
आज के डिजिटल युग में मनोरंजन के अनेक साधन उपलब्ध हैं। सोशल मीडिया, ओटीटी मंच, यूट्यूब और लाइव शो के माध्यम से हास्य कलाकारों को लाखों लोगों तक पहुंचने का अवसर मिला है। हास्य मानव जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। यह तनाव दूर करता है, मन को प्रसन्न करता है और समाज को स्वस्थ दृष्टिकोण प्रदान करता है। किंतु दुर्भाग्यवश वर्तमान समय में हास्य का स्तर तेजी से गिरता दिखाई दे रहा है। अनेक तथाकथित कॉमेडियन अश्लीलता, अभद्र भाषा, धार्मिक उपहास, व्यक्तिगत अपमान और सामाजिक मूल्यों की अवहेलना को ही हास्य का पर्याय बना रहे हैं।
हास्य का वास्तविक उद्देश्य क्या है ?
हास्य का उद्देश्य समाज को आनंद देना, जीवन की विसंगतियों पर संवेदनशील दृष्टि डालना और सकारात्मक विचारों को प्रेरित करना है। भारतीय साहित्य और रंगमंच की समृद्ध परंपरा में हास्य का उपयोग समाज-सुधार के लिए किया जाता था। विनोद का अर्थ किसी व्यक्ति, धर्म, संस्कृति अथवा सामाजिक मूल्यों का अपमान करना नहीं है।
आज स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। सरल और शालीन हास्य की अपेक्षा अश्लील टिप्पणियां, दोहरे अर्थ वाले संवाद, शिवीगालियां तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कथन अधिक लोकप्रिय बनाए जा रहे हैं। इससे समाज में हास्य की समझ विकृत होती जा रही है।
युवा पीढी पर दुष्प्रभाव
सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे कार्यक्रमों का सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ता है। जब लोकप्रियता प्राप्त करने वाले कलाकार अश्लील भाषा का प्रयोग करते हैं, तब अनेक युवा उसे आधुनिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक मानने लगते हैं।
इसके परिणामस्वरूप :
- शालीन संवाद की संस्कृति कमजोर होती है।
- महिलाओं के प्रति सम्मान में कमी आती है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का उपहास सामान्य प्रतीत होने लगता है।
- सामाजिक संवेदनशीलता घटती है।
- मनोरंजन के नाम पर विकृत मानसिकता को प्रोत्साहन मिलता है।
कुछ चर्चित विवाद
हाल के वर्षों में कुछ स्टैंडअप कॉमेडी कार्यक्रमों में ऐसे विषयों पर हास्य प्रस्तुत किया जा रहा है, जो सामाजिक संवेदनशीलता, नैतिक मर्यादाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े हैं। मनोरंजन के नाम पर कई बार ऐसे कथनों और प्रसंगों का उपयोग किया जाता है, जिन पर समाज के विभिन्न वर्गों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
प्रणित मोरे प्रकरण
१. कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दर्शकों के साथ बातचीत (क्राउड वर्क) के दौरान गुरुग्राम के एक युवक ने अपने डेटिंग अनुभव का वर्णन करते हुए कहा कि उसने एक युवती पर ₹370 की बिरयानी खर्च की थी। इसके बाद उसने यह संकेत दिया कि भोजन पर खर्च किए गए पैसे के बदले उसे युवती से शारीरिक संबंध या यौन अनुग्रह की अपेक्षा थी। इस कथन पर मंच पर हंसी-मजाक हुआ और वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
Stand-up comedian Pranit More mocked on girls when a person told that he served a girl biryani of ₹370.
₹370 Ka Biryani Khila Di Toh Vasool karne Ka Haq Mil Gya.
Yahi Soch Problem Hai… pic.twitter.com/YBN3PrYGfV
— Shailesh UP60 (@Shailes34135660) June 7, 2026
विवाद का मूल कारण केवल ₹370 की बिरयानी नहीं था, बल्कि वह मानसिकता थी जो यह संकेत देती है कि किसी महिला पर कुछ पैसे खर्च करने से उसके शरीर या उसकी इच्छा पर अधिकार मिल जाता है। प्रणित मोरे ने भी आपत्तिजनक टिप्पणी को रोकने या उसका प्रतिवाद करने के बजाय उस पर हंसकर प्रतिक्रिया दी। अनेक लोगों ने इसे महिलाओं की गरिमा, सहमति (Consent) और सम्मान के विरुद्ध मानसिकता का उदाहरण बताया।
२. प्रणित मोरे ही शो में मुंबई के केईएम अस्पताल से संबंधित डॉ. सेजल पवार द्वारा देहदान से प्राप्त शवों के निजी अंगों को लेकर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। कार्यक्रम के दौरान इस टिप्पणी पर हंसी-मजाक किया गया। जब इसका वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ, तब समाज के विभिन्न वर्गों ने इसकी तीव्र आलोचना की। अनेक लोगों ने इसे चिकित्सा क्षेत्र और देहदान जैसी पवित्र सेवा का अपमान बताया।
This is Sejal Pawar a doctor in Mumbai
– She came to Pranit More show & joked about how she and her friends check D sizes of dead bodies
– Then she joked how they cut main part of male bodies at the end.
– Degrading Human Bodies in Death
-Rs 370 Biryani Guy Himanshu Jangra was… pic.twitter.com/zZ41ghcHlJ— Rosy (@rose_k01) June 10, 2026
यह प्रकरण इस बात का उदाहरण बन गया कि जब हास्य की सीमा लांघकर स्त्री-विरोधी सोच (Misogyny) और यौन दबाव को सामान्य बनाने वाली मानसिकता को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तब उसका सामाजिक प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है।
रणवीर अलाहबादिया के कार्यक्रमों पर विवाद
कॉमेडियन समय रैना का यूट्यूब शो India’s Got Latent 2024-25 में कॉमेडियन समय रैना के कुछ कार्यक्रमों और कंटेंट को लेकर समय-समय पर यह आरोप लगाए गए हैं कि उनमें अश्लील भाषा, अभद्र टिप्पणियों और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया जाता है। फरवरी 2025 में शो के एक एपिसोड में यूट्यूबर रणवीर अलाहबादिया ने एक प्रतियोगी से माता-पिता और यौन संबंधों से जुड़ा अत्यंत आपत्तिजनक प्रश्न पूछा। इस क्लिप के वायरल होने के बाद देशभर में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। कई राज्यों में शिकायतें और एफआईआर दर्ज हुईं। महाराष्ट्र और असम सहित विभिन्न स्तरों पर जांच शुरू हुई। जिसके बाद समय रैना ने शो के सभी एपिसोड यूट्यूब से हटा दिए गए।
शो के कई एपिसोडों में यौन विषय, दोहरे अर्थ वाले संवाद, गालियां और व्यक्तिगत टिप्पणियों को हास्य का प्रमुख आधार बनाया गया था।
आलोचकों का कहना है कि, मनोरंजन के नाम पर सीमाओं का अतिक्रमण युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जा रहा है।
मुनव्वर फारूकी द्वारा हिन्दू श्रद्धास्थानों का अनादर
मुनव्वर फारूकी के कार्यक्रम भी कई बार धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के संदर्भ में विवादों में रहे हैं। विभिन्न संगठनों ने आरोप लगाया कि उनके कुछ कथनों से धार्मिक आस्थाओं का उपहास किया गया। एक शो में मुनव्वर ने माता सीता तथा प्रभु श्रीराम का उपहास उडाया था।
क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निरंकुश हो सकती है ?
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण अधिकार है; किंतु प्रत्येक अधिकार के साथ उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है। किसी की श्रद्धा, संस्कृति, नैतिकता अथवा सामाजिक संवेदनाओं को ठेस पहुंचाकर प्राप्त लोकप्रियता स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं कर सकती।
यदि फिल्मों, धारावाहिकों और अन्य दृश्य माध्यमों के लिए नियमन की व्यवस्था है, तो बड़े स्तर पर प्रसारित होने वाले सार्वजनिक कॉमेडी कार्यक्रमों के लिए भी आचार-संहिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने पर विचार होना चाहिए।
समाज को क्या करना चाहिए ?
समाज में स्वस्थ हास्य संस्कृति के विकास के लिए :
- साहित्य पठन को प्रोत्साहन दिया जाए।
- नाट्य, वक्तृत्व और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन बढ़ाया जाए।
- युवाओं में संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जाए।
- शालीन एवं विचारप्रधान हास्य कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाए।
- अश्लीलता और अपमान को मनोरंजन का मानदंड मानने की प्रवृत्ति का विरोध किया जाए।
वास्तविक हास्य वही है जो व्यक्ति को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी विवश करे। समाज को जोडने वाला विनोद ही श्रेष्ठ विनोद है; समाज को तोडने वाला नहीं।
अश्लीलता को बढ़ावा देने वाले ‘स्टैंडअप कॉमेडी’ कार्यक्रमों पर नियंत्रण होना आवश्यक – शिवसेना सदस्य डॉ. मनीषा कायंदे की मांग

इसी संदर्भ में शिवसेना की विधान परिषद सदस्य एवं मुख्य सचेतक डॉ. मनीषा कायंदे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर मांग की है कि अश्लील और अनैतिक संवादों से युक्त स्टैंडअप कॉमेडी कार्यक्रमों पर कठोर नियंत्रण लगाया जाए तथा ऐसे कार्यक्रमों को सेंसर बोर्ड की पूर्व अनुमति के अंतर्गत लाया जाए।
🚨 Demand for Action on Obscene Stand-Up Comedy Shows
Shiv Sena MLC @KayandeDr has urged the CM to make pre-censorship mandatory for stand-up comedy shows that promote obscenity.
🔹 Derogatory remarks on organ donation can harm life-saving awareness campaigns.
🔹 Vulgarity is… https://t.co/Dbb5lp3hlg pic.twitter.com/1PyQdINTPr
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 17, 2026
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि,
- प्रणित मोरे के कार्यक्रम में की गई अश्लील टिप्पणियों का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- अंगदान और देहदान जैसे सामाजिक अभियानों की छवि को इससे हानि पहुंच सकती है।
- सोशल मीडिया पर प्रसारित ऐसे कार्यक्रम समाज में अश्लीलता को बढ़ावा दे रहे हैं।
- केवल व्यक्तिगत मामलों में अपराध दर्ज करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
- भविष्य में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों के लिए नियमन और पूर्व जांच की व्यवस्था आवश्यक है।
डॉ. मनीषा कायंदे ने इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक नीति बनाने तथा संबंधित विभागों को निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रति राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री को भी भेजी है।

हास्य समाज का दर्पण है, किंतु जब वही हास्य अश्लीलता, अपमान और विकृति का माध्यम बन जाए, तब उसके परिणाम दूरगामी और गंभीर हो सकते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि मनोरंजन और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। विनोद की समृद्ध परंपरा को बचाने के लिए कलाकारों, दर्शकों और शासन—सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी। तभी स्वस्थ, संवेदनशील और संस्कारित समाज का निर्माण संभव होगा।








