सोमेश्वर संस्थान की 50 करोड़ की जमीन महज 960 रुपये में हड़पने का अवैध आदेश आखिरकार रद्द!
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उपविभागीय अधिकारी द्वारा अवैध आदेश अंततः रद्द!
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अमरावती के ऐतिहासिक सोमेश्वर महादेव मंदिर का स्वामित्व अधिकार सुरक्षित!

अमरावती : यहां के भाजीबाजार इलाके में स्थित श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान के स्वामित्व अधिकार वाली, बाज़ार भाव के अनुसार करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की 12 एकड़ (4.85 हेक्टेयर) प्राइम लोकेशन की कृषि भूमि को ‘काश्तकारी कानून’ (Tenancy Act) के तहत कब्जेदार सुमन रामरतन कोठार के नाम पर केवल 960 रुपये में देने का अमरावती के तत्कालीन तहसीलदार विजय लोखंडे का 26 सितंबर 2024 का अवैध आदेश उपविभागीय अधिकारी (SDO), अमरावती ने पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह जानकारी मंदिर महासंघ के राज्य कोर कमेटी पदाधिकारी श्री अनुप जायसवाल ने एक पत्रकार वार्ता में दी।
इस पत्रकार वार्ता में मंदिर महासंघ के विदर्भ समन्वयक श्री श्रीकांतजी पिसोलकर, सावंगा विठोबा संस्थान के सचिव श्री अशोकजी सोनवाल, जिला समन्वयक श्री सचिन वैद्य, श्रीराम मंदिर के ट्रस्टी श्री हरिभाऊ नानवटकर, श्री विष्णु संस्थान के श्री मनोज वानखड़े, श्री सूरज वानखड़े, डॉ. चंद्रशेखर गिरी, सोमेश्वर संस्थान के ट्रस्टी श्री अमोल इंगोले, श्री रवींद्र डहाके व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
मूल सुनवाई के दौरान तहसीलदार ने न तो कोई सबूत या गवाही दर्ज की थी, न ही जिरह (Cross-examination) की और अपील की समय बाकी रहते हुए ही जल्दबाज़ी में बिक्री प्रमाणपत्र (Sale Certificate) जारी कर दिया था। इसके अलावा धर्मदाय आयुक्त से भी कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। यह गंभीर मामला महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राज्य पदाधिकारी श्री अनुप जायसवाल के ध्यान में आने पर महासंघ ने इस बिक्री आदेश का कड़ा विरोध किया। तदुपरांत, संस्थान की ओर से श्री रवींद्र डहाके, अमोल इंगोले व अन्य ट्रस्टियों ने उपविभागीय अधिकारी के पास अपील दायर की।
चूंकि यह कृषि भूमि अमरावती महानगर पालिका की सीमा में आती है, इसलिए ‘काश्तकारी अधिनियम’ के प्रावधानों के अनुसार इस पर काश्तकारी कानून लागू ही नहीं होता। उपविभागीय अधिकारी के न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से संस्थान को 21 अगस्त 1969 को जारी किए गए ‘छूट प्रमाणपत्र’ की प्रति प्रस्तुत की गई। श्री सोमेश्वर संस्थान ‘मुंबई सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम’ के तहत विधिवत पंजीकृत है और संस्थान के पास काश्तकारी कानून से मिली छूट का प्रमाणपत्र भी उपलब्ध है। इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए उपविभागीय अधिकारी ने संस्थान की अपील को मंज़ूर किया और 8 जुलाई 2026 को तहसीलदार के उस अवैध आदेश को रद्द कर दिया। इस मामले में संस्थान की ओर से एडवोकेट रमन जायसवाल ने, जबकि कब्जेदार सुमन रामरतन कोठार की ओर से एडवोकेट ऋषि छाबड़ा ने पैरवी की।
यह बहुमूल्य कृषि भूमि मनपा सीमा में होने और इसका बाज़ार मूल्य 50 करोड़ के करीब होने के कारण, सुनवाई के दौरान संबंधित बिल्डर लॉबी प्रशासनिक स्तर पर अत्यधिक सक्रिय दिखाई दी थी। लेकिन, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने इस मामले में राज्य स्तर पर लगातार पैरवी कर प्रशासन पर नैतिक दबाव बनाया, जिससे बिल्डर लॉबी के मंसूबों को नाकाम करने में बड़ी सफलता मिली। इस निर्णय में श्री अनुप जायसवाल सहित संस्थान के ट्रस्टी रवींद्र डहाके और अमोल इंगोले ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
“देवस्थान और मंदिरों की ज़मीनों पर बुरी नज़र रखने वाली बिल्डर लॉबी और अवैध काम करने वाले अधिकारियों के लिए यह एक कड़ा तमाचा है। मंदिर की एक इंच ज़मीन भी किसी को हड़पने नहीं दी जाएगी।” – श्री सुनील घनवट (राष्ट्रीय संगठक, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ)
इस निर्णय से पूरे इलाके में हर्ष का माहौल है और मंदिरों व भक्तों के न्याय के लिए कार्यरत महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के कार्यों की चौतरफा सराहना हो रही है।
17 मार्च
अमरावती में श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान की कृषिभूमि देवस्थान के नाम पर पुन: होगी – महाराष्ट्र मंदिर महासंघ
अमरावती में पत्रकार परिषद
तहसीलदारों पर कार्रवाई करने की और गैरकानूनी प्रकरण निबटाने के लिए महाराष्ट्र में ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’की मांग !

अमरावती – श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान, अमरावती, ता.जि. अमरावती धार्मिक संस्थान की कृषिभूमि हडपने के उद्देश्य से सुमन कोठार ने तहसीलदार के समक्ष उसे खरीदने की अर्ज की थी । तहसीलदार विजय सुखदेव लोखंडे ने कानून का उल्लंघन करते हुए संस्थान के प्राथमिक आक्षेप अर्ज पर निर्णय न लेते हुए संस्थान की लगभग ५० करोड रुपयों की भूमि ९६० रुपयों में देने का गैरकानूनी आदेश २६ सितंबर २०२४ को दिया । संपूर्ण प्रकरण की सखोल पूछताछ न करते हुए निर्णय देनेवाले इन अधिकारियों पर कार्रवाई हो । ऐसे दोषी अधिकारियों को दंड होने के लिए ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’की आवश्यकता है, ऐसा मत मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने व्यक्त किया । वे यहां हुई पत्रकार परिषद में बोल रहे थे । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्री. श्रीकांत पिसोळकर, राज्य कोर कमिटी के पदाधिकारी श्री. अनुप जयस्वाल, जिला संयोजक श्री. कैलाश पनपालिया, श्री. विनीत पाखोडे, आशिष मारूडकर, मंदिर विश्वस्त गजानन जवंजाळ, हिन्दू जनजागृति समिति के जिला समन्वयक श्री. नीलेश टवलारे उपस्थित थे ।
श्री. सुनील घनवट बोले,…
१. गैरकानूनी आदेश पारित करने के अगले दिन खरीदी की प्रविष्टी की गई । तहसीलदार ने संस्थान की कृषिभूमि के प्रकरण में अनियमितता कर गैरकानूनी हस्तांतरण का प्रयत्न किया । इससे संस्थान एवं भक्तगणों के साथ विश्वासघात हुआ है । उन्होंने पद का दुरुपयोग कर कानून का उल्लंघन किया । मंदिर महासंघ की ओर से इस प्रकरण में परिवाद किया गया ।
२. महानगरपालिका के अंतर्गत होने से कानून की धारा ६० के अनुसार इस भूमि पर कुल कानून लागू नहीं होता ।
३. श्री सोमेश्वर संस्थान, अमरावती पर कानून के अनुसार छूट प्रमाणपत्र प्राप्त होने से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयनुसार छूट प्रमाणपत्र प्राप्त ट्रस्ट को कुल कानून लागू नहीं होता ।
तहसीलदार का आदेश निरस्त कर कृषिभूमि के ७/१२ उतारे में संस्थान का नाम पूर्ववत् करने के विषय में, इसके साथ ही तहसीलदारों द्वारा मंदिर प्रकरण में अनियमितता करने से उन पर दायित्व निश्चित कर कार्रवाई करने के लिए मंदिर महासंघ की ओर से तक्रार अर्ज विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी एवं उपविभागीय अधिकारी, अमरावती को प्रस्तुत किया गया है । इसकी जानकारी मंदिर महासंघ के महाराष्ट्र पदाधिकारी श्री. अनुप जयस्वाल ने पत्रकार परिषद में दी ।
4 अक्टूबर 2024
अमरावती स्थित श्री सोमेश्वर संस्थान की 50 करोड़ की जमीन 960 रुपये में बेची गई!
मंदिरों की जमीनों को हड़पने वाले तहसीलदार और सभी दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करें! – ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ की मांग

अमरावती स्थित श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान की 50 करोड़ रुपये की जमीन तहसीलदार के अवैध आदेश से मात्र 960 रुपये में बेची गई, यह एक गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ इस मामले की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि इस मामले में तुरंत तहसीलदार और सभी संबंधित दोषियों की जांच कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
क्या है मामला
श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान, अमरावती, ता.जि. अमरावती की धार्मिक संस्थान की मालिकी की मौजा-पेठ अमरावती, ता. जि. अमरावती में सर्वे नंबर 94, क्षेत्रफल 4 हेक्टेयर 85 आर की खेती योग्य जमीन है। इस जमीन को हड़पने के उद्देश्य से सुमन कोठार नामक व्यक्ति ने तहसीलदार, अमरावती के समक्ष उक्त जमीन खरीदने के लिए आवेदन किया था। तहसीलदार विजय सुखदेव लोखंडे ने कुल कानून की धाराओं का उल्लंघन करते हुए संस्थान के प्राथमिक आपत्ति आवेदन को नकारते हुए बिना किसी प्रमाण या गवाही के, संस्थान की 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को मात्र 960 रुपये में खरीदने का अवैध आदेश जारी किया। यह आदेश 26.09.2024 को पारित किया गया और अगले ही दिन 27.09.2024 को अपील की अवधि समाप्त होने से पहले ही खरीदी भी दर्ज कर ली गई।


तहसीलदार विजय सुखदेव लोखंडे ने श्री सोमेश्वर संस्थान की जमीन के मामले में अनियमितता करके अवैध रूप से संस्थान की जमीन का हस्तांतरण करने की कोशिश की है। इससे संस्थान और उसके भक्तों के साथ गंभीर धोखाधड़ी हुई है। तहसीलदार विजय लोखंडे ने अपने पद का दुरुपयोग कर इस मामले में अवैध रूप से प्रक्रिया चलाई और कुल कानून की कानूनी धाराओं और सरकारी सर्कुलर का उल्लंघन किया। इसमें स्थानीय बिल्डर लॉबी की भी संलिप्तता नजर आती है, जो जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। इसलिए, तहसीलदार विजय सुखदेव लोखंडे के खिलाफ सेवा, अनुशासन और कानून के तहत विभागीय जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ऐसी मांग ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ ने की है। ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ के राज्य कोर कमिटी पदाधिकारी श्री अनुप जयस्वाल और महासंघ के जिला निमंत्रक श्री कैलाश पनपालिया ने इस बारे में विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और उपविभागीय अधिकारी, अमरावती के पास शिकायत दर्ज कराई है। अगर तहसीलदार विजय लोखंडे और अन्य दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो मंदिर महासंघ की ओर से सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, ऐसा महासंघ ने चेतावनी दी है।








