कुछ दिनों पहले हुई हिंसा के बाद हिंदू संगठन आक्रामक

काठमांडू (नेपाल) – नेपाल को एक बार फिर ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसकी शुरुआत पहाड़ी क्षेत्र से हुई थी; लेकिन अब इसके स्वर भारत की सीमा से लगे मधेश और तराई क्षेत्रों में भी सुनाई दे रहे हैं। हाल ही में मधेश क्षेत्र में हुई हिंदू-मुस्लिम हिंसा के बाद यह मांग और अधिक तीव्र हो गई है। इसी माह की शुरुआत में नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग और एक हिंदू संगठन के बीच हुई मुलाकात के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। इसे देखते हुए भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
नेपाली गृहमंत्री और हिंदू संगठन की बैठक

हिंसा की घटना के बाद गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों से संवाद किया। इसी दौरान उनकी ‘हिंदू सम्राट सेना’ नामक संगठन के साथ हुई मुलाकात चर्चा में रही।
नेपाली मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, गृहमंत्री और हिंदू संगठन के बीच 13 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र बनाने के विषय पर चर्चा करने का प्रस्ताव भी शामिल था।
इस चर्चा में ‘हिंदू राष्ट्र’ के मुद्दे को शामिल किए जाने को लेकर यह प्रश्न भी उठाया गया कि क्या गृहमंत्री को ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने का अधिकार था? हालांकि, बाद में चर्चा में शामिल अधिकारियों ने किसी औपचारिक समझौते पर पहुंचने के दावे को खारिज कर दिया।
एक अधिकारी ने नेपाली समाचार माध्यम ‘कांतिपुर’ को बताया कि यह बैठक किसी समझौते के लिए नहीं थी, बल्कि संगठन को सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखने का अवसर देने के लिए आयोजित की गई थी।
गुरुंग को दिए गए ज्ञापन में ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग
इसके बाद 2 अगस्त की सुबह गृहमंत्री सुदन गुरुंग को दिए गए ज्ञापन की एक प्रति सामने आई, जिसमें हिंदू राष्ट्र की मांग पर चर्चा का स्पष्ट उल्लेख था।
यह ज्ञापन ‘संयुक्त हिंदू मोर्चा’ की ओर से दिया गया था। इसमें नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र का दर्जा देने के विषय पर चर्चा के लिए 3 महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई है। साथ ही, इस प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने की भी मांग की गई है।
नेपाल में हिंदू संगठन एकजुट
यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब नेपाल सरकार तनाव को नियंत्रित करने के लिए संबंधित समूहों के साथ संवाद कर रही है। हालांकि, सरकार के प्रयासों के बावजूद विरोध लगातार बढ़ रहा है।
संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और हिंदू युवा संघ सहित नेपाल के 15 से अधिक हिंदुत्ववादी संगठन और राजनीतिक दल एक मंच पर एकत्र हुए हैं।
ये सभी संगठन और राजनीतिक दल बैठकों तथा जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से एक साझा रणनीति बनाकर इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।
इन संगठनों का कहना है कि यह मुद्दा अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे नेपाल का विषय बन चुका है।
12 अगस्त
नेपाल में ‘हिंदू राष्ट्र’ सहित अन्य मांगों को लेकर विनय यादव का 10 दिनों से अनशन जारी

काठमांडू (नेपाल) – यहाँ के मैतीघर मंडला क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता विनय यादव पिछले 10 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि, “जब तक सरकार हमारी मांगें स्वीकार नहीं करती, तब तक अनशन वापस नहीं लिया जाएगा।”
सुनसरी के देवानगंज में मुसलमानों द्वारा कावड़ यात्रियों पर किए गए हमले के बाद हुई हिंसा में पीड़ित हिंदुओं को न्याय दिलाना तथा सरकार के साथ हुए समझौते को लागू करना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
इसके साथ ही नेपाल को पुनः ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करना, मुसलमानों के लिए आरक्षण समाप्त करना, मुस्लिम आयोग को भंग करना, घुसपैठ पर कार्रवाई करना तथा हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा के मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करना जैसी कई अन्य मांगें भी इसमें शामिल हैं।
सरकार के साथ हुए समझौते में दंगों में मारे गए 3 हिंदुओं को ‘शहीद’ का दर्जा देने, उनके परिवारों को 10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता देने, परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने, घायलों का निःशुल्क उपचार करने तथा निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया गया था।
अब यादव सवाल उठा रहे हैं कि इन आश्वासनों पर अब तक कितना अमल हुआ है?
कौन हैं विनय यादव?
विनय यादव नेपाल के राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे ‘राष्ट्रीय एकता दल’ के अध्यक्ष तथा ‘राष्ट्रीय एकता अभियान’ नामक नागरिक मंच के मुख्य संयोजक और नेता हैं।
उनका राजनीतिक एवं सामाजिक अभियान सड़कों से लेकर संसद तक विभिन्न जनमुद्दों को उठाने पर केंद्रित रहा है।
विनय यादव द्वारा किए गए आंदोलन
१. पोखरा हवाईअड्डे में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आंदोलन।
२. सांसदों को मिलने वाली संसदीय विकास निधि को रोकने की मांग को लेकर आंदोलन।
३. चीन द्वारा नेपाल की भूमि पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध आवाज उठाई। इसके लिए काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय तक प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के बाद सरकार ने जांच समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाए।
४. चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) परियोजना को नेपाल के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग को लेकर काठमांडू में बड़ा आंदोलन किया।
५. चीन से अनावश्यक हथियार खरीदने की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।
६. नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग को लेकर होने वाले नागरिक आंदोलनों में सक्रिय सहभागिता की।
७. मधेश प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए मदरसा विधेयक का भी विरोध किया।
८. एक टेलीविजन चैनल पर ईसाई मिशनरियों से संबंधित कार्यक्रम का विरोध किया।








