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छत्तीसगढ में सवा लाख ‘पार्थिव शिवलिंगों’ की पूजा के शुभ अवसर पर 500 धर्मांतरित परिवारों की सनातन धर्म में घर वापसी

“आपने सनातन को ललकारा है; अब सनातन आपको नहीं छोड़ेगा!” – प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, भाजपा

छत्तीसगढ के पादरी अरुण पन्नालाल द्वारा भगवान शिव के कथित अपमानजनक चित्रण का मामला

जनसमुदाय को संबोधित करते हुए श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ) : पादरी अरुण पन्नालाल ने सनातन धर्म का अपमान किया है और भगवान शिव के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सनातन किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन जो व्यक्ति सनातन की आस्था और संस्कृति को चुनौती देता है, उसे सनातन कभी नहीं छोड़ता। अधर्म और सनातन-विरोधी कृत्यों के परिणाम समय आने पर सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि जब भगवान विष्णु का ‘सुदर्शन चक्र’ चलता है, तो बड़े-बड़े अहंकार का भी चूर-चूर हो जाता है, ऐसा प्रखर वक्तव्य ‘अखिल भारतीय घर वापसी अभियान’ के प्रमुख और छत्तीसगढ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जांजगीर-चांपा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

‘राम मिलेंगे आश्रम’, ‘कुमार दिलीप सिंह जूदेव सनातन फाउंडेशन’ और ‘सेवा न्याय उत्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

श्री जूदेव ने आगे कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, संस्कृति और जीवन-दर्शन है। अपनी जड़ों से जुड़ना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और ‘घर वापसी’ अभियान इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में निरंतर किया जा रहा एक प्रयास है।

सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण और 500 धर्मांतरित परिवारों की हिंदू धर्म में वापसी

जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में, जिसे माता शबरी के पदस्पर्श से पवित्र और भगवान श्रीराम की तपोभूमि माना जाता है, ‘राम मिलेंगे आश्रम’ (टेंडुवाधाम) स्थित है। यहां 500 धर्मांतरित परिवारों की उनके मूल सनातन परंपरा में वापसी कराई गई।

‘सावन महोत्सव’ के अंतर्गत सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण और पूजा के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार तथा धार्मिक विधि-विधान के साथ यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर श्री जूदेव ने धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार में भाग लिया। साथ ही धर्मांतरित परिवारों के चरण-प्रक्षालन कर उन्हें सनातन संस्कृति की मुख्यधारा में पुनः शामिल किया गया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य व्यक्ति मंत्रोच्चार के समय उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. अशोक हरिवंशी, श्रीमती अंजू गबेल, जगन्नाथ दादा, महात्यागी बाबा, शालिनी अत्री, ज्योति जायसवाल, श्यामटा, भुवनेश्वरी साहू, माधुरी पांडे, शीलू साहू, लक्ष्मी पटेल, संतोषी साहू, दुर्गा बारेठ, पुष्पा साहू, पूर्णिमा गबेल, पुष्पा गबेल, परमेश्वरी सिदार, मीना साहू, अनिता कंवर, रोशनी राज, लक्ष्मी कंवर, नेम पटेल, लिमिश जायसवाल (धर्मसेना), ब्रिजेश जायसवाल, करण खुटे, नितीश वैष्णव, राजेश कुमार साहू, उज्जैन सिंह कंवर, अनिल गबेल, सरिता दुबे, कुत्री जांगड़े, रूपेंद्र गबेल, अवधेश शुक्ला, भूपेंद्र सिंह, सुधाकर त्रिपाठी, विकास, ठाकुर श्रावण सिंह, महेश, अश्विनी, विष्णु, महेंद्र पाल और जानकी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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