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हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंपर अन्याय होनेकी स्थितिमें राष्ट्रीय स्तरपर क्या करें ?

हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंको समूल नष्ट करना ही सत्ताधारियोंका मुख्य उद्देश्य होनेके कारण वह साध्य न होने देना, सर्व हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंका प्रथम धर्मकर्तव्य है । ऐसे प्रसंगोंमें…

न्यायालयद्वारा शिवाजी महाराजके छायाचित्रवाली बहीके विरोधमें प्रविष्ट अभियोग ठुकराया गया

शिवाजी महाराजका छायाचित्रवाली सनातन बहीके वितरणसे समाजमें जातीय दुश्मनी उत्पन्न होनेकी संभावना है, इस प्रकारके परिवादको लेकर चलाया जानेवाला अभियोग केरलके कासारगौडके न्यायालयद्वारा निरस्त किया…

द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन’की फलनिष्पत्ती

हिंदू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए किए जानेवाले प्रयत्नोंके लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चरणके रूपमें इस अधिवेशनका इतिहासमें उल्लेख होगा ! इस अधिवेशनका उद्देश्य १०० प्रतिशत सफल हुआ…

राष्ट्र तथा धर्मके विचार विद्यार्थियोंसे लेकर बडोंतक पहुंचानेवाले प्रा. दुर्गेश परुळकर ! – भाग २

राष्ट्र, तथा धर्मपर १० पुस्तकोंका लेखन; प्रबोधन, प्रवचन, व्याखानोंके माध्यमसे; सत्य तथा ज्वलंत इतिहास समझानेके माध्यमसे ज्येष्ठ पत्रकार एवं प्रा. दुर्गेश परुळकर राष्ट्रकार्य कर रहे…

कुंभमेलेकी धरतीपर ‘वारी’ को सुविधा क्यों नहीं है ? – ह.भ.प. रामेश्वर महाराज शास्त्री

तीर्थक्षेत्रोंका विकास करना शासनका कर्त्तव्य है; किंतु यह विकास तीर्थक्षेत्रके अनुसार हो । तीर्थक्षेत्रमें त्यागवृत्ति देखी जाती है; तथा भोगवादकी अपेक्षा साधना करनेवाला समाज अधिक…

शौर्यको प्रोत्साहन देनेवाले उपक्रम कीर्तनकारोंको करने चाहिए ! – ह.भ.प. चारुदत्त आफळे

कीर्तनकार एवं प्रवचनकारोंको केवल कीर्तन ही करके नहीं रुकना चाहिए, अपितु प्रसंगानुरूप शौर्यको प्रोत्साहन देनेवाले उपक्रम भी चलाने चाहिए ।

शास्त्रको छोडकर हिंदू और धर्म ये दो शब्द रह ही नहीं सकते ! – डॉ. कौशिकचंद्र मलिक

शास्त्रको छोडकर हिंदू और धर्म ये दो शब्द रह ही नहीं सकते । हिंदू धर्म शास्त्रपर आधारित है । वेद अपौरूषेय हैं ।

भारत हिंदू राष्ट्र बने, इस हेतु राष्ट्रव्यापी हिंदूसंगठनका निर्धार !

अधिवेशनमें सहभागी हुए २१ राज्योंके हिंदुत्ववादी संगठनोंके २५० से भी अधिक पदाधिकारियोंने भारतको हिंदू राष्ट्र बनाने हेतु राष्ट्रव्यापी हिंदूसंगठनका समान कृति योजना निश्‍चित की ।