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हिन्दू ग्राहकों को ‘हलाल’ अन्नपदार्थों की सख्ती नहीं, अपितु ‘हलाल मुक्त’ अन्नपदार्थ उपलब्ध करवाएं !

हिन्दू जनजागृति समिति की उत्तर एवं दक्षिण गोवा जिलाधिकारियों से मांग

पणजी, १७ अक्टूबर – हिन्दू ग्राहकों को जबरन ‘हलाल’ अन्नपदार्थ न दिए जाएं, इसके साथ ही हिन्दू समाज के लिए ‘हलाल मुक्त’ अन्नपदार्थ उपलब्ध करवाए जाएं, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के शिष्टमंडल ने उत्तर एवं दक्षिण गोवा के जिलाधिकारियों को एक निवेदन द्वारा की है । दक्षिण गोवा में अतिरिक्त जिलाधिकारी श्रीनेत कोठावळे से मिलकर हलालविषय में विस्तृत जानकारी देकर यह निवेदन सौंपा गया ।

अतिरिक्त जिलाधिकारी श्रीनेत कोठावळे को निवेदन देते हुए हिन्दू जनजागृति समिति का शिष्टमंडळ

उत्तर गोवा में समिति के शिष्टमंडल में ‘भारत माता की जय’ संगठन के प्रा. मुकुंद कवठणकर, श्री. लक्ष्मीकांत केरकर आणि श्री. सुरेश डिचोलकर; गोमंतक मंदिर महासंघ के श्री. जयेश थळी, ‘शिव प्रतिष्ठान’के श्री. मंदार गावडे, ‘वीर सावरकर’ संगठन के श्री. अरुण नाईक, राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी के उत्तर गोवा समन्वयक श्री. सुभाष कुशवाह, केसरिया हिन्दू वाहिनी के श्री. सुभाष कवठणकर, सनातन संस्था की श्रीमती शुभा सावंत एवं हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. सुशांत दळवी आदि का समावेश था ।

उत्तर गोवा जिलाधिकारियों को निवेदन देने के उपरांत प्रसारमाध्यमों को संबोधित करते हुए हिन्दू जनजागृति समिति का शिष्टमंडल

निवेदन में कहा है कि, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं कुटुंब मंत्रालय के अंतर्गत ‘अन्न सुरक्षा एवं मानके प्राधिकरण’’ (FSSAI), इसके साथ ही प्रत्येक राज्य में स्वतंत्र ‘अन्न एवं औषधि प्रशासन’ विभाग (FDA) के होते हुए वर्तमान में भारतीय मुसलमानों द्वारा केवल मांस ही नहीं, अपितु अनाज, फल, सौंदर्यप्रसाधन, औषधियां आदि उत्पाद भी इस्लामनुसार वैध अर्थात ‘हलाल’ नामांकित हों, ऐसी मांग की जाती है । देश की केवल १५ प्रतिशत मुसलमान समाज को इस्लामसम्मत ‘हलाल’ खाने के लिए देना है, इसलिए ८५ प्रतिशत समाज पर ‘हलाल’ क्यों थोपा जा रहा है ? केवल धर्म के आधार पर निर्मित ‘हलाल प्रमाणपत्र’ व्यवस्था अन्य समाज घटकों पर थोपी जा रही है । यह धार्मिक अधिकारों का हनन है । इसलिए धार्मिक भेदभाव करनेवाले ‘हलाल प्रमाणपत्र’पर भारत में प्रतिबंध लगाएं । जिन निजी आस्थापनों को ‘हलाल प्रमाणपत्र’ देने की अनुमति दी गई है, उन सभी आस्थापनों की ऐसी अनुमति तुरंत निरस्त की जाए । जो संस्थाएं ‘हलाल प्रमाणपत्र’ देती हैं, उन सभी संस्थाओं की केंद्रीय अन्वेषण विभाग द्वारा छानबीन की जाए और इस निधि का उपयोग आतंकवादियों की सहायता के लिए तो नहीं किया गया है न ? इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कहीं संकट तो नहीं है न ? इसकी सखोल छानबीन होनी चाहिए ।

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