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कोल्हापुर : संत बालूमामा मंदिर में 60 करोड़ रुपये के घोटाले की संदिग्ध आरोपी रागिनी खड़के फरार

कोल्हापुर: श्रीक्षेत्र आदमापुर स्थित संत बालूमामा मंदिर में 60 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में 55 लाख रुपये के गबन के आरोप में देवस्थान की तत्कालीन धर्मादाय निरीक्षक रागिनी खड़के सहित तीन लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होते ही रागिनी खड़के फरार हो गई हैं। अब इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को सौंप दी गई है। जांच दल ने मंदिर पहुंचकर वर्तमान और पूर्व ट्रस्टियों से जानकारी भी एकत्र की।

धर्मादाय आयुक्त कार्यालय के निरीक्षक राजेंद्र गडकरी ने इस संबंध में भुदरगढ़ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन धर्मादाय निरीक्षक रागिनी खड़के, संबंधित ट्रस्टी, व्यापारी, ठेकेदार तथा कुछ बिचौलियों ने आपसी मिलीभगत से देवस्थान और श्रद्धालुओं के साथ धोखाधड़ी की।

संत बालूमामा मंदिर को ‘मंदिर ट्रस्ट एक्ट’ के अंतर्गत लिया जाए – गोपीचंद पड़ळकर, भाजपा विधायक

इस मामले पर सांगली जिले के जत विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक गोपीचंद पड़ळकर ने कहा, “मंदिर में अनेक अनियमितताएं चल रही हैं। नियमों के अनुसार केवल बीमार भेड़ों की बिक्री की जा सकती है, लेकिन स्वस्थ भेड़ों की भी बिक्री की जा रही है। मंदिर में घोटाले करने वालों के कारण धर्म की बदनामी हो रही है। इसलिए पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान प्रबंधन समिति और पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति की तरह संत बालूमामा देवस्थान को भी ‘मंदिर ट्रस्ट एक्ट’ के अंतर्गत सरकार के नियंत्रण में लिया जाना चाहिए।”

संपादकीय टिप्पणी
राज्य में जिन मंदिरों का अब तक सरकारीकरण किया गया है, वहां समय-समय पर घोटाले, अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। साथ ही सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन की घटनाएं भी हुई हैं। ऐसे में मंदिरों का संचालन सरकार के बजाय श्रद्धालुओं के हाथों में रहना अधिक उचित माना जा सकता है।
— संपादक, हिंदू जनजागृति समिति
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