१९ लोगों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत

मदुरई (तमिलनाडु) – यहां के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर से संबद्ध एक धर्मार्थ संस्था की १.७९ एकड भूमि हडपने का प्रकरण प्रकाश में आया है । इस भूमि का मूल्य अनुमानतः ६० करोड रुपये बताया जा रहा है । पुलिस की अपराध शाखा ने इस प्रकरण में १९ लोगों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया है । अभियुक्तों ने भूमि के कूट रचित (बनावट) अंतरण , पंजीयन तथा बंधक (गहना) व्यवहारों के माध्यम से भूमि हडपी । यह कार्रवाई मंदिर के संयुक्त आयुक्त एवं कार्यकारी अधिकारी सेल्लादुरई, तथा भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ‘अरापोर अय्यक्कम’ की शिकायत पर की गई है ।
The Central Crime Branch (CCB), Madurai, has registered a First Information Report (FIR) against 19 persons following a complaint lodged by the Joint Commissioner of the Arulmigu Meenakshi Sundareswarar Temple.
According to the complaint, the accused allegedly conspired to…
— ANI (@ANI) July 29, 2026
तहसीलदार पर भूमि हडपने का आरोप
इस प्रकरण में आरोप है कि , २४ जून २०१६ को तत्कालीन मदुरै उत्तर तहसीलदार अनबझगन ने शासकीय अभिलेखों से मंदिर के स्वामित्व की प्रविष्टि हटा दी । उन्होंने अवैध रूप से भूमि का पट्टा ९ लोगों के नाम स्थानांतरित कर दिया । राजस्व विभागीय अधिकारी ने तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया । भूमि मंदिर न्यास की संपत्ति है, यह बताते हुए पट्टा पुनः मंदिर के नाम करने का निर्देश दिया । इस प्रकरण में मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई खंडपीठ में भी अभियोग (मुकदमा) चल रहा है । इस खंडपीठ ने अंतरिम स्थगनादेश (अंतरिम स्टे) दिया है ।
न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके बंधक पत्र निर्मित किया !
न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके भी १६ अप्रैल २०२० के दिन थूथुकुडी जिले के मुराप्पनडु उप-निबंधक कार्यालय में तत्कालीन उप-निबंधक अनंतरामन की सहायता से ‘जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी’ (किसी व्यक्ति को अपने पक्ष से विविध विधि-सम्मत, वित्तीय अथवा प्रशासनिक कार्य करने का अधिकार देने वाला वैधानिक प्रलेख) पंजीकृत किया गया, ऐसा आरोप है । इस आधार पर १९ जुलाई २०२१ के दिन डिंडीगुल जिले के वडा मदुरई उप-निबंधक कार्यालय में तत्कालीन उप-निबंधक प्रशांत संथान करुप्पन के माध्यम से बंधक पत्र भी पंजीकृत करवा लिया गया । अभियुक्तों ने विधि-सम्मत प्रतिबंधों का उल्लंघन करके कूट रचित पट्टा अंतरण एवं बंधक व्यवहार के माध्यम से मंदिर की भूमि पर नियंत्रण करने का प्रयास किया ।








