श्रीलंका में सार्वजनिक स्थलों पर बुर्का-नकाब पहनने पर लगाया गया प्रतिबंध : राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा

श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक स्थलों पर सभी प्रकार के चेहरे के नकाब को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने का हवाला देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को मंजूरी दे दी। हालाँकि, कोविड-19 से निपटने के लिए मास्क पहनने की अनुमति है।

यह कदम ऐसे समय आया है जब जन सुरक्षा मंत्री सरत वीरसेकरा ने मार्च में एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें बुर्का पर प्रतिबंध लगाने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त करने की बात कही गई थी। बुर्के का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं द्वारा चेहरा और शरीर को ढँकने के लिए किया जाता है।

कैबिनेट प्रवक्ता और सूचना मंत्री केहलिया रामबुकवेला ने बुर्के का उल्लेख किए बिना कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर सभी तरह के चेहरा ढँकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि ये फैसला दो साल पहले लिया गया था, जब ईस्टर संडे वाले दिन चर्च और होटलों पर एक के बाद एक कई आतंकी हमले हुए थे। मंत्री ने कहा, “सभी तरह के नकाब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” इस तरह से इसमें सभी तरह के बुर्का और नकाब शामिल हो जाएँगे। इस प्रस्ताव को अब कानून बनाने के लिए इसे संसद से अनुमोदित कराना होगा।

श्रीलंका की कैबिनेट के प्रवक्ता और सूचना मंत्री केहलिया रामबुकवेला ने कहा कि श्रीलंका में सार्वजनिक जगह पर चेहरे ढँकने पर फैसला दो साल पहले ही उस वक्त ले लिया गया था जब ईस्टर के दौरान श्रीलंका की चर्च में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भयानक बम विस्फोट कर दिया था। उस हमले में ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। जिसके बाद सरकार ने फैसला किया था कि सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढँकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। श्रीलंका के सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि चेहरे छिपाने वाले किसी भी तरह के नकाब पहनने पर श्रीलंका में प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कोलंबो में पाकिस्तानी दूत ने एक ट्वीट में कहा कि यह प्रतिबंध “सिर्फ और सिर्फ श्रीलंकाई मुसलमानों और दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को चोट पहुँचाने का काम करेगा।”

पिछले महीने श्रीलंका में पाकिस्तान के हाई कमीशन साद खट्टक ने कहा था कि श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबंध लगाना एक विभाजनकारी कदम है। श्रीलंका सरकार के इस कदम से मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है और श्रीलंका में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को भी खतरा पैदा होगा।

श्रीलंका में हमला

श्रीलंका में साल 2019 में ही सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर पाबंदी का ऐलान कर दिया था। साल 2019 में पाकिस्तान में ईस्टर के दिन एक के बाद एक कई बड़े बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों के पीछे मुस्लिम कट्टरपंथियों का हाथ था और उस बम धमाके के आरोप में श्रीलंका में कुछ दिन पहले एक बड़े मुस्लिम नेता को गिरफ्तार किया गया। श्रीलंका में उस बम ब्लास्ट में कई मौलानाओं को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनके बम धमाके में सीधे हाथ पाए गए थे।

श्रीलंका में सिलसिलेवार बम धमाकों को चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात यानी NTJ ने अंजाम दिया था। इस संगठन ने श्रीलंका में एक साथ तीन चर्चों और बड़े होटलों को निशाना बनाया था। जिसमें 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उस घटना के फौरन बाद श्रीलंका की सरकार ने अस्थाई तौर पर बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिया था और अब कैबिनेट ने भी नकाब पर प्रतिबंध लगाने वाली फाइल पर साइन कर दिए हैं।

संदर्भ : OpIndia

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