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हातकणंगले (कोल्हापूर) : ‘लव जिहाद’ प्रकरण में पुलिस की अक्षम्य लापरवाही का हिन्दुत्वनिष्ठों का आरोप

  • हातकणंगले में सकल हिंदू समाज की प्रेस कॉन्फ्रेंस

  • पुलिस प्रशासन से न्याय नहीं मिलने पर आवश्यकता पड़ने पर ‘चौरंगा’ करने की चेतावनी

  • मराठा समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक लेखन की अनदेखी का भी आरोप

पत्रकार परिषद में (बाएं से): श्री निरंजन शिंदे, श्री शिवानंद स्वामी, श्री दीपक काटे, श्री प्रकाश बेलवाडे, श्री धवलसिंह मोहिते-पाटील, श्री संताजी बाबा घोरपड़े तथा श्री व्यंकटेश मोटे

कोल्हापुर : हातकणंगले (जिला कोल्हापुर) के कथित ‘लव जिहाद’ मामले में आरोपियों की आपराधिक मानसिकता स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद पुलिस ने ‘हेट क्राइम’ और सामाजिक वैमनस्य फैलाने से संबंधित कठोर कानूनी धाराएं लगाने के बजाय धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली धारा हटाने के लिए न्यायालय में आवेदन दिया। सकल हिंदू समाज ने आरोप लगाया कि पुलिस का यह रवैया आरोपियों को संरक्षण देने वाला और संदेहास्पद है।

संगठन ने कहा कि इस मामले के मुख्य संदिग्ध शाहिद सनदे और शाहरुख देसाई के बीच कथित रूप से “मराठा समाज की एक भी लड़की को नहीं छोड़ना है” जैसे संदेश उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस ने उन साक्ष्यों की अनदेखी की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी गई कि यदि इस मामले में पुलिस प्रशासन से न्याय नहीं मिला, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा किए गए न्याय की तर्ज पर आवश्यकता पड़ने पर ‘चौरंगा’ किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित प्रमुख लोग

इस अवसर पर अकलूज के सहकार क्षेत्र के नेता धवलसिंह मोहिते-पाटील, गर्जना संगठन के प्रकाश बेलवाडे, विजन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष संताजी बाबा घोरपड़े, नाशिक के व्यंकटेश मोटे, महाराजा प्रतिष्ठान के संस्थापक निरंजन शिंदे, हिंदू जनजागृति समिति के शिवानंद स्वामी, शिवधर्म फाउंडेशन के अध्यक्ष दीपक काटे तथा हिंदू एकता आंदोलन के शहर प्रमुख गजानन तोडकर उपस्थित थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

1..यह केवल एक युवती के साथ हुआ व्यक्तिगत अत्याचार नहीं है, बल्कि मराठा समाज की युवतियों को निशाना बनाकर उनकी अस्मिता को ठेस पहुंचाने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने की पूर्व नियोजित साजिश प्रतीत होती है।

2. पीड़िता के फोटो और वीडियो संबंधी जांच के दौरान कानून के अनुसार महिला पंचों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई।

3. आरोपियों के मोबाइल फोन से हटाए गए फोटो, वीडियो और चैट को पुनः प्राप्त करने के बजाय पुलिस ने सोशल मीडिया खातों को बंद कराने का अनुरोध संबंधित प्लेटफॉर्म से किया।

4. जिस लॉज में कथित घटना हुई, वहां के कर्मचारियों के समक्ष आरोपियों की कानूनी पहचान परेड नहीं कराई गई।

6\5. बलात्कार और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर ध्यान देने के बजाय पुलिस ने गौण बातों के साक्ष्य जुटाने में समय व्यतीत किया।

सकल हिंदू समाज की मांगें

  • सभी आरोपियों के विरुद्ध तत्काल मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई की जाए।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(8) के अंतर्गत सभी डिजिटल एवं सोशल मीडिया साक्ष्यों सहित तुरंत पूरक आरोपपत्र (Supplementary Chargesheet) दाखिल किया जाए।
  • जांच में लापरवाही या आरोपियों को जमानत मिलने में सहायता पहुंचाने वाले संबंधित जांच अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराई जाए।
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