कणकवली में प्रेस-वार्ता

कणकवली – यात्री जल परिवहन (Mumbai Sindhudurg Ro-Ro Service ) को केवल अमीरों तक सीमित न रखते हुए इसे सामान्य नागरिकों के लिए भी शीघ्र से शीघ्र शुरू किया जाए, ऐसी मांग वीर सावरकर के विचारों पर चलने वाली तथा पूर्णतः सामाजिक विषयों पर केंद्रित गैर-सरकारी संस्था ‘सावरकर वॉरियर्स’ के प्रमुख तथा ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक’ के अध्यक्ष श्री रणजीत सावरकर तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद के श्री विक्रम भावे ने ९ सितंबर को यहां के शासकीय विश्रामगृह में आयोजित संयुक्त पत्रकार परिषद में की ।

सावरकर वॉरियर्स’ तथा ‘ हिन्दू विधिज्ञ परिषद’ की ओर से यह पत्रकार परिषद आयोजित की गई थी । इस अवसर पर हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री हेमंत मणेरीकर, श्री राजेंद्र पाटील तथा सनातन संस्था के सद्गुरु सत्यवान कदम उपस्थित थे ।
Why is Konkan still waiting for passenger water transport? “It shouldn’t be a luxury only for the rich.”
Savarkar Warriors & Hindu Vidhidnya Parishad demand affordable services. With 15 lakh Konkan residents in Mumbai & 10–12 lakh travelling during festivals, make it a priority pic.twitter.com/fPPS5TBlFT
— Sanatan Prabhat (Kannada) (@Sanatan_Prabhat) September 9, 2026
श्री सावरकर द्वारा रखे गए प्रमुख बिंदु
१. अंग्रेजों ने अपना व्यापार चलाने तथा उसका विस्तार करने के लिए जलमार्ग का भरपूर उपयोग किया ; किंतु कोंकण के क्रांतिकारी विचारों वाले लोग मुंबई के निकट भी न आ सकें, इस उद्देश्य से उन्होंने यात्री जल परिवहन को सक्षम नहीं होने दिया । वर्तमान सरकार भी अंग्रेजों के नक्शेकदम पर चल रही है ।
२. कोंकण रेलवे की मांग मूलतः कोंकणवासियों के आंदोलन के पश्चात पूरी हुई थी । कोंकण से मुंबई में जाकर बसे नागरिकों की संख्या लगभग १५ लाख है । गणेशोत्सव तथा विभिन्न यात्राओं के अवसर पर कोंकण आने वाले नागरिकों की संख्या लगभग १० से १२ लाख होती है । ये सभी नागरिक त्योहारों तथा उत्सवों के लिए कोंकण आते समय रेलगाड़ियों, एस.टी. बसों, निजी बसों तथा निजी वाहनों का उपयोग करते हैं ।
३. बंदरगाहों का विकास होने पर कोंकण के पर्यटन, बाजारों के विकास तथा आवागमन सहित सभी क्षेत्रों में इसका लाभ मिलेगा । पडोसी गुजरात राज्य में हजीरा से घोघा के मध्य यात्री जल परिवहन सफलतापूर्वक चल रहा है । समुद्री तट वाले अनेक देश आज यात्री जल परिवहन सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं । महाराष्ट्र में कुछ वर्ष पहले ‘कोंकण शक्ति’, ‘कोंकण सेवक’, ‘दमानिया कैटामरीन’ जैसी यात्री जल परिवहन सेवाएं थीं ; किंतु अन्य क्षेत्रों में प्रगति करने वाला महाराष्ट्र इस क्षेत्र में पीछे रह गया है, ऐसा दिखाई देता है ।
इस अवसर पर श्री भावे द्वारा रखे गए प्रमुख बिंदु
१. हवाई, रेल तथा सडक परिवहन की तुलना में जलमार्ग अधिक सस्ता तथा पर्यावरण के अनुकूल है । केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के ब्यौरे के अनुसार, सडक परिवहन की लागत प्रति किलोमीटर-प्रति टन ३ रुपये ७८ पैसे, रेल परिवहन की लागत प्रति किलोमीटर-प्रति टन १ रुपये ९६ पैसे, जबकि जल परिवहन की लागत प्रति किलोमीटर-प्रति टन केवल १ रुपये ८० पैसे है । इसलिए क्या केवल सडक निर्माण के ठेके प्रभावित होंगे, इस कारण जल परिवहन सेवा के विचार को पीछे रखा जा रहा है ? इसके अलावा, रेल यात्रा पर सब्सिडी दी जाती है, जिसके कारण वह आम जनता के लिए सस्ती पडती है । कम-से-कम कुछ समय के लिए जल यात्रा को भी इसी प्रकार सब्सिडी दी जा सकती है ।
२. इससे रेलवे की पटरियों, प्लेटफॉर्म आदि पर होने वाला खर्च बच सकता है । इसी प्रकार सडक निर्माण, चौडीकरण तथा देखभाल पर होने वाला खर्च भी बच सकता है । इसलिए ऐसी सब्सिडी देना अथवा सरकार द्वारा स्वयं नौका सेवा शुरू करना (सरकारी प्रतिष्ठान के माध्यम से यह उपक्रम चलाना) भी व्यावहारिक तथा वहनीय हो सकता है ।
यह विषय गंभीर है तथा ‘सुराज्य अभियान’ की ओर से हम इस मांग का लगातार अनुसरण करेंगे, ऐसा आश्वासन सुराज्य अभियान के डॉ. रविकांत नारकर द्वारा दिया गया ।
8 अगस्त
जलमार्ग केवल अमीरों तक सीमित न रहे, आम लोगों के लिए ‘यात्री जल परिवहन’ शुरू करें – हिन्दू विधिज्ञ परिषद का सरकार से आवाहन

मुंबई : विमान, रेलवे और सड़क परिवहन की तुलना में अधिक सस्ता, पर्यावरण के अनुकूल और दुर्घटना-मुक्त होने के बावजूद, राज्य सरकार जल परिवहन की अनदेखी कर रही है। सरकार सड़क निर्माण, भूमि अधिग्रहण और पुलों के काम पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन प्रकृति प्रदत्त जलमार्गों का उपयोग यात्री परिवहन के लिए नहीं किया जा रहा है। बढ़ती आबादी और सड़क-रेल परिवहन पर पड़ने वाले भारी दबाव को देखते हुए, सरकार को जलमार्गों का उपयोग केवल अमीरों के ‘क्रूज़ पर्यटन’ तक सीमित न रखकर आम लोगों के लिए भी यात्री जल परिवहन शुरू करना चाहिए। यह आवाहन हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने किया है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने इस संबंध में गृह सचिव (बंदरगाह और परिवहन) और मैरीटाइम बोर्ड को एक विस्तृत पत्र भेजा है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क परिवहन की लागत 3.78 रुपये प्रति किलोमीटर और रेलवे की 1.96 रुपये है। इसकी तुलना में, जल परिवहन के लिए यह खर्च केवल 1.80 रुपये प्रति किलोमीटर है। यह किफायती विकल्प विशेष रूप से कोंकणवासियों के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है। वर्तमान में कोंकण से होकर जाने वाली अधिकांश ट्रेनें दिल्ली, चेन्नई जैसी लंबी दूरी से आती हैं, इसलिए वे पहले से ही आरक्षित होती हैं। रेलवे के सामान्य डिब्बों में भी स्थानीय लोगों को जगह पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। नतीजतन, स्थानीय लोगों की तुलना में अन्य राज्यों के नागरिकों को इन ट्रेनों का अधिक लाभ मिलता है। कोंकण रेलवे पर इस भारी दबाव को देखते हुए, जल परिवहन का विकल्प उपलब्ध होने पर कोंकणवासियों की यात्रा अधिक आरामदायक हो जाएगी, ऐसा अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने पत्र में कहा है। चूंकि जल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में आधे से भी कम खर्चीला है, इसलिए पड़ोसी राज्य गुजरात में ‘हजीरा से घोघा’ जल परिवहन सफलतापूर्वक शुरू किया गया है। इसके अलावा, दक्षिण अमेरिका में भी 58 नॉट्स (knots) की गति से चलने वाली यात्री नावें चल रही हैं। कुछ साल पहले, महाराष्ट्र में भी ‘कोंकण शक्ति’, ‘कोंकण सेवक’ और ‘दमानिया कैटामरान’ जैसी यात्री जल परिवहन सेवाएं शुरू थीं। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में प्रगति करने वाला महाराष्ट्र इस मामले में पिछड़ गया और पुरानी व्यवस्था को भी बनाए नहीं रख सका। सड़क और पुलों के निर्माण से ठेकेदार पैसे ऐंठते हैं, और संबंधित पक्षों को टोल (पथकर) से भी अपना हिस्सा मिलता है। परिषद ने इस पत्र में एक जायज संदेह भी उठाया है कि क्या इन्ही आर्थिक हितों के कारण जानबूझकर जल परिवहन की अनदेखी की जा रही है।
इस पूरी स्थिति की पृष्ठभूमि में, हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं। मुंबई से मंगलुरु (कर्नाटक) तक ‘रो-पैक्स’ (Ro-Pax) यात्री जल परिवहन एक निश्चित समय सीमा के भीतर शुरू किया जाना चाहिए और आम नागरिकों के लिए एक किफायती यात्रा योजना तैयार कर उस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। यह स्वागत योग्य है कि सरकार व्यापार के दृष्टिकोण से बंदरगाहों का विकास कर रही है; लेकिन यात्री जल परिवहन शुरू करने से इन बंदरगाहों का पूरा उपयोग होगा। इससे आम लोग कम खर्च में और प्रदूषण मुक्त यात्रा का आनंद ले सकेंगे। इसलिए सरकार को इस मांग को प्राथमिकता देनी चाहिए, ऐसी अपेक्षा परिषद ने व्यक्त की है।








