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पुणे के महात्मा फुले वाडा में वट पूर्णिमा उत्साहपूर्वक मनाई गई

हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के संघर्ष को मिली बडी सफलता

पूजन के अवसर पर उपस्थित महिलाएं

पुणे – यहां स्थित ऐतिहासिक महात्मा फुले वाडा में इस वर्ष वट पूर्णिमा अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा वटवृक्ष पूजन पर लगाई गई रोक प्रशासन को वापस लेनी पड़ी, जिसके कारण इस आयोजन को विजय का स्वरूप प्राप्त हुआ।

इससे पूर्व पुरातत्व विभाग ने फुले वाडा में पारंपरिक वट पूजन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। इस निर्णय के विरुद्ध हिंदू जनजागृति समिति, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति, विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी, स्थानीय महिलाओं तथा अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के संयुक्त प्रयासों के फलस्वरूप पुरातत्व विभाग ने यह प्रतिबंध वापस ले लिया।

वट पूर्णिमा के अवसर पर स्थानीय महिलाओं ने महात्मा फुले वाडा में पहुंचकर विधिपूर्वक वटवृक्ष की पूजा की। इस अवसर पर भाजपा की सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी, रणरागिणी शाखा की महिलाएं, सकल हिंदू समाज तथा स्थानीय नगरसेविकाओं सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित सभी लोगों ने इसे “धार्मिक स्वतंत्रता की विजय” बताया।

‘सकल हिंदू समाज’ तथा ‘महात्मा फुले वाडा परिसर भगिनी मंडल’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया।

हिंदू पर्व प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं! – सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी

सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने कहा कि वट पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है। वटवृक्ष की नई जड़ों का विकसित होना और उसका दीर्घजीवी होना परिवार की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। नागपंचमी, बैलपोला जैसे पर्व भी प्रकृति संरक्षण और सेवा का संदेश देते हैं।

सनातन धर्म में वटवृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है! – श्रीमती उज्ज्वला गौड़

भारतीय महिला मोर्चा, पुणे शहर की महामंत्री श्रीमती उज्ज्वला गौड़ ने कहा कि सनातन धर्म में वटवृक्ष को भगवान श्रीविष्णु का स्वरूप माना जाता है। इसी श्रद्धा के कारण सभी महिलाओं ने एकत्र होकर अत्यंत हर्षोल्लास के साथ वटवृक्ष का पूजन किया।

पूजन के पश्चात उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी का सम्मान किया। इसके बाद श्रीमती मेधा कुलकर्णी ने दुर्गा वाहिनी की श्रीमती कार्तिकी परदेशी, हिंदू जनजागृति समिति की कु. क्रांति पेटकर तथा अन्य कार्यकर्ताओं का सम्मान किया। सनातन संस्था की साधिकाओं ने श्रीमती मेधा कुलकर्णी की ओटी भरकर उनका पारंपरिक सम्मान भी किया।

यह संगठित प्रयासों की सफलता है! – कु. क्रांति पेटकर

रणरागिणी शाखा की कु. क्रांति पेटकर ने कहा कि पुरातत्व विभाग के आदेश के बाद स्थानीय महिलाओं, हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों और सांसद श्रीमती मेधा कुलकर्णी के संगठित प्रयासों के कारण इस वर्ष पुनः महात्मा फुले वाडा में वट पूर्णिमा का पूजन बड़े उत्साह से संपन्न हो सका।

सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी का सम्मान करते हुए कु. क्रांति पेटकर

विशेष

पुणे पूर्व विभाग दुर्गा वाहिनी की संयोजिका श्रीमती कार्तिकी परदेशी की इस पूरे आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही।

हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने इस प्रकरण में तथाकथित ‘तुगलकी’ आदेश जारी करने तथा हिंदुओं को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाले पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।


26 जून

‘महात्मा फुले वाडा’ में वट पूजा पर लगा प्रतिबंध हटाया; हिंदू जनजागृति समिति सहित हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के संघर्ष को सफलता

पुणे के ऐतिहासिक ‘महात्मा फुले वाड़ा’ परिसर में वटवृक्ष की पूजा पर पुरातत्व विभाग द्वारा लगाया गया प्रतिबंध अंततः सरकार द्वारा वापस ले लिया गया है। हिंदू जनजागृति समिति, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति, सुराज्य अभियान और रणरागिणी शाखा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुरातत्व विभाग, पुलिस प्रशासन और पुणे महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर इस संभावित प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की थी। इन संगठित प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है और प्रशासन को अपना निर्णय बदलना पड़ा है।

ज्ञापन में कहा गया था कि यह हिंदू महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों पर आघात है। हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के इस तीव्र आंदोलन और मांगों का संज्ञान लेते हुए, पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. विलास वाहने ने खड़क पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि, ‘‘महात्मा फुले वाड़ा स्मारक के राज्य संरक्षित घोषित होने से पहले के समय से चली आ रही परंपराओं और रीति-रिवाजों की यथास्थिति बनाए रखी जाए। साथ ही, वट पूर्णिमा के दिन कानून-व्यवस्था अबाधित रहे, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।’’

प्रतिबंध लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? – श्री रमेश शिंदे

इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने फुले वाड़ा के सामने स्थित वटवृक्ष पर चल रही वटसावित्री व्रत की पारंपरिक पूजा को रोकने का एक ‘तुगलकी’ (तानाशाही) आदेश जारी किया था। हिंदू जनजागृति समिति द्वारा किए गए विरोध और अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए कानूनी नोटिस के कारण, उन्हें लोकतंत्र का अहसास हुआ। यह स्वीकार करते हुए कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता है, उन्होंने उस तुगलकी आदेश को वापस ले लिया है। इसके लिए फडणवीस सरकार का अभिनंदन; लेकिन इस मामले में सरकार से यह मांग है कि वह हिंदुओं को अकारण परेशान करने का प्रयास करने वाले और जानबूझकर बाधा उत्पन्न करने वाले पुरातत्व विभाग के संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि उन्हें यह अहसास हो सके कि वर्तमान में महाराष्ट्र में ऐसा तुगलकी प्रशासन नहीं चलेगा।

इस सफलता के बाद, समिति की ओर से श्री रमेश शिंदे ने आवाहन किया है कि, ‘‘अधिक से अधिक हिंदू महिलाएं महात्मा फुले वाड़ा में एकत्र हों और उत्साहपूर्वक वटवृक्ष की पूजा करें, अपनी धार्मिक परंपरा को संजोएं और इस जीत का आनंद मनाएं।’’


19 जून

पुणे : महात्मा फुले वाडे के सामने स्थित वटवृक्ष की पूजा पर प्रतिबंध लगाने वाला निर्णय वापस लें – हिन्दू जनजागृति समिति

समिति की ज्ञापन के माध्यम से मांग

पुरातत्व विभाग के हेमंत गोसावी को ज्ञापन सौंपते हुए कु. क्रांति पेटकर एवं अन्य मान्यवर

पुणे – गंज पेठ स्थित ऐतिहासिक महात्मा फुले वाड़ा स्मारक के सामने स्थित वटवृक्ष की पूजा पर पुरातत्व विभाग द्वारा लगाया गया प्रतिबंध हिन्दू महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत प्राप्त धार्मिक आचरण के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। इसलिए यह प्रतिबंध बिना किसी शर्त के तत्काल वापस लिया जाए तथा 29 जून को महिलाओं को वटवृक्ष पूजन की विधिवत अनुमति देकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। इन मांगों का ज्ञापन हिन्दू जनजागृति समिति, हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति, सुराज्य अभियान और रणरागिणी शाखा के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पुरातत्व विभाग तथा महापालिका आयुक्त कार्यालय को सौंपा गया।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री सचिन घुले, रणरागिणी शाखा की कु. क्रांति पेटकर, सुराज्य अभियान के श्री सुरेंद्र महाजन, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री कृष्णाजी पाटील तथा अन्य संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

पुरातत्व विभाग के श्री हेमंत गोसावी ने बताया कि इस विषय पर दोनों पक्षों की संस्थाओं के ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। उनमें प्रस्तुत बिंदुओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इस विषय पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। दोनों पक्षों के विचारों का विस्तृत अध्ययन कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

प्रशासन का हिन्दू-विरोधी दोहरा रवैया !

राज्य के किलों एवं दुर्गों पर बने अवैध मजारों और अनधिकृत निर्माणों को हटाने के विषय में पुरातत्व विभाग पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है, जबकि हिन्दुओं की सैकड़ों वर्षों पुरानी शांतिपूर्ण परंपरा का विरोध करने के लिए असाधारण तत्परता दिखाई जा रही है।

यदि प्रशासन वटपूजन की परंपरा को रोककर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, तो सभी श्रद्धालुओं और हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को साथ लेकर राज्यव्यापी तीव्र आंदोलन चलाया जाएगा, ऐसी चेतावनी समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संयोजक श्री सुनील घनवट ने दी है।

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