जागरूक अधिवक्ता उत्तम न्यायव्यवस्था की शक्ति – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित अधिवक्ता अधिवेशन !

दीपप्रज्वलन करते हुए श्री. रणजित सावरकर, अधिवक्ता वीणा थडानी, सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे

खारघर (नई मुंबई) – हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि लोकतंत्र की शक्ति जागरूक नागरिक हैं, जबकि उत्तम न्यायपालिका की शक्ति जागरूक अधिवक्ता हैं । १८ फरवरी को समिति की ओर से खारघर में आयोजित अधिवक्ता अधिवेशन में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करते समय वे ऐसा बोल रहे थे । इस समय व्यासपीठ पर सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष झा, सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता वीणा थडानी, स्वतंत्रतावीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री. रणजित सावरकर उपस्थित थे ।

अधिवेशन का आरंभ शंखनाद से किया गया । तत्पश्चात मान्यवरों के करकमलों से दीपप्रज्वलन किया गया । इस समय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के संदेश का वाचन किया गया । अधिवेशन का परिचय समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्यों के संयोजक श्री. सुनील घनवट ने दिया । इस अधिवेशन में जिला, उच्च तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुंबई, ठाणे, रायगढ, पालघर, पुणे, सोलापुर, सातारा, कोल्हापुर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग जिलों के अनेक अधिवक्ता उपस्थित थे । ‌इस अवसर पर सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी ने ‘साधना के रूप में राष्ट्र-धर्मकार्य कैसे करें ?’, इस संदर्भ में मार्गदर्शन किया ।

अधिवेशन में उपस्थित अधिवक्ता

सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी का हिन्दू राष्ट्र स्थापना के संदर्भ में मार्गदर्शन !

१. हम जो हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करते हैं, उसका केंद्रबिंदू ‘न्याय’ है । इसलिए उसमें समाज के सभी घटकों को न्याय मिलने की दृष्टि से न्यायव्यवस्था होगी । धर्मतेज सम्पन्न अधिवक्ता ही न्याय कर सकेंगे ।

२. अव्यवस्था को सुव्यवस्था में परिवर्तित करना ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना है ।

हिन्दुओं को धर्मशिक्षा की आवश्यकता ! – अधिवक्ता वीणा थडानी, सर्वोच्च न्यायालय

हम अपने बच्चों को ‘कान्वेंट’ विद्यालयों में पढाते हैं । ऐसे विद्यालयों में बच्चों को ईसाई धर्म की शिक्षा दी जाती है । परंतु हिन्दू विद्यालयों में हिन्दू धर्म की शिक्षा नहीं दी जाती । आज हिन्दुओं को धर्मशिक्षा देने की आवश्यकता है ।

‘भारत का पुनः विभाजन नहीं होगा’, इस भ्रम में न रहें ! – अधिवक्ता सुभाष झा, सर्वोच्च न्यायालय

वक्फ बोर्ड के माध्यम से भूमि जिहाद चालू है । यह एक गंभीर समस्या निर्माण हुई है । कोई इस भ्रम में न रहे कि ऐसी स्थिति में भारत का पुनः विभाजन नहीं हो सकता । ऐसा न हो, इसलिए हमें समय रहते ही जागरूक एवं संगठित होकर कार्य करना आवश्यक है ।

देश में मुसलमानों का तुष्टीकरण हो रहा है ! – रणजित सावरकर, कार्याध्यक्ष, स्वतंत्रतावीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक

देश में हिन्दू विरोधी वातावरण का निर्माण किया जा रहा है । मुस्लिमों का तुष्टीकरण किया जा रहा है । गांधी की हत्या के ७५ वर्षों के उपरांत भी हिन्दू विरोध के लिए इस विषय का प्रयोग किया जाता है । यदि गांधी हत्या न हुई होती, तो सरदार वल्लभभाई पटेल प्रधानमंत्री बने होते । गांधी हत्या का लाभ जवाहरलाल नेहरू एवं ब्रिटेन के माऊंटबेटेन ने लिया ।

हिन्दुओं, हलाल प्रमाणित उत्पाद क्रय न करने का निश्चय करें ! – अधिवक्ता सिद्ध विद्या, उच्च न्यायालय

हलाल प्रमाणपत्र लेने के लिए व्यापारी वर्ग को ५० सहस्र रुपए देने पडते हैं । यह प्रमाणपत्र गैरकानूनी पद्धति से दिया जाता है । यह आर्थिक जिहाद है एवं उसके द्वारा पूरे विश्व का इस्लामीकरण करने का षड्‌यंत्र रचा जा रहा है । इसे रोकने के लिए हिन्दुओं को निश्चय करना होगा कि हलाल प्रमाणित उत्पाद क्रय नहीं करेंगे ।

साम्यवादी विचारधारा विषैली ! – डॉ. अमित थडानी, लेखक

‘अर्बन (शहरी) नक्सलवादी’ साम्यवादी विचारधारा संजोते हैं । यह विचारधारा लोकतंत्र में कुछ काम की नहीं है । वह लोकतंत्र को नष्ट करनेवाली है । देश स्वतंत्र हुआ, तब से साम्यवादियों ने अब तक १४ सहस्र लोगों की हत्या की है । इस कारण यह विचारधारा विषैली है ।

धर्म की रक्षा करनेवालों की ठगी टालने के लिए संगठित होकर कार्य करना आवश्यक ! – सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति

सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मंदिर मुक्ति संघर्ष द्वारा हमने देखा है कि ईश्वरीय अधिष्ठान रखकर कार्य करने से सफलता मिलती है । धर्म की रक्षा एवं कार्य करनेवालों को झूठे परिवादों में न फंसाया जाए, इसलिए संगठित होकर कार्य करना आवश्यक है ।

अन्य विशेष

महाराष्ट्र का प्रस्तावित लव जिहाद विरोधी कानून में क्या होना चाहिए ? साथ ही अवैध घुसपैठिए एवं उनसे प्राप्त भारतीय पहचानपत्र रोकने के लिए क्या प्रयास करें ? इस विषय में चर्चासत्र आयोजित किया गया था । इसमें अनेक अधिवक्ताओं ने मौलिक सूचना दी । इस समय अधिवक्ता प्रशांत बिचुकले ने हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ताओं का संगठन करते समय आए अपने अनुभव साझा किए ।

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