आतंकवादी नेटवर्क का पूरी तरह सफाया करने की भी मांग!

कोल्हापुर – जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में 31 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दो हिंदू प्रवासी श्रमिकों दीपक और भूपेंद्र की निर्मम हत्या कर दी गई। नागरिकों को उनके नाम और धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया जाना केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि भारत के संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता पर भी सीधा आघात है। कुछ महीने पहले पहलगाम में हिंदुओं की पहचान और धर्म पूछकर की गई सामूहिक हत्या की स्मृतियाँ ताजा रहते ही यह घटना हुई है।
अतः जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क का पूरी तरह सफाया कर हिंदू नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय किए जाएँ, इस मांग को लेकर हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया गया। केंद्रीय गृहमंत्री के नाम दिया गया यह ज्ञापन निवासी उपजिलाधिकारी गजानन गुरव ने स्वीकार किया।
इस अवसर पर शिवसेना के उपजिलाप्रमुख श्री किशोर घाटगे, अखिल भारत हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष श्री राजेंद्र तोरस्कर, प्रवक्ता श्री सुनील सामंत, राज्य संघटक श्री मनोहर सोरप, श्री अभिजित पाटील, महिला आघाड़ी की शीलाताई माने, ‘हिंदू जागरण’ की जिला सहसंयोजिका वैद्या अश्विनी माळकर, हिंदू एकता के शहरप्रमुख श्री गजानन तोडकर, ‘नमो नमो’ के जिलाध्यक्ष श्री विक्रम जरग, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री निरंजन शिंदे, ‘मराठा तितुका मेळवावा’ के कार्यप्रमुख श्री योगेश केरकर, ठाकरे पक्ष के उपजिलाप्रमुख श्री संभाजीराव भोकरे, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री अशोक गुरव, करवीर तालुकाप्रमुख श्री कृष्णात पोवार और श्री राजू यादव, बजरंग दल के श्री अनिल दिंडे, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री रामभाऊ मेथे, हिंदू जनजागृति समिति के श्री शिवानंद स्वामी तथा श्री आदित्य शास्त्री उपस्थित थे।
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की कुछ प्रमुख मांगें!
- इस हत्या की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) द्वारा कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध UAPA तथा अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाए।
- TRF, लश्कर-ए-तैयबा तथा उन्हें सहायता करने वाले सभी स्थानीय और विदेशी तत्वों के पूरे नेटवर्क को नष्ट किया जाए।
आतंकवादियों को आश्रय, धन, हथियार, जानकारी अथवा रसद उपलब्ध कराने वाले सभी संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर उनकी संपत्ति जब्त की जाए। - जम्मू-कश्मीर में कार्यरत सभी प्रवासी हिंदू श्रमिकों, व्यापारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए तत्काल विशेष सुरक्षा योजना लागू की जाए।
- मृतकों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए।








