍वर की कृपा तो होती ही है; और मनुष्यजन्म का भी कल्याण ही होता है । इसलिए इस गुरुपूर्णिमा से प्रतिदिन साधना करने का निश्‍चय करें ।’

– (श्रीचित्शक्ति) श्रीमती अंजली गाडगीळ