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मंदिरों को ‘अवैध’ ठहराकर तोडने का शासकीय उपक्रम तत्काल बंद करें ! – भाजपा एवं शिवसेना विधायकोंद्वारा विधिमंडल में मांग

विधानसभा में भाजपा विधायक की ओर से प्रधान सचिव को एवं विधान परिषद में शिवसेना विधायक की ओर से सभापति को ‘लक्ष्यवेधी’ सूचना प्रविष्ट ! – श्री. श्रीकांत पिसोळकर

नागपुर : महापालिकाद्वारा पूरे राज्य एवं नई मुंबई तथा अकोला नगर मे पिछले १ वर्ष से अतिक्रमण के नाम पर मंदिर तोडने का ‘धडल्ला’ आरंभ किया गया है !

शासनद्वारा मंदिर तोडने से पूर्व संबंधित मंदिरों को कोई नोटिस अथवा पूर्वसूचना नहीं दी जाती। मंदिर तोडने के कारण नागरिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। मंदिरों को ध्वस्त करने का यह शासकीय उपक्रम तत्काल बंद करने हेतु भाजपा के विधायक ने ८ दिसंबर को विधानसभा में लक्षवेधी सूचना प्रविष्ट की है। इस संदर्भ में उचित अवसर पर मुद्दा अकोला-वाशिम के शिवसेना के विधायक श्री. गोपीकिशन बाजोरीया ने ९ दिसंबर को विधान परिषद में प्रस्तुत किया एवं सभापति श्री. रामराजे नाईक-निंबाळकर ने यह सूत्र प्रविष्ट कर लिया।

श्री. गोवर्धन शर्मा, डॉ. संजय कुटे, श्री. आकाश फुंडकर एवं श्रीमती मंदा म्हात्रे आदि भाजपा विधायकोंद्वारा नियम १०५ के अनुसार विधानसभा में प्रविष्ट ‘लक्ष्यवेधी’ सूचना में कहा गया है कि राज्य की पहचान संत राज्य के रूप में है। महाराष्ट्र में हिन्दू धर्मियों के विविध पंथ एवं संप्रदाय हैं। इसके ही परिणाम के रूप में राज्य में धार्मिक एवं सात्विक वातावरण है। इसलिए सर्वसाधारण नागरिकोंद्वारा लोकवर्गणी से मंदिरों का निर्माण किया जाता है; परंतु सर्वोच्च न्यायालय के नाम पर राज्य में एवं अकोला नगर में मंदिरों को तोडा जा रहा है। इस माध्यम से नागरिकों की भावनाओं को आहत करने की घटनाएं हो रही हैं। इसलिए ऐसी कार्यवाही को तत्काल बंद करने हेतु शासन को उचित कार्रवाई कर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

शिवसेना के श्री. बाजोरीया ने विधान परिषद में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के नाम का उपयोग कर राज्य के मंदिर तोडे जा रहें हैं। शासन की ओर से वर्तमान में तोडे जानेवाले मंदिर यातायात में किसी प्रकार की अडचन लानेवाले एवं मार्ग में आनेवाले भी नहीं हैं। इसलिए यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरोध में की जा रही है।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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