स्कूलों और कॉलेजों में ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया’ (एसआईओ) अथवा अन्य बाहरी संगठनों के कार्यक्रमों से संबंधित दिशा-निर्देशों का मामला

पणजी : गोवा सरकार के शिक्षा विभाग ने कुछ दिन पहले स्कूलों और कॉलेजों में ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया’ (एसआईओ) तथा अन्य बाहरी संगठनों के कार्यक्रमों को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस परिपत्र का गोवा फॉरवर्ड, एसआईओ, कांग्रेस आदि ने विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी। विरोध के बाद शिक्षा निदेशालय ने 17 जुलाई को नया परिपत्र जारी कर पूर्व आदेश वापस लेने की घोषणा की।
एसआईओ की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया था कि किसी भी बाहरी संस्था को स्कूल या कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पुलिस ने भी शैक्षणिक संस्थानों में एसआईओ के कुछ कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताई थी और इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की थी। इसी पृष्ठभूमि में यह परिपत्र जारी किया गया था।
हालांकि, गोवा फॉरवर्ड के विधायक विजय सरदेसाई ने इस परिपत्र का विरोध करते हुए इसे शैक्षणिक संस्थाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया। एसआईओ ने भी इसे असामाजिक और राष्ट्रविरोधी बताते हुए विरोध किया। अंततः शिक्षा विभाग द्वारा परिपत्र वापस लेने के बाद विधायक विजय सरदेसाई ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे नागरिकों की जीत बताया।
शिक्षा विभाग ने आखिर किसके दबाव में निर्णय वापस लिया? – नितिन फळदेसाई, अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, गोवा
अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, गोवा के अध्यक्ष नितिन फळदेसाई ने कहा कि स्कूलों में बाहरी संस्थाओं, संगठनों या व्यक्तियों के कार्यक्रमों के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य करने वाले दिशा-निर्देश वापस लेने से सरकार की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा, “यह निर्णय विद्यार्थियों के हित, स्कूलों के सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और बाहरी हस्तक्षेप पर आवश्यक निगरानी सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था। फिर कुछ ही दिनों में सरकार ने इसे वापस क्यों लिया? सरकार यह स्पष्ट करे कि वह किसके दबाव में झुकी? स्कूल किसी भी प्रकार के वैचारिक, राजनीतिक या धार्मिक प्रचार का मंच नहीं बनने चाहिए। बाहरी संस्थाओं और वक्ताओं की जांच का विरोध करने वालों का उद्देश्य क्या है? विद्यार्थियों के हित से अधिक दबाव की राजनीति को प्राथमिकता देना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
सरकार निर्णय पर पुनर्विचार करे – हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने कहा कि स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) की विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। समिति के अनुसार, एसआईओ ने गोवा के कुछ स्कूलों में ‘मस्जिद दर्शन’ कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें हिंदू विद्यार्थियों को मस्जिद ले जाकर बुर्का पहनना, नमाज़ पढ़ना और वज़ू करना जैसी गतिविधियों में शामिल कराया गया।
समिति ने यह भी कहा कि दो दिन पहले भाग्यनगर (हैदराबाद) में एक मुस्लिम शिक्षक द्वारा अधिकांश हिंदू विद्यार्थियों को ‘कलमा’ लिखकर लाने का गृहकार्य दिए जाने की घटना सामने आई थी। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति चिंताजनक है। विद्यार्थियों में किसी भी प्रकार का कट्टरपंथ, राष्ट्रविरोधी या समाजविघातक विचार न पनपे, इसके लिए ऐसी संस्थाओं के प्रवेश पर नियंत्रण आवश्यक था। राजनीतिक लाभ के लिए कुछ दलों द्वारा विरोध किए जाने के बाद सरकार का पीछे हटना दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति ने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार कर स्कूलों में धार्मिक तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों को अनुमति न देने की मांग की।
17 जुलाई
गोवा का शिक्षा विभाग स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (एस.आई.ओ.) को लेकर सतर्क

पणजी – गोवा शिक्षा विभाग ने स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एस.आई.ओ.) अथवा इसी प्रकार के संगठनों को विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के संबंध में एक परिपत्र जारी कर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परिपत्र में कहा गया है कि एस.आई.ओ. की विचारधारा और गतिविधियां समाजविरोधी एवं राष्ट्रविरोधी प्रतीत होने के कारण यह संगठन गोवा सहित देशभर में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की निगरानी में है। राष्ट्र की सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस संगठन की विचारधारा पर अंकुश लगाने हेतु यह कदम उठाया गया है।
उत्तर गोवा के जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा संचालनालय को भेजे गए पत्र के आधार पर यह परिपत्र जारी किया गया है। इससे पूर्व १८ नवंबर २०२५ को हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने शिक्षा निदेशक श्री शैलेश झिंगड़े तथा उच्च शिक्षा संचालनालय के निदेशक श्री भूषण सावईकर को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि एस.आई.ओ. केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी-हिंद के छात्र संगठन के रूप में कार्य करता है, इसलिए राज्य की शैक्षणिक संस्थाओं में इसकी गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
(संपादकीय टिप्पणी : नवंबर २०२५ में मांग किए जाने के बावजूद ८ महीने बाद यह परिपत्र जारी होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस अवधि में संगठन ने कितनी गतिविधियां संचालित की होंगी और इसके लिए उत्तरदायी कौन है?)
गोवा पुलिस की विशेष शाखा ने भी राज्य की कुछ शैक्षणिक संस्थाओं में एस.आई.ओ. के कार्यक्रमों को लेकर चिंता व्यक्त की है। पुलिस के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों से राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है।
Good Decision by Goa CM !!
Goa schools can no longer invite outside speakers without approval
Direction citing a police report regarding concerns raised about the ideological influence and activities of “Students Islamic Organisation of India (SIO)”.@DrPramodPSawant @dip_goa…
— 🚩 Ramesh Shinde 🇮🇳 (@Ramesh_hjs) July 15, 2026
परिपत्र में जारी प्रमुख निर्देश
१. किसी भी बाहरी व्यक्ति, संस्था अथवा संगठन को विद्यार्थियों के साथ संवाद, व्याख्यान, संगोष्ठी, जनजागरण कार्यक्रम अथवा अन्य गतिविधि आयोजित करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी की लिखित पूर्वानुमति लेना अनिवार्य होगा।
२. विद्यालयों में सांप्रदायिक स्वरूप का ज्ञान देना अथवा शिक्षा से असंबंधित गतिविधियां आयोजित करना गोवा स्कूल शिक्षा अधिनियम, १९८४ एवं नियम, १९८६ के प्रावधानों के विरुद्ध है।
३. यदि विद्यालय में किसी बाहरी व्यक्ति अथवा संस्था की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस तथा शिक्षा संचालनालय को देना आवश्यक होगा। साथ ही प्रत्येक विद्यालय को बाहरी आगंतुकों एवं आयोजित कार्यक्रमों का पृथक अभिलेख रखना होगा।
४. अनुमोदित प्रत्येक कार्यक्रम के दौरान संबंधित विद्यालय का उत्तरदायी शिक्षक अथवा प्राध्यापक उपस्थित रहेगा। कार्यक्रम के विषय संविधानिक मूल्यों एवं सार्वजनिक व्यवस्था की मर्यादा के अनुरूप रहें, यह सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी होगी।
५. शिक्षा संचालनालय के विभागीय अधिकारी समय-समय पर इन निर्देशों के पालन की समीक्षा करेंगे तथा नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने एस.आई.ओ. के संबंध में क्या कहा था?
नवंबर २०२५ में शिक्षा विभाग को सौंपे गए ज्ञापन में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने कहा था कि एस.आई.ओ. के प्रतिनिधि गोवा की अनेक शैक्षणिक संस्थाओं से संपर्क कर ‘स्टूडेंट चैलेंजेस’, ‘एथिकल वैल्यूज़’ तथा ‘रिस्पॉन्सिबल सिटिजनशिप’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दे रहे हैं।
समिति ने यह भी दावा किया था कि एस.आई.ओ. के तुर्की स्थित टर्किश यूथ फेडरेशन नामक कट्टरपंथी संगठन से संबंध होने की बात देश की जांच एजेंसियों की जांच में सामने आई है। ज्ञापन के अनुसार, इसी वर्ष फरवरी में एस.आई.ओ. ने दाबोली (वास्को) स्थित केशव स्मृति विद्यालय तथा बायणा सरकारी हाई स्कूल के हिंदू विद्यार्थियों को आवश्यक अनुमति के बिना मस्जिद ले जाकर कार्यशाला आयोजित की थी। अभिभावकों द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने इसका विरोध किया था, जिसके पश्चात संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया था कि एस.आई.ओ. जैसी कट्टरपंथी संस्थाएं परामर्श, व्यक्तित्व विकास आदि आकर्षक नामों के माध्यम से विद्यार्थियों में कट्टरता फैलाने का प्रयास करती हैं। साथ ही, १० नवंबर को दिल्ली में बम विस्फोट से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के प्रकरण का उल्लेख करते हुए युवाओं को निशाना बनाए जाने के खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
19 नवंबर
शैक्षणिक संस्थानों में ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया’ को अभियान आयोजित करने पर रोक लगाने की हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की मांग
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की शिक्षा विभाग से मांग

पणजी – केंद्र सरकार ने ‘जमात-ए-इस्लामी-हिंद’ इस कट्टरपंथी संगठन पर पहले ही प्रतिबंध लगाया है। इस संगठन के छात्र विभाग ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया’ को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में अभियान चलाने पर प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने 18 नवंबर को शिक्षा विभाग के निदेशक शैलेश झिंगडे और उच्च शिक्षा निदेशालय के निदेशक भूषण सावईकर को एक ज्ञापन देकर की है।
इस अवसर पर समिति के प्रतिनिधिमंडल में ‘गोमंतक मंदिर महासंघ’ के सचिव श्री जयेश थळी, सेवानिवृत्त कप्तान अरविंदकुमार, ‘गोवा हिंदू युवा शक्ति’ के श्री सूजन नाईक और श्री विनोद वारखंडकर; ‘भारत माता की जय’ संगठन के श्री रामदास सावैवेरेकर, हिंदू जनजागृति समिति के श्री देवीदास गावकर और हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री सत्यविजय नाईक उपस्थित थे।
Hindu Rashtra Coordination Committee appeals to Education Department
Impose immediate ban on activities of the ‘Students Islamic Organisation of India’ in educational institutions in Goa!@HinduJagrutiOrg pic.twitter.com/j5oLCzji0f— Satyavijay Naik (@naik_satya77414) November 19, 2025
इस निवेदन में समिति ने कहा है, “स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के प्रतिनिधि गोवा के कई शैक्षणिक संस्थानों से संपर्क कर रहे हैं और ‘स्टूडेंट्स चैलेंजेस’ (छात्रों के समक्ष चुनौतियां), ‘एथिकल वैल्यूज’ (नैतिक मूल्य) तथा ‘रिस्पॉन्सिबल सिटीजनशिप’ (जिम्मेदार नागरिक बनना) जैसे विषयों पर सत्र आयोजित करने की बात कह रहे हैं। देश की जांच एजेंसियों की पूर्व जांच में इस संगठन का तुर्किये के ‘टर्किश यूथ फेडरेशन’ नामक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन से संबंध सामने आया है।”

इस संगठन ने इसी वर्ष फरवरी में दाबोली, वास्को स्थित ‘केशव स्मृति स्कूल’ तथा बायना सरकारी हाई स्कूल के हिंदू छात्रों को बिना उचित अनुमति मस्जिद में ले जाकर वहां कार्यशाला आयोजित की थी। जब इस घटना को वहां के अभिभावकों ने उजागर किया, तब ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने इसका तीव्र विरोध किया था। इसके बाद संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई थी।
स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया जैसे धर्मांध संगठन परामर्श, व्यक्तित्व विकास आदि नामों के बहाने छात्रों में इस्लामी कट्टरपंथ फैला रहे हैं।
दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विस्फोट में शामिल आतंकी समूह द्वारा युवकों को लक्ष्य बनाने के खतरों पर भी प्रकाश पड़ा है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श जैसे संवेदनशील विषयों पर मार्गदर्शन देने के लिए केवल मान्यता प्राप्त एवं विशेषज्ञ व्यक्तियों को ही सत्र आयोजित करने की अनुमति देना आवश्यक है।








