एक ओर ‘राज्य महोत्सव’, तो दूसरी ओर प्रतिबंध क्यों?
कोल्हापुर जिला परिषद में प्रशासनिक दोहरेपन पर हिंदू जनजागृति समिति का सवाल

कोल्हापुर – कोल्हापुर जिला परिषद की प्रशासनिक इमारत में पिछले 22 वर्षों से अत्यंत शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्वक आयोजित होने वाले गणेशोत्सव को एक संगठन द्वारा दिए गए निवेदन के बाद बंद करने का निर्णय जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा लिए जाने का समाचार प्रकाशित हुआ है। एक ओर गणेशोत्सव को ‘राज्य महोत्सव’ घोषित किया जाता है और दूसरी ओर जिला परिषद की प्रशासनिक इमारत में 22 वर्षों से आयोजित हो रहे गणेशोत्सव को अचानक बंद कर दिया जाता है। यह प्रशासनिक विरोधाभास आखिर किस कारण से है?
इसी संदर्भ में जिला परिषद, कोल्हापुर की प्रशासनिक इमारत में गणेशोत्सव बंद करने के निर्णय को तत्काल रद्द कर गणेशोत्सव पूर्ववत शुरू किया जाए। साथ ही, इस निर्णय के कानूनी आधार की जांच कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए, ऐसी मांग का निवेदन हिंदू जनजागृति समिति द्वारा जिला प्रशासन को दिया गया। यह निवेदन तहसीलदार हनुमंत म्हेत्रे ने स्वीकार किया। यही निवेदन जिला परिषद में बांधकाम सभापति सौ. सारिका नांदेकर को भी दिया गया।
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य श्री. इंद्रजीत पाटील और सोनाली पाटील, श्री. प्रवीण यादव, शिवसेना के उपजिलाप्रमुख श्री. किशोर घाटगे, ‘मराठा तितुका मेळवावा’ के कार्यप्रमुख श्री. योगेश केरकर, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री. निरंजन शिंदे, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री. अशोक गुरव, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री. रामभाऊ मेथे, ‘हिंदू एकता आंदोलन’ के शहरप्रमुख श्री. गजानन तोडकर, ‘हिंदू जागरण’ की डॉ. अश्विनी माळकर, हिंदू महासभा के मनोहर सोरप, पूजा शिंदे, ‘नमो नमो’ के जिलाध्यक्ष श्री. विक्रम जरग तथा हिंदू जनजागृति समिति के सर्वश्री शिवानंद स्वामी, महेंद्र अहिरे, अजित सुस्वरे, प्रीतम पवार, हिंदुत्वनिष्ठ श्री. शिवानंद पणदे, श्री. विजय पाटील और श्री. दिलीप भिवटे उपस्थित थे।
महाराष्ट्र के अनेक पुलिस थानों, नगरपालिकाओं, पुलिस मुख्यालयों तथा अन्य सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में सत्यनारायण पूजा, गणेशोत्सव, शस्त्रपूजन और शिवजयंती जैसे कार्यक्रम कई दशकों से शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए जाते हैं। फिर केवल कोल्हापुर जिला परिषद में ही यह नियम क्यों लागू किया जा रहा है?
यदि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ‘सरकारी व्यवस्था द्वारा प्रत्येक धार्मिक परंपरा से अलग रहना’ है, तो महाराष्ट्र सदन, नई दिल्ली में वर्ष 1997 से सार्वजनिक गणेशोत्सव आयोजित किए जाने की आधिकारिक जानकारी शासन की वेबसाइट पर उपलब्ध है। महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों और महामंडलों के कर्मचारी इस गणेशोत्सव समिति का हिस्सा हैं।
जिला परिषद में निवेदन दिए जाने के बाद बांधकाम सभापति सौ. सारिका नांदेकर ने कहा, “हम सभी सदस्य जिला परिषद में गणेशोत्सव मनाने के लिए दृढ़ हैं और किसी भी परिस्थिति में गणेशोत्सव होगा ही।”

निवेदन में की गई कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1. जिला परिषद, कोल्हापुर की प्रशासनिक इमारत में पिछले 22 वर्षों से आयोजित हो रहे गणेशोत्सव को, यदि कोई वैध और स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध नहीं है, तो पहले की तरह शुरू करने की तत्काल लिखित अनुमति दी जाए।
2. गणेशोत्सव बंद करने का आदेश किस कानून/नियम के आधार पर दिया गया? उसकी प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जाए।
3. यदि यह पाया जाता है कि यह निर्णय अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर, संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन करते हुए तथा किसी सक्षम सरकारी आदेश के बिना लिया गया है, तो संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही निर्धारित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
4. गणेशोत्सव को ‘राज्य महोत्सव’ के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद जिला परिषद द्वारा गणेशोत्सव बंद करने का यह निर्णय राज्य सरकार की नीति के अनुरूप है या नहीं? इस संबंध में शासन द्वारा स्पष्टीकरण दिया जाए।








