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स्वा. सावरकरजी के विचारों को यदि वास्तव में लाया जाता, तो हिन्दुत्व की ओर तेढी दृष्टि से देखने का किसी में साहस नहीं होता – श्री. शरद पोंक्षे

ठाणे (महाराष्ट्र) : स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी के विचारों को यदि वास्तव में लाया जाता, तो, हिन्दुत्व की ओर वक्र दृष्टि से देखने का किसी में साहस नहीं होता ! जाति-पातियों में बंटा हुआ समाज देश के सामने एक बडी चुनौती है। लोगों को जातियों में उलझा कर हिन्दुओं का विभाजन किया जा रहा है। अतः हिन्दू धर्म पर हो रहे आघातों को रोकने हेतु जातियों में न उलझते हुए केवल एक ‘हिन्दू’ के रूप में संघटित होईये !

ऐसा आवाहन अभिनेता श्री. शरद पोंक्षे ने हाल ही में ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में किया। सुयश कला-क्रीडा मंडल की ओर से श्री सिद्धीविनायक मंदिर के प्रांगण में आयोजित ‘सुयश व्याख्यानमाला’ में श्री. पोंक्षे बोल रहे थे।

‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर दर्शन’ इस संदर्भपर संबोधित करते हुए श्री. पोंक्षे ने कहा कि, इस देश में गांधी एवं नेहरू को बडा बनाने की ‘हूड’ में शौर्य से भरे इतिहास को दफनाया गया। अबतक यह देश गांधी की विचारधारा के अनुसार चला, अब उसे स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी की विचारधारा के अनुसार चलाकर देखिये। स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी के विचार ही इस देश को आगे ले जाएंगे !

श्री. पोंक्षे ने इस समय खेद व्यक्त करते हुए कहा कि, काँग्रेस शासनद्वारा क्रांतिकारकों का अनादर करने का एक भी अवसर नहीं गंवाया गया !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

 

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