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महाराष्ट्र : वेरूळ के श्री घृष्णेश्वर शिवलिंग पर बिल्वपत्र तथा फूल के अतिरिक्त अन्य वनस्पति अर्पण करने के लिए प्रशासन की ओर से पाबंदी

धर्मशिक्षा के अभाव के कारण शिवलिंग पर अन्य वनस्पति अर्पण करने की हिन्दुओंद्वारा की जानेवाली अनुचित कृती !

Grishneshwar-Jyotirlinga-Maharashtra

वेरूळ : यहां का विश्वविख्यात ज्योतिर्लिंग श्री घृष्णेश्वर मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पर बिल्वपत्र तथा फूल के अतिरिक्त अन्य वृक्षों के पत्ते अपर्ण करने के लिए प्रशासनद्वारा ६ जुलाई से प्रतिबन्ध लगाया गया है।

पुलिस प्रशासन तथा भारतीय पुरातत्व विभाग को इस संदर्भ में कार्रवाई करने की सूचना दी गई है। अशुद्ध दुध तथा अन्य वृक्षों के पत्तों के उपयोग के संदर्भ में संभाजीनगर के डॉ. भांबरे ने संभाजीनगर के जनपदाधिकारी की ओर परिवाद प्रविष्ट किया था। इसी दृष्टि से ५ जुलाई को बैठक का आयोजन किया गया था।

इस बैठक के लिए तहसिलदार श्री. बालाजी शेवाळे, भारतीय पुरातत्व विभाग के श्री. हेमंत हुकुरे, सहाय्यक पुलिस निरीक्षक श्रीमती कल्पना राठोड, श्री घृष्णेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री. दीपक शुक्ला गुरु तथा डॉ. भांबरे के साथ अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

तहसिलदार श्री. बालाजी शेवाळे ने बताया कि, ‘बिल्वपत्र तथा फूल के विक्रेता श्रद्धालुओं को अन्य वनस्पति के पत्ते शिवलिंग पर अर्पण करने के लिए बेचते थे। अतः मंदिर की पवित्रता धोखे में आई थी, साथ ही यह बात भी निदर्शन में आई है कि, अर्पण किए गए पत्ते एक बार अर्पण करने के पश्चात श्रद्धालुओं को पुनः विक्रय किए जाते हैं; इसलिए यह कार्रवाई की गई है। इस में बिल्वपत्र तथा फूल अर्पण करने की अनुमती है !’

साथ ही उपस्थित लोगों ने यह सूचना भी की है कि, ‘दुग्ध तथा जलाभिषेक पूजा कर सकते हैं; किंतु दुग्धाभिषेक के लिए अच्छे दूध का उपयोग करना चाहिए। एक बार अर्पण किया गया मिलावटी दूध दुबारा ज्योतिर्लिंग पर अर्पण नहीं करें !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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