
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए ‘देवदूत’ बनने में सहायक यह प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण! – प्रा. स्नेहल कुलकर्णी, उपप्राचार्या (कनिष्ठ महाविद्यालय)
चिपलून – दुर्घटना होने पर व्यक्ति गंभीर पीड़ा में होता है। ऐसे समय में ‘देवदूत’ बनकर किसी का जीवन कैसे बचाया जाए, इसका अमूल्य ज्ञान इस प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) क्रैश कोर्स के माध्यम से दिया गया। यह अत्यंत मूल्यवान एवं मानवता की सेवा का कार्य है। प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह प्रशिक्षण सभी को निःशुल्क प्रदान किया गया। इसके लिए हिंदू जनजागृति समिति का आभार व्यक्त करते हुए कनिष्ठ महाविद्यालय की उपप्राचार्या प्रा. स्नेहल कुलकर्णी ने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों के हाथों मानवता की सेवा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थी इस क्षेत्र में अपना करियर भी बना सकते हैं तथा भविष्य में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी ऐसे प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा।
वे डी.बी.जे. महाविद्यालय में आयोजित 8 दिवसीय प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण वर्ग के समापन समारोह में बोल रही थीं।
इस युवा प्राथमिक उपचार क्रैश कोर्स अभियान का उद्देश्य युवाओं को प्राथमिक उपचार का ज्ञान देना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में उन्हें पूर्वसिद्ध बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान रोगी की नाड़ी और श्वास की जांच, प्राथमिक स्थिति का आकलन, हृदयाघात की स्थिति में सहायता, सीपीआर (छाती पर दबाव देना), दौरे (आकड़ी) की स्थिति में प्राथमिक उपचार, टखना मुड़ जाने पर उपचार, घाव पर ड्रेसिंग, लॉग रोल (Log Roll) तकनीक, तथा घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने जैसी अनेक परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही आपातकाल एवं युद्ध जैसी परिस्थितियों में आवश्यक पूर्वतैयारी की जानकारी भी प्रदान की गई।
यह प्रशिक्षण फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. (श्रीमती) शीतल माने तथा कान-नाक-गला विशेषज्ञ डॉ. (श्रीमती) साधना जरळी ने दिया। हिंदू जनजागृति समिति की श्रीमती श्वेता सालेकर एवं श्रीमती प्रिया अष्टेकर ने प्रशिक्षण में सहयोग किया। यह प्रशिक्षण 11वीं कला संकाय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया था। समापन अवसर पर समिति के श्री सुरेश शिंदे ने ‘संभावित आपातकाल में प्राथमिक उपचार का महत्व’ विषय पर मार्गदर्शन किया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय की उपप्राचार्या प्रा. स्नेहल कुलकर्णी, प्रा. पालशेतकर, समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहयोग दिया।
अभिमत
प्रा. अविनाश पालशेतकर, एन.एस.एस. कार्यक्रम अधिकारी, डी.बी.जे. महाविद्यालय, चिपलून : “घायल व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए जो अमूल्य ‘स्वर्णिम समय’ (Golden Hour) होता है, उसमें क्या और कैसे करना चाहिए, इसका अत्यंत उपयोगी प्रशिक्षण इस वर्ग में दिया गया। स्ट्रेचर का उपयोग, बैंडेज बाँधना तथा ड्रेसिंग करना जैसी व्यावहारिक बातें विद्यार्थियों ने सीखी। इसके लिए महाविद्यालय की ओर से हिंदू जनजागृति समिति का हार्दिक आभार।”
विशेष
1. महाविद्यालय में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए भी इसी प्रकार के प्राथमिक उपचार क्रैश कोर्स का आयोजन किया जाएगा।
2. प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने तथा नियमित अभ्यास के लिए सप्ताह में एक दिन, एक घंटे का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने की मांग कुछ छात्राओं ने की है। इस मांग के अनुसार भविष्य में नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
3. प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों ने स्वयं विभिन्न प्राथमिक उपचार तकनीकों का अभ्यास कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।








