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शैक्षणिक संस्थानों में ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया’ को अभियान आयोजित करने पर रोक लगाने की हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की मांग

राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की शिक्षा विभाग से मांग

शिक्षा विभाग के निदेशक शैलेश झिंगडे को ज्ञापन (निवेदन) देते हुए, बाईं ओर से सर्वश्री रामदास सावईवेरेकर, अरविंद कुमार, देवीदास गावकर, विनोद वारखंडकर, सत्यविजय नाईक, जयेश थली और श्री सूजन नाईक

पणजी – केंद्र सरकार ने ‘जमात-ए-इस्लामी-हिंद’ इस कट्टरपंथी संगठन पर पहले ही प्रतिबंध लगाया है। इस संगठन के छात्र विभाग ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया’ को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में अभियान चलाने पर प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने 18 नवंबर को शिक्षा विभाग के निदेशक शैलेश झिंगडे और उच्च शिक्षा निदेशालय के निदेशक भूषण सावईकर को एक ज्ञापन देकर की है।

इस अवसर पर समिति के प्रतिनिधिमंडल में ‘गोमंतक मंदिर महासंघ’ के सचिव श्री जयेश थळी, सेवानिवृत्त कप्तान अरविंदकुमार, ‘गोवा हिंदू युवा शक्ति’ के श्री सूजन नाईक और श्री विनोद वारखंडकर; ‘भारत माता की जय’ संगठन के श्री रामदास सावैवेरेकर, हिंदू जनजागृति समिति के श्री देवीदास गावकर और हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री सत्यविजय नाईक उपस्थित थे।

इस निवेदन में समिति ने कहा है, “स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधि गोवा के कई शैक्षणिक संस्थानों से संपर्क कर रहे हैं और ‘स्टूडेंट्स चैलेंजेस’ (छात्रों के समक्ष चुनौतियां), ‘एथिकल वैल्यूज’ (नैतिक मूल्य) तथा ‘रिस्पॉन्सिबल सिटीजनशिप’ (जिम्मेदार नागरिक बनना) जैसे विषयों पर सत्र आयोजित करने की बात कह रहे हैं। देश की जांच एजेंसियों की पूर्व जांच में इस संगठन का तुर्किये के ‘टर्किश यूथ फेडरेशन’ नामक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन से संबंध सामने आया है।”

इस संगठन ने इसी वर्ष फरवरी में दाबोली, वास्को स्थित ‘केशव स्मृति स्कूल’ तथा बायना सरकारी हाई स्कूल के हिंदू छात्रों को बिना उचित अनुमति मस्जिद में ले जाकर वहां कार्यशाला आयोजित की थी। जब इस घटना को वहां के अभिभावकों ने उजागर किया, तब ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने इसका तीव्र विरोध किया था। इसके बाद संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई थी।

स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया जैसे धर्मांध संगठन परामर्श, व्यक्तित्व विकास आदि नामों के बहाने छात्रों में इस्लामी कट्टरपंथ फैला रहे हैं।

दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विस्फोट में शामिल आतंकी समूह द्वारा युवकों को लक्ष्य बनाने के खतरों पर भी प्रकाश पड़ा है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श जैसे संवेदनशील विषयों पर मार्गदर्शन देने के लिए केवल मान्यता प्राप्त एवं विशेषज्ञ व्यक्तियों को ही सत्र आयोजित करने की अनुमति देना आवश्यक है।

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