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श्री तुलजाभवानी देवस्थान की 1668 हेक्टेयर भूमि सहित अन्य राज्यों की भूमि का तत्काल कब्जा लें – हिन्दू जनजागृति समिति

अन्यथा न्यायालय में प्रतिवादी बनाने की पुणे विभागीय आयुक्त को कानूनी चेतावनी

पुणे : श्री तुलजाभवानी देवी को महाराष्ट्र सहित कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के भक्तों द्वारा अर्पित की गई भूमि के अवैध हस्तांतरण के मामले में ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ ने पुणे विभागीय आयुक्त को सीधी कानूनी चेतावनी दी है। ‘महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वस्त व्यवस्था अधिनियम’ की धारा 18, 19, 21, 22 और 22-अ के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करके देवी के नाम पर दर्ज सभी भूमियों का प्रत्यक्ष कब्जा तत्काल प्राप्त किया जाए; अन्यथा शासन और संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी बनाकर उच्च न्यायालय में नई जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी, ऐसी चेतावनी समिति ने दी है।

मंदिर की 1668.14 हेक्टेयर भूमि और करोड़ों रुपयों के दानपेटी घोटाले के संबंध में हिन्दू जनजागृति समिति की जनहित याचिका (क्र. 21/2018) मुंबई उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ में प्रलंबित है। श्री तुलजाभवानी देवस्थान के हजारों एकड़ भूमि घोटाले के मामले में विधानमंडल में राजस्व मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार, सरकार ने 20 जुलाई 2026 को पुणे विभागीय आयुक्त श्रीमती शीतल तेली-उगले की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति को हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से मुकदमा लड़ने वाले अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी और अधिवक्ता उमेश भडगावकर ने एक विस्तृत कानूनी नोटिस-सह-ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह ज्ञापन सौंपते समय अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी, अधिवक्ता उमेश भडगावकर, तथा पुणे से अधिवक्ता (सौ.) मुग्धा बिवलकर और अधिवक्ता (सौ.) सुनंदा येवले उपस्थित थीं।

इस ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज सहित अनेक हिन्दू राजाओं और देशभर के भक्तों ने श्री तुलजाभवानी देवी को बड़े पैमाने पर भूमि दान में दी थी। स्वयं निजाम के गजेटियर में भी देवी के नाम पर 1668.14 हेक्टेयर भूमि का आधिकारिक उल्लेख है; लेकिन 1962 में मंदिर का नियंत्रण सरकार के पास आने के बाद मूल भूमि के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति के लिए आवश्यक कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, समिति ने आरोप लगाया है कि हजारों हेक्टेयर भूमि पहले से ही चार मठों के कब्जे में होने का चित्र निर्माण कर प्रशासन ने मूल भूमि के प्रश्न की जानबूझकर अनदेखी की है। प्रशासन अब केवल जांच की औपचारिकताएं पूरी करने के बजाय, कानून में निहित अधिकारों का सीधा उपयोग कर सभी रिकॉर्ड की गहन पड़ताल करे और अवैध रूप से हस्तांतरित हुई भूमि को पुनः देवस्थान के नाम पर दर्ज कर उसका प्रत्यक्ष कब्जा प्राप्त करे, यह दृढ़ मांग इस अवसर पर की गई।

7 जनवरी 2010 को विधि एवं न्याय विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव एम. जी. गिरटकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की भी प्रशासन ने अनदेखी की है। साथ ही, धाराशिव के अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जांच समिति और तुलजापुर देवस्थान के अध्यक्ष के समक्ष भी इससे पहले कानूनी आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। देवस्थान की संपत्ति को सुरक्षित करने के लिए यदि तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को उनकी व्यक्तिगत और आधिकारिक क्षमता में प्रतिवादी बनाकर उच्च न्यायालय में नई जनहित याचिका दायर की जाएगी, ऐसा हिन्दू जनजागृति समिति ने स्पष्ट किया है।

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