‘आदतन अपराधी’ कहने पर मोहन गौड़ा का कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे को जवाब; दोषसिद्धि का प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग

बेंगलुरु, कर्नाटक – ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ के मोहन गौड़ा की गिरफ्तारी के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड पुलिस थाने को फटकार लगाई थी और गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए पुलिस थाने को ‘डार्कफील्ड’ पुलिस स्टेशन कहा था।
इस मामले में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से कर्नाटक में कार्यक्रम आयोजकों को धमकी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खड़गे ने आगे कहा कि संवाद में कुछ भ्रम हुआ है। उनके अनुसार, मोहन गौड़ा को कुनाल कामरा से संबंधित मामले के अलावा किसी अन्य कारण से हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा, “वह (मोहन गौड़ा) बार-बार अपराध करने वाला व्यक्ति है।”
Karnataka Home Minister Priyank Kharge called Hindu Rashtra Samanvay Samiti’s @Mohan_HJS a repeat offender and warned against social media threats to event organisers, clarifying that Gowda’s detention was unrelated to the Kunal Kamra controversy.
News Courtesy: @DeccanHerald https://t.co/4l5geSGvTF pic.twitter.com/K1xodkX55o
— Sanatan Prabhat (Kannada) (@Sanatan_Prabhat) September 1, 2026
खडगे ने आगे कहा,
“क्या किसी को एहसास है कि इस घटना से राज्य की छवि को कितना नुकसान पहुंचता है? क्या किसी न्यायालय ने किसी को राष्ट्रविरोधी घोषित किया है? या क्या न्यायालय ने यह फैसला दिया है कि (कुनाल कामरा के) कार्यक्रम असंवैधानिक हैं?” खड़गे ने सवाल किया।
सरकार ईमानदार और कानून का पालन करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून के विरुद्ध काम करने वालों को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
‘मुझे आदतन अपराधी कहने का प्रमाण दें या सार्वजनिक क्षमा मांगें’ – मोहन गौडा की प्रियंक खडगे को चुनौती
प्रियंक खडगे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन गौडा ने कहा:
“आदरणीय खड़गे साहब, मेरे बारे में सार्वजनिक रूप से यह कहना कि ‘वह बार-बार अपराध करने वाला व्यक्ति है’, पूरी तरह झूठा और निराधार आरोप है। क्या किसी मामले में मुझे दोषी ठहराने वाला कोई न्यायालय का फैसला है? यदि है, तो उसका विवरण सार्वजनिक करें। क्या गृह मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा न्यायालय से किसी दोषसिद्धि के बिना किसी नागरिक को ‘आदतन अपराधी’ बताना सत्ता का दुरुपयोग नहीं है? यदि आपके पास मेरे खिलाफ कोई कानूनी प्रमाण है, तो उसे न्यायालय में साबित करें। अन्यथा इन झूठे आरोपों को वापस लेते हुए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें। सत्य और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के लिए आवाज उठाने से किसी भी दबाव, धमकी या झूठे आरोप के माध्यम से नहीं रोका जा सकता।”
Strong and valid questions.
An FIR is not a conviction. A case is not proof of guilt. Courts decide guilt—not ministers.
If there is a conviction against me, publish it. Otherwise, withdraw the “repeat offender” remark and apologise.
The same standard must apply to everyone. https://t.co/3QC06ZcW24
— 🚩Mohan Gowda🇮🇳 (@Mohan_HJS) September 2, 2026
गृह मंत्री खड़गे की धमकी लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास – मोहन गौडा
श्री मोहन गौड़ा ने आगे कहा,
“जो लोग धमकी देते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कीजिए—हम आपका पूरा समर्थन करेंगे। लेकिन किसी कार्यक्रम पर आपत्ति जताना और कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को ज्ञापन देना ‘धमकी’ नहीं कहा जा सकता। ऐसा करना लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास है। आखिर कॉमेडियन कुनाल कामरा के कार्यक्रम को किसने धमकी दी? उनके खिलाफ क्या प्रमाण है? पुलिस से सार्वजनिक शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का अनुरोध करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। हमने केवल इतना ही किया और यह कोई अपराध नहीं है।
“लेकिन क्या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और आपके ही विभाग के नियमों की अवहेलना करते हुए कानून का पालन करने वाले नागरिकों को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करना संविधान का अपमान नहीं है? आप बार-बार संविधान की रक्षा करने की बात करते हैं, लेकिन स्वयं नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर कर रहे हैं।”
30 अगस्त
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के सदस्य श्री. मोहन गौडा के बंदी बनाने पर बेंगलुरु पुलिस को फटकारा
अब पुलिस पर ही पुलिस रखने का समय आ गया है ! – कर्नाटक उच्च न्यायालय

बेंगलुरु (कर्नाटक) – कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लगातार दूसरे दिन बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन की पुलिस को कडो शब्दों में फटकार लगाई । यहां कुख्यात हास्य कलाकार कुणाल कामरा का कार्यक्रम निरस्त होने को ‘हिन्दू एकता की विजय’ बतानेवाली एक फेसबुक पोस्ट ‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के सदस्य श्री. मोहन गौडा ने की थी । इस मामले में पुलिस ने मोहन गौडा के विरुद्ध केस प्रविष्ट किया था । बेंगलुरु उच्च न्यायालय में २८ अगस्त और २९ अगस्त को इस मामले की सुनवाई हुई । २९ अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा, “यह क्या चल रहा है ? आप वर्दी में हैं, इसलिए नागरिकों की स्वतंत्रता को हल्के में नहीं ले सकते । आप किसी की भी आंखों में धूल झोंक सकते हैं; परंतु जब न्यायालय का मामला आता है, तो आप बच नहीं सकते । अब पुलिस पर ही पुलिस रखने का समय आ गया है । यह क्या स्थिति है ?”
उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस पर कसे गए तंज
पुलिस शक्ति, यानी पुलिस तानाशाही का लाइसेंस नहीं !
एक आम इंसान का पुलिस बनने के लिए वर्दी पहनना उसे अपने आप में संवैधानिक अनुशासन से छूट नहीं दे देता । पुलिस के हर अधिकार के साथ उस अधिकार का निष्पक्षता से, उचित तरीके से और जिस उद्देश्य के लिए वह दिया गया है, उसी उद्देश्य के लिए उपयोग करने के दायित्व जुडा होता है । पुलिस को सभी मामलों में नहीं, तो कम से कम कुछ मामलों में संयम बरतना चाहिए । इस मामले में जैसा हुआ, पुलिस शक्ति का मतलब पुलिस तानाशाही का लाइसेंस नहीं है ।
बंदी बनाने की इतनी क्या शीघ्रता थी ?
न्यायाधीश ने पुलिस से पूछा कि जब आपने धारा ३५(३) का नोटिस दिया था, तब आपने उन्हें ३ दिनों के उपरांत आने के लिए कहा था; फिर इस दौरान इतनी क्या शीघ्रता थी ?
कौन स्वयं मनसे पुलिस स्टेशन जैसे ‘पवित्र’ स्थान पर जाने को तैयार होगा ?
जब पुलिस ने दलील दी कि गौडा स्वयं पुलिस स्टेशन आने के लिए तैयार हुए थे, तो न्यायालय ने उत्तर दिया, “क्या यह मानने योग्य है ? ‘हां, मुझे पुलिस स्टेशन जाना है, उस पवित्र जगह जाना है’ ऐसा कहकर कौन स्वयं आगे आएगा ?” न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि वे किसी भी आरोपी को कानूनी जांच से नहीं बचा रहे हैं । नोटिस में दिए गए समय पर यदि वह व्यक्ति उपस्थित नहीं होता है, तो पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है; परंतु उससे पहले नहीं ।
पुलिस स्वयं कानून नहीं बन सकती !
कानून के शासन से चलनेवाले संवैधानिक लोकतंत्र में, पुलिस स्वयं कानून नहीं बना सकती; वे भी संविधान और कानून के आदेशों से उतने ही बंधे हैं जितना कि वह नागरिक जिसके विरुद्ध वे कार्रवाई करते हैं ।
बंदी बनाने का अधिकार शोषण का माध्यम नहीं बन सकता !
बंदी का अधिकार शोषण का साधन नहीं बन सकता और कानून लागू करने के अधिकार का दुरुपयोग स्वयं को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता ।
पुलिस स्टेशन का नाम ‘व्हाइटफील्ड’ (सफेद क्षेत्र) की अपेक्षा ‘डार्कफील्ड’ (काला क्षेत्र) कर दीजिए !
“अब व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन का नाम परिवर्तित कर डार्कफील्ड पुलिस स्टेशन कर दीजिए,” इन कडे शब्दों में न्यायालय ने पुलिस को फटकार लगाई ।
राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को बंदी बनाने के संबंध में निर्देश जारी करने का पुलिस महानिदेशक को आदेश
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को २५ सितंबर २०२६ तक राज्यव्यापी दिशा-निर्देशों के पालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया । इसमें बंदी बानाने के संरक्षण से जुडे सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का कडाई से पालन करना अनिवार्य है । साथ ही, कानून का उल्लंघन करनेवाले अधिकारियों पर विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है । न्यायालय में उपस्थित अधिकारियों को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है । श्री. गौडा पर की गई कार्रवाई पर रोक लगानेवाले अंतरिम आदेश को बढा दिया गया है और इस मामले की अगली सुनवाई २५ सितंबर को होगी ।
10 अगस्त
हिंदुद्वेषी कुणाल कामरा का कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी वायरल करने पर हिंदू नेता पर मामला दर्ज!
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हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री मोहन गौड़ा के विरुद्ध मामला दर्ज
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समिति ने कामरा के हिंदुओं का उपहास करने वाले कार्यक्रम को रद्द करने की मांग करते हुए दिया था ज्ञापन!

बेंगलुरु (कर्नाटक) – हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री मोहन गौड़ा ने यहां के ‘व्हाइटफील्ड पुलिस थाने’ के परिसर में एक वीडियो बनाया था। उसमें उन्होंने दावा किया था कि ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ ने कुणाल कामरा के कार्यक्रम को रोकने की मांग की थी और पुलिस निरीक्षक ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। श्री गौड़ा ने बाद में यह वीडियो ‘एक्स’ पर भी प्रसारित किया।
हालांकि, सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के आरोप में एक पुलिस कांस्टेबल द्वारा शिकायत किए जाने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए श्री गौड़ा के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
पुलिस कांस्टेबल को श्री गौड़ा द्वारा ‘एक्स’ पर प्रसारित किए गए बयान भ्रामक और झूठे लगे, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस निरीक्षक ने दावा किया कि उन्होंने ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया था।
Karnataka govt has filed a suo motu case against Hindu activist @Mohan_HJS claiming he was spreading rumours/fake news about Kunal Kamra.
Kamra isn’t Kannadiga.
Mohan Gowda is.Kamra doesn’t live in Karnataka.
Mohan Gowda lives in.Kamra can’t speak Kannada.
Mohan Gowda…— Mr Sinha (@Mrsinha) August 8, 2026
पुलिस ने शिकायत में यह दावा किया!
शिकायतकर्ता कांस्टेबल ने शिकायत में कहा कि गौड़ा ने वीडियो में बताया था कि पुलिस निरीक्षक ने उन्हें आयोजक और कुणाल कामरा के विरुद्ध कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पुलिस निरीक्षक ने कार्यक्रम रद्द करने का आश्वासन दिया था। इसके अलावा, गौड़ा ने यह भी कहा था कि उनके संगठन (हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति) के विरोध के कारण पहले भी ऐसे कार्यक्रम रद्द किए गए थे।
उन्होंने कहा था, ‘हिंदू एकता की बड़ी जीत – व्हाइटफील्ड के हिंदुओं द्वारा तीव्र विरोध जताए जाने के बाद हिंदू देवी-देवताओं और संस्कृति का अपमान करने के इतिहास वाले कुणाल कामरा का बेंगलुरु में होने वाला कॉमेडी शो रद्द कर दिया गया।’
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, व्हाइटफील्ड के निरीक्षक ने श्री गौड़ा को आयोजक और कुणाल कामरा के विरुद्ध कार्रवाई करने का कोई आश्वासन नहीं दिया था और न ही यह कहा था कि कार्यक्रम रोका जाएगा। अधिकारी के अनुसार, कार्यक्रम आयोजक ने स्वयं कार्यक्रम रद्द किया था।
पुलिस के अनुसार, गौड़ा द्वारा किए गए दावे, जिनमें पुलिस निरीक्षक का भी संदर्भ दिया गया था, तथ्यों से परे और पूरी तरह भ्रामक थे।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 — किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लोक सेवक से उसके वैध अधिकारों का उपयोग करवाने के लिए झूठी जानकारी देना — और धारा 353(2) — सार्वजनिक अशांति या अव्यवस्था उत्पन्न करने वाली बयानबाजी — के तहत मामला दर्ज किया।
अपराध दर्ज किए जाने के संबंध में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने व्हाइटफील्ड के पुलिस उपायुक्त सैदुलू अदावत से बातचीत की। उनसे पूछा गया कि, “यदि कोई हिंदू व्यक्ति देवताओं के अपमान के विरुद्ध कार्रवाई की मांग लेकर आपके पास आता है और आप उसी के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं, तो क्या आपको ऐसा नहीं लगता?”
इस पर अदावत ने कहा कि पुलिस ने अन्य धर्मों से संबंधित मामलों में भी ऐसी कार्रवाई की है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति दो समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास करेगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
मामला दर्ज कर हिंदुओं की आवाज दबाने का कांग्रेस सरकार का प्रयास! – मोहन गौड़ा
इस संबंध में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए श्री मोहन गौड़ा ने कहा कि वे पुलिस की इस कथित गैरकानूनी कार्रवाई के विरुद्ध न्यायालय में लड़ेंगे।
उन्होंने कहा, “मूल रूप से हमने कानूनी तरीके से कुणाल कामरा का कार्यक्रम रद्द कराने के लिए पुलिस को लिखित ज्ञापन दिया था। ज्ञापन में की गई मांगों के संबंध में हमने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए वीडियो बनाया और लोगों को इसकी जानकारी दी। केवल राजनीतिक दबाव के कारण ही मेरे विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। चाहे कुछ भी हो जाए, सरकार हिंदुओं की आवाज दबा नहीं सकेगी। इस कार्रवाई से वास्तव में हिंदुओं की शक्ति और बढ़ेगी। हम डरेंगे नहीं, बल्कि इसके विरुद्ध न्यायालय में लड़ेंगे।”
पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में पूछे जाने पर श्री गौड़ा ने कहा कि पुलिस के सभी आरोप निराधार हैं और उनमें कोई तथ्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें “कुणाल कामरा के कार्यक्रम के संबंध में कार्रवाई करेंगे” ऐसा आश्वासन दिया था।
२ अगस्त
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के निवेदन के बाद बैंगलुरु में होनेवाला विवादित हास्य कलाकर कुणाल कामरा का कॉमेडी ‘शो’ रद्द
“यह संगठित हिंदू शक्ति की विजय है।” – श्री मोहन गौड़ा, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति

बेंगलुरु : 3 अगस्त 2026 को बेंगलुरु के व्हाइटफ़ील्ड स्थित URU Whitefield, पट्टंदूर अग्रहार में आयोजित होने वाला हास्य कलाकार कुणाल कामरा का कॉमेडी शो रद्द कर दिया गया है।
इस कार्यक्रम के संबंध में कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक शांति तथा धार्मिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को रद्द करने की मांग करते हुए हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति (HRSS) के अंतर्गत विभिन्न हिंदू संगठनों ने 1 अगस्त को व्हाइटफ़ील्ड पुलिस थाने में ज्ञापन सौंपा था।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया था कि, कुणाल कामरा ने पूर्व में अपने कुछ कॉमेडी कार्यक्रम तथा सार्वजनिक वक्तव्यों के माध्यम से भगवान श्रीराम, हिंदू धर्म तथा हिंदुओं के श्रद्धास्थलों का अपमान कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। इस संबंध में देश के विभिन्न भागों के पुलिस थानों में उनके विरुद्ध कई शिकायतें दर्ज होने की बात भी ज्ञापन में पुलिस के संज्ञान में लाई गई थी।
🚩 Hindu Unity Prevails! 🚩
Kunal Kamra’s Aug 3 Bengaluru show stands cancelled.
A victory for Hindu unity, awareness, and collective action.
🚩 Respect Dharma. Respect Faith.#HinduUnity #DharmaRakshana #Victory https://t.co/myoaQx1a1C pic.twitter.com/AeEZoXAUgF
— 🚩Mohan Gowda🇮🇳 (@Mohan_HJS) August 2, 2026
ऐसी पृष्ठभूमि को देखते हुए, व्हाइटफ़ील्ड में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम से सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था तथा हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की संभावना को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की अनुमति पर पुनर्विचार कर उसे रद्द करने की मांग पुलिस विभाग से की गई थी। पुलिस ने भी इस संबंध में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इसके बाद कार्यक्रम स्थल के मालिकों की ओर से कार्यक्रम रद्द किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई। हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह हिंदू समाज की जागरूकता, संगठित शक्ति तथा वैधानिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष का परिणाम है।
इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता तथा हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के संयोजक श्री मोहन गौड़ा ने कहा, “यह घटना एक बार फिर स्पष्ट संदेश देती है कि हिंदू समाज अपनी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले किसी भी प्रयास को सहन नहीं करेगा। विधिसम्मत रूप से प्रस्तुत किए गए ज्ञापन पर सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए पुलिस विभाग तथा इस अभियान में सहयोग देने वाले सभी हिंदू संगठनों, कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज का हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
ज्ञापन सौंपने के दौरान हिंदू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री मोहन गौड़ा, श्रीराम सेना के नेता श्री सुंदरेश नरगल, श्री सुब्रह्मण्य, श्री नारायण गौड़ा, श्री भरत कुमार, श्री तायप्पा सहित विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे।








