
मुंबई : हिंदू जनजागृति समिति द्वारा देशभर के 64 स्थानों पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर समिति ने आगामी वैश्विक युद्ध और संभावित आपातकालीन परिस्थितियों की आशंका को देखते हुए हिंदुओं से तकनीक और उपकरणों पर निर्भरता कम करने तथा प्राथमिक उपचार, अग्निशमन और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करने का आवाहन किया। महोत्सव में वक्ताओं ने “हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए संघर्ष और साधना की दिशा” विषय पर ओजस्वी विचार व्यक्त किए।




महोत्सव के अंतर्गत व्यास पूजन तथा परात्पर गुरु भक्तराज महाराज के चित्र का पूजन (गुरुपूजन), रामराज्य की स्थापना हेतु संकल्प एवं नामजप, धर्मरक्षकों और हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान, राष्ट्रभक्त एवं धर्मनिष्ठ वक्ताओं का मार्गदर्शन, आत्मरक्षा की सरल तकनीकों का प्रदर्शन तथा समिति के प्रेरणास्रोत सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के कार्य पर आधारित लघु चलचित्र का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर धर्मरक्षा एवं हिंदू हितों के लिए कार्यरत अनेक व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।
🚩 सातारा येथे @HinduJagrutiOrg आयोजित गुरुपौर्णिमा महोत्सव उत्साहात संपन्न झाला.
७०० हून धर्माभिमानी हिंदूंनी सहभाग घेत भारताला रामराज्यरूपी हिंदू राष्ट्र बनविण्याचा दृढ संकल्प !#GuruShishyaParampara #gurupournima2026#satara pic.twitter.com/TV9jLTjFQS
— Hemant Sonavane (@hemant_hjs) July 29, 2026
गुरुपूर्णिमा के पावन अवसरपर #फरीदाबाद एवं #मथुरा में आयोजित ‘हर घर योद्धा’ अभियानके अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओंका प्रदर्शन !#आत्मरक्षा केवल एक कौशल नहीं,बल्कि स्वाभिमान,सुरक्षा और संस्कारका सशक्त माध्यम है। सक्षम युवा ही सुरक्षित समाजका निर्माण करते हैं।#GuruPurnima #SelfDefence pic.twitter.com/LL8vLRnKin
— HJS_Delhi-NCR (@HJS_Delhi) July 30, 2026
हिंदुओं से ‘स्वबोध’ और ‘शत्रुबोध’ जागृत कर धर्मरक्षा के लिए संगठित होने का आवाहन

आज धर्म पर होने वाले आघात केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज और परिवारों तक पहुंच चुके हैं। ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘वक्फ बोर्ड के अतिक्रमण’ तथा हाल ही में चर्चा में आए ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे माध्यमों से हिंदू समाज को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
जब तक हिंदू समाज ‘स्वबोध’ (अपने धर्म, शक्ति और कर्तव्य का ज्ञान) तथा ‘शत्रुबोध’ (विरोधी शक्तियों की रणनीतियों की पहचान) विकसित नहीं करेगा, तब तक इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना कठिन होगा। इसलिए हिंदुओं से केवल दर्शक बने रहने के बजाय धर्मरक्षा के लिए संगठित होकर सक्रिय भूमिका निभाने का आवाहन समिति ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव के माध्यम से किया गया।








