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‘सूचना अधिकार’ को न माननेवाले श्री विठ्ठल-रुक्मिणी देवस्थान समिति के अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करें !

  • सूचना अधिकार विधि के लागू होते हुए भी जानकारी न दिए जाने का प्रकरण

  • श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर संरक्षण क्रियान्वयन समिति की ओर से मंदिर व्यवस्थापक को निवेदन


पंढरपुर : श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर देवस्थान समिति विधिजन्य पद्धति से शासन के नियंत्रण में है । अतः सूचना अधिकार विधि इस देवस्थान समिति को लागू होती है । उसके अनुसार देवस्थान समिति के संकेतस्थलपर सूचना अधिकार विधि के अनुच्छेद ४ के अनुसार जानकारी (प्रकटन) रखना अनिवार्य था; किंतु मंदिर समिति के अधिकारियों ने यह मंदिर समिति सूचना अधिकार की कार्यकक्षा में नहीं आती, ऐसा झूठ बोलकर जानकारी देना टाल दिया । इस प्रकार से झूठ बोलकर भक्तों का दिशाभ्रम कर उन्हें जानकारी न देनेवाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए; इस मांग को लेकर श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर संरिक्षण क्रियान्वयन समिति की ओर से श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति के व्यवस्थापक श्री. बालाजी पुदलवाड को ज्ञापन सौंपा गया । इस समय उनके साथ की गई चर्चा में उन्होंने उद्दंडता से उत्तर दिए ।
इस अवसरपर श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर संरक्षण क्रियान्वयन समिति के सचिव श्री. गणेश लंके, वारकरी पाईक संघ के प्रवक्ता ह.भ.प. वीर महाराज, हिन्दू महासभा के अध्यक्ष श्री. बाळकृष्ण डिंगरे, हिन्दू महासभा के सदस्य सर्वश्री संजय कवडे, विलास देशमुख, कपिल बिरडेकर, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता संगठक नीलेश सांगोलकर, सनातन संस्था के श्री. मोहन लोखंडे, श्री. हीरालाल तिवारी, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. शशिशेखर पाटिल आदि उपस्थित थे ।

इस ज्ञापन में आगे कहा गया है कि,

१. अभीतक श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर संरक्षण कृति समितिसहित अनेक लोगों ने सूचना अधिकार का उपयोग कर मंदिर समिति के संदर्भ में जानकारी प्राप्त की है; किंतु पिछले कुछ समय से यह जानकारी देना बंद किया गया है ।

२. यह जानकारी देने के पीछे एक तो मंदिर समिति की प्रशासनिक समिति के अधिकारी भ्रष्ट हैं, साथ ही उन्हें जानकारी देनी नहीं है अथवा ये अधिकारी अकार्यक्षम हैं और विधि का कठोरता से पालन नहीं करते, यह कारण प्रतीत होता है ।

३. श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति को सूचना अधिकार का क्रियान्वयन कर बिना किसी बाधा के जानकारी देनी चाहिए ।

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