लव जिहाद में मारी गई एकता : शाकिब और अब्बू सहित परिवार ने किए थे शरीर के टुकडे

लॉकडाउन में एक छोटी सी गलती ने एक बड़ी मर्डर मिस्ट्री सुलझा दी। मामला लुधियाना पंजाब के खालसा कॉलेज की 19 वर्षीय एकता देशवाल के जघन्य हत्या की है। जिसे अंजाम देने में आरोपित शाकिब के पिता, भाई, दोस्त सहित दो सगी भाभियों रेशमा और इस्मत ने साथ दिया था। मेरठ पुलिस द्वारा इस हत्या की गुत्थी सुलझाने के साथ ही अब एक तरह से ‘लव जिहाद’ का ये पूरा मामला देश के सामने है।

लुधियाना के अंकुजा आनंद नगर की एकता देशवाल शाकिब से अमन बने एक और शातिर के प्यार में ‘लव जिहाद’ की भेंट चढ़ गईं। इस पूरे हत्याकांड में न सिर्फ शाकिब शामिल था बल्कि अब करीब एक साल बाद मेरठ पुलिस के खुलासे के मुताबिक शाकिब, मुसर्रत, मुस्तकीम, रेशमा, इस्मत और अयान नाम के 6 आरोपितों के नाम सामने आए हैं। जिसमें से एक को छोड़कर सभी उसके परिवार के लोग हैं।

कैसे हुई शुरुआत

मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के लोइया गाँव से शाकिब करीब चार साल पहले लुधियाना चला गया था। वहाँ दिलशाद के पास रहकर तांत्रिक क्रिया सीखने और करने लगा था। या यूँ कहा जाए इसकी आड़ में वह अपनी यह दुकान चलाते हुए लुधियाना में ही रहते हुए शिकार तलाशने लगा। हालाँकि, पुलिस के अनुसार, यह अभी जाँच का विषय है कि वह एकता देशवाल से पहले कितनी और हिन्दू लड़कियों को नाम बदलकर अपना शिकार बना चुका था।

लुधियाना में झाड़-फूँक की दुकान चलाते हुए, एक दिन लुधियाना के ही अंकुजा आनंद नगर की रहने वाली एकता देशवाल की मुलाकात शाकिब से हुई। या शाकिब ने उसे किसी इवेंट के दौरान देखा और टारगेट किया, ये अभी तक स्पष्ट नहीं है। मध्यम वर्गीय परिवार की एकता देशवाल उस समय बीकॉम की पढ़ाई के साथ-साथ पिता का हाथ बटाने के लिए पार्ट टाइम जॉब के रूप में विभिन्न कंपनियों के लिए इवेंट भी करती थी।

हालाँकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि एकता अचानक से बीमार होने की वजह से दिलशाद के तांत्रिक वाले दुकान पर शाकिब से मिली थी। जब हमने शाकिब से मुलाकात के बारे में पीड़िता के मामा से जानना चाहा तो पीड़िता के मामा ने ऑपइंडिया से बताया कि एकता बीमार नहीं थी, हाँ उसे थोड़ी बहुत एलर्जी की समस्या थी। जो ठीक नहीं हो रही थी, जिसकी वजह से हो सकता है वह वहीं लुधियाना बस अड्डे के पास ही तांत्रिक की दुकान चलाने वाले दिलशाद के पास गई होगी। जहाँ से शाकिब की उस पर निगाह पड़ी, या हो सकता है लुधियाना बस स्टैंड पर इवेंट करते समय शाकिब ने उसे देखा हो और वहीं से शाकिब ने एकता पर नजर रखनी शुरू की हो। इसका खुलासा तो अब शाकिब से उगलवा कर पुलिस ही कर सकती है।

पुलिस के अनुसार, शाकिब ने एकता को झाँसे में लेने के लिए खुद का नाम अमन बताया था। करीब छह महीने तक वह एकता से प्यार का नाटक करता रहा। और एकता से यहाँ-वहाँ मिलता रहा। अमन समझ कर शाकिब से प्यार कर बैठी एकता को अंदाजा भी नहीं था कि वह किस जाल में फँस चुकी है। बात आगे बढ़ी तो प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई।

एकता की मां सीमा ने बताया कि जब इस मामले की भनक परिवार को लगी तो अमन बने शाकिब को उन्होंने एक बार अपने घर समझाने के लिए भी बुलाया था। तब भी शाकिब ने हाथ में कलावा बाँध रखा था। जिससे उस पर किसी को संदेह नहीं हुआ। मां ने उसे अपनी बेटी को कम उम्र की बता कर उससे दूर रहने को कहा था। पीड़िता के मामा के अनुसार, मां सीमा ने उस समय कहा था कि उसे पढ़ने दो, वो अपना करियर बनाना चाहती है।

बिना सिर और हाथ के लाश

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पिछले साल 13 जून 2019 को सबी अहमद के खेत में पड़ोसी ईश्वर पंडित ने एक कुत्ते को इंसान का हाथ मुँह में लेकर भागते हुए देखा था, जिसके बाद उन्हें शक हुआ। और इसी शक के आधार पर जब सबी अहमद के गन्ने के खेत को खुदवाया गया तो वहाँ से एक युवती की लाश मिली थी। चूँकि, लाश की सिर और हाथ गायब थे। ऐसे में पहचान करना मुश्किल थी। तो मामला पुलिस रिकॉर्ड में तो रहा है लेकिन आगे कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा।

इस दौरान, लगभग एक साल तक एकता का परिवार इस बात से अनजान रहा कि एकता इस दुनिया में है भी या नहीं?

मेरठ पुलिस ने ऐसे सुलझाई गुत्थी

मीडिया रिपोर्ट में तो कहा यह भी जा रहा है कि लॉकडाउन होने पर शाकिब जब अपने घर लौटा, तो एक दिन नशे में अपने दोस्तों को उसने सारी बात बताई जो मुखबिर के माध्यम से पुलिस तक पहुँच गई।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, साल भर पहले जब खेत में लाश मिली थी, इसके बाद डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में मिसिंग केसेज की पड़ताल की गई। एसएसपी ने जानकारी दी कि इस छानबीन के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद पुलिस की एक टीम को ये पता लगाने के लिए मुस्तैद किया गया कि लोइया गाँव के कौन-कौन से लोग हैं, जो बाहर कमाते हैं। एसएसपी साहनी ने बताया कि बाहर जहाँ-जहाँ यहाँ के लोग काम करते थे, वहाँ-वहाँ के थानों में जाकर मिसिंग केसेज दिखवाए गए।

जब पुलिस पंजाब पहुँची, तो उसे वहाँ पहली सफलता मिली। वहाँ लुधियाना के मोतीनगर थाना क्षेत्र की निवासी पीड़िता एकता के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज थी। जिसे कई महीने तलाशने के बाद एकता के परिवार ने ही अपनी बेटी के लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी, जहाँ पहुँचने पर यूपी पुलिस को लाश और आरोपित की पहचान सुनिश्चित करने में सफलता मिली।

मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया, “हमने सुराग के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य सर्विलेंस तकनीकों का इस्तेमाल किया। हमने पाया कि इलाके में कुछ मोबाइल फोन नंबर एक्टिव थे, मगर घटना के तुरंत बाद बंद कर दिए गए थे। उन नंबरों को खोजा गया, जो हमें पीड़िता और आरोपित तक ले गए।” लॉकडाउन में घर आए शाकिब के बारे में पक्का सुराग लगते ही पुलिस मामले की कड़ियों को जोड़ने में सफल रही।

इस तरह से मेरठ में एक साल पहले बिना सिर और हाथ के मिली लाश मामले में पुलिस ने शाकिब, मुसर्रत, मुस्तकीम, रेशमा, इस्मत और अयान नाम के सभी 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी अजय साहनी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि शाकिब की पूरी हिस्ट्री खंगाली जा रही है।

क्या है पूरा मामला

कहानी वापस पीछे ले चलते हैं। लुधियाना में दिलशाद के साथ तांत्रिक का काम करते हुए शाकिब ने एक दिन दिलशाद से मनमुटाव होने के बाद पहले करनाल में खुद की दुकान खोली। उसके बाद एकता देशवाल को नौकरी देने के नाम पर अपने पास बुलाया। करीब तीन माह तक एकता उसके साथ करनाल में रहीं। लेकिन उस दौरान एकता का संपर्क परिवार से बना रहा। उसके बाद अमन बने शाकिब ने एकता को बिजनेस बढ़ाने या नए काम के लिए घर से ज्वेलरी लाने के लिए कहा। लड़की के मामा ने बताया कि शाकिब ने एकता को अपने बस में कर लिया था। जिससे एकता चोरी से घर से करीब 25 लाख की ज्वेलरी लेकर शाकिब के कहने पर उसके पास चली गई।

शाकिब को शायद इन सबके बारे में पहले से ही भनक थी। अमन बने शाकिब ने 13 मई 2019 को एकता को शादी का झाँसा देकर करनाल से मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के गाँव लोइया ले आया। यहाँ पर एकता को उसकी हकीकत पता चली तो उसने साथ रहने और निकाह से इन्कार कर दिया था। तभी 25 लाख की ज्वेलरी हाथ से निकलती देख शाकिब ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर एकता की नृशंस हत्या की साजिश रच दी।

एकता के मामा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि संभवतः (शाकिब के भाभी के अनुसार) वो लोग वैसे ही किसी दरगाह में शादी कर चुके थे लेकिन उनका निकाह नहीं हुआ था। और अब हकीकत जानने के बाद एकता किसी भी कीमत पर साथ रहने को तैयार नहीं थी।

5 जून 2019 को ईद के दिन शाकिब उसे बाहर घुमाने के बहाने ले गया। जहाँ रात करीब 9 बजे उसने अपने परिवार की मदद से कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिला कर एकता को पिला दी थी। तब भाई मुसर्रत, पिता मुस्तकीम, भाभी रेशमा पत्नी नवेद, इस्मत पत्नी मुसर्रत एवं गाँव के साथी अयान के साथ सुनसान इलाके में बेहोश एकता को ले गए।

मेरठ पुलिस के सामने दिए बयान के अनुसार भाभी रेशमा ने एकता के सभी कपड़े उतार दिए। इसके बाद सभी ने मिलकर उसके हाथ, पैर और सिर अलग-अलग कर दिए। मकसद पहचान छिपाना था। पुलिस ने बताया कि शाकिब ने पीड़िता का हाथ इसलिए काट दिया था, क्योंकि उस पर उसके नाम का टैटू था। धड़ को पास के ही सबी अहमद के गन्ने के खेत में गड्ढा खोदकर दबा दिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने लाश के ऊपर नमक छिड़क दिया था, ताकि वो जल्द से जल्द गल जाए। हाथ, पैर और सिर को गाँव के तालाब में फेंक दिया।

हत्या के बाद शाकिब चलाता रहा एकता का सोशल मीडिया अकाउंट

एकता देशवाल की जघन्य हत्या के बाद शाकिब और गुनाह में शामिल उसके साथी करनाल जाकर तंत्र मंत्र के काम में लग गए। जैसे कहीं कुछ हुआ ही न हो। चूँकि, एकता के घरवाले अमन बने शाकिब को पहचानते और एक बार घर आने की वजह से जानते थे। इसलिए, कहीं परिवार को उस पर ही शक न हो जाए, शाकिब ने एक तरकीब निकाली। वो युवती के फोन से ही उसकी फेसबुक आईडी लगातार अपडेट करते रहा, ताकि घर वालों को उसकी मौत हो जाने का बिलकुल भी पता न चले।

तो इस तरह से बड़ी चालाकी से शातिर शाकिब ने 19 वर्षीय एकता को झाँसा देकर मारने के बाद भी उसका फोन चालू रखा। परिवार को भ्रम में डालने के लिए वो लगातार सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता था और व्हाट्सएप की डिसप्ले पिक्चर भी लगातार बदलता रहता था, ताकि सभी को लगे कि वो जिंदा है।

मृत एकता के मामा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि जब कई बार फोन लगाने के बाद भी कभी उधर से कोई रिसीव न करे और काट दे, लोकेशन पता करने पर भी अक्सर अलग-अलग राज्यों का बताए, तो इस तरह जब अपनी बेटी से महीनों तक संपर्क नहीं हुआ तो परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद अब मामले का खुलासा हुआ।

मृतक एकता की मां ने जड़े थप्पड़

करीब साल भर से अपनी बेटी को हर जगह तलाशती मां को जब पुलिस के खुलासे के बाद पूरी बात मालूम चली तो उन्हें भरोसा नहीं हुआ कि उनकी बेटी दुनिया में नहीं है। इसके पहले उनका परिवार यही सोच रहा था कि वो जहाँ भी होगी, खुश होगी। क्योंकि उसके फेसबुक और व्हाट्सअप स्टेटस लगातार साल भर तक चेंज होते रहे। लड़की के मामा ने बताया कि उन्होंने कई बार कोशिश की पता करने की लेकिन हर कुछ दिन पर मोबाइल की लोकेशन अलग-अलग राज्यों की मिलती।

पुलिस ने जब मृत एकता की मां को साल भर पहले हुई हत्या और मुख्य आरोपित शाकिब समेत 6 और लोगों को गिरफ्तार करने की खबर दी तो उनके सब्र का बाँध टूट गया। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मृतक युवती की मां को अपने सामने शाकिब की भाभी रेशमा से पूरी कहानी पता चली तो उन्होंने वहीं उठकर शाकिब पर थप्पड़ों की बरसात कर दी। मृतक एकता के मामा भी खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने भी दो चार थप्पड़ लगा के अपना आक्रोश तो व्यक्त किया लेकिन अंदर से इस घटना का सारा सच जानकर वो हिल गए।

पीड़िता की माँ सीमा शाकिब का साथ देने वाली उसकी दोनों भाभियों रेशमा और इस्मत से पूछती रहीं, “क्या एकता के कपड़े उतारते हुए, उसे नंगा करते हुए, इतनी बर्बरता से मारते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई।” गुस्से में दो-चार झापड़ रेशमा को लगा बैठीं लेकिन इतने से भला एक जवान बेटी की माँ को कहाँ सुकून मिलने वाला था।

गिरफ़्तारी के बाद भी शाकिब ने की भागने की कोशिश

पुलिस ने बताया कि सोमवार (जून 1, 2020) को जब शाकिब को हत्या की जगह पर ले जाया जाने लगा, तो उसने एक कॉन्स्टेबल की पिस्टल छीनी और रास्ते में पुलिस पर फायरिंग करके भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में इस शातिर को गोली लगी। साथ ही एक कॉन्स्टेबल को भी गोली लगी है। शाकिब के पैर में चार गोली लगने के बाद पुलिस उसका अस्पताल में उपचार करा रही है, जबकि उसकी दोनों भाभी रेशमा और इस्मत को जिला जेल भेज दिया गया। मुसर्रत, अयान और मुस्तकीम को अस्थाई जेल में भेजा गया। उनके क्वारंटाइन का समय पूरा होने के बाद जिला जेल भेजा जाएगा।

हालांकि, पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया फावड़ा, कत्ल का सामान और मृतका का मोबाइल बरामद कर लिया है और इस लव जिहाद के इस हत्याकांड से पर्दा उठाकर सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन अब साल भर से अपनी बेटी को तलाशते परिवार की आखिरी उम्मीद प्रशासन से शाकिब और उसके परिवार को इस जघन्य हत्या के अपराध में फाँसी की माँग पर टिकी है ताकि आने वाले समय में कोई इस तरह से मजहब बदलकर किसी के भरोसे के साथ ही उसकी बर्बर हत्या न कर सके।

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