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‘पुणे सार्वजनिक सभा’ द्वारा अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर को ‘सार्वजनिक काका पुरस्कार’ प्रदान

(बाएँ से) श्री शरद गर्भे, श्री विद्याधर नारगोलकर, पुरस्कार ग्रहण करते हुए अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर तथा वरिष्ठ विधीज्ञ नंदू फडके

पुणे : ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले संगठन ‘पुणे सार्वजनिक सभा’ की ओर से हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर को वरिष्ठ अधिवक्ता नंदू फड़के के हाथों ‘सार्वजनिक काका पुरस्कार’ प्रदान किया गया। हिन्दू धर्म पर विभिन्न माध्यमों से होने वाले आघातों के विरोध में कानूनी लड़ाई लड़कर हिन्दुत्व की रक्षा का व्यापक कार्य करने के लिए उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

सार्वजनिक काका पुरस्कार समारोह में उपस्थित जनसमुदाय

इस अवसर पर पुणे सार्वजनिक सभा के अध्यक्ष श्री. विद्याधर नारगोलकर, कार्यवाहक श्री. शरद गर्भे, कार्याध्यक्ष श्री. अनिल शिदोरे एवं अन्य पदाधिकारी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे सहित अनेक राष्ट्र-धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। तदुपरांत पुरस्कार का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में प्रतिवर्ष की भांति कुछ होनहार विद्यार्थियों को आर्थिक छात्रवृत्ति देकर उनका सत्कार किया गया। श्री. अनिल शिदोरे ने पुणे सार्वजनिक सभा का इतिहास बताते हुए संगठन के कार्य की जानकारी दी। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता नंदू फड़के और श्री. रमेश शिंदे का भी सत्कार किया गया। इसके पश्चात् उपस्थित मान्यवरों ने अपने विचार व्यक्त किए। श्री. विद्याधर नारगोलकर ने दोनों अधिवक्ताओं की विशेषताएं बताते हुए यह प्रतिपादन किया कि ‘पुणे सार्वजनिक सभा को आगामी समय में राष्ट्र और धर्म का कार्य करते समय यदि विधिक सहायता की आवश्यकता पड़ी, तो दोनों अधिवक्ता सदैव तत्पर रहेंगे’। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन और वन्दे मातरम् गायन के साथ हुआ।

देश में रहकर देशविरोधी कार्य करने वाले छिपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें ! – श्री. नंदू फड़के

वरिष्ठ विधीज्ञ नंदू फडके (मध्य में) का सम्मान करते हुए श्री विद्याधर नारगोलकर, अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, श्री अनिल शिदोरे तथा श्री शरद गर्भे

“आज भारत में हुआ सीजेपी (CJP) का आंदोलन एक गंभीर घटना है। देशविरोधी नारे लगाने वाले, तथा अश्लील और अमर्यादित टिप्पणी करने वाले इन युवाओं को देखकर राष्ट्रभक्त नागरिक चिंतित हैं। स्वतंत्रता के पश्चात् आई सरकारों ने शांतिप्रिय समाज के प्रति हमेशा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। कई दशकों तक हिन्दुओं का बुद्धिभेद किया गया। इन सभी बातों के कारण ही आज यह संकट हमारे सामने खड़ा है। देश में रहकर देशविरोधी कार्य करने वाले छिपे हुए शत्रुओं से आप सावधान रहें। इस देशद्रोही विचारधारा को नष्ट करने के लिए हिन्दुओं को संगठित आंदोलन खड़ा करना होगा।”

भावी पीढ़ी अधिवक्ता क्षेत्र में आकर राष्ट्र और धर्म की रक्षा करे ! – वीरेंद्र इचलकरंजीकर

“मुझे मिला यह पुरस्कार उन सभी के लिए है, जो हिन्दुत्व की रक्षा के लिए विधिक क्षेत्र में प्राणपण से लड़ रहे हैं। उनके प्रतिनिधि के रूप में यद्यपि मैं यह पुरस्कार स्वीकार कर रहा हूं, तथापि इस पुरस्कार से मुझ पर राष्ट्र और धर्म की रक्षा का दायित्व और अधिक बढ़ गया है। आज देशभर में फैले वैचारिक आतंकवाद के विरुद्ध हमें लड़ना होगा और ‘कानून’ (विधि) एक बहुत बड़ा हथियार है। हिन्दुओं पर होने वाले आघातों की बारंबारता को देखते हुए हिन्दुत्व के लिए लड़ने वाले अधिवक्ताओं की संख्या हजारो में बढ़नी चाहिए। इस कार्यक्रम के निमित्त मैं यह आवाहन करता हूं कि, जिन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है, वे और कुल मिलाकर भावी पीढ़ी अधिवक्ता क्षेत्र में आकर राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा करे।”

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