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बेंगलुरु में हिंदू जनजागृति समिति का ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ पर जनजागृति कार्यक्रम संपन्न

“कॉर्पोरेट जिहाद : मिथक और वास्तविकता” विषय कार्यक्रम

बेंगलुरु – हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा 16 मई को बेंगलुरु में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गईं।

हिंदू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री मोहन गौड़ा ने कहा कि, 711 ईस्वी से प्रारंभ हुई आक्रामक जिहादी मानसिकता आज ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और अब ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे अनेक रूपों में दिखाई दे रही है।

बसवनगुड़ी स्थित सत्यप्रमोद कल्याण मंडप में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री गौड़ा ने कहा कि “विजन 2047” और “गजवा-ए-हिंद” जैसे एजेंडों के माध्यम से भारत की एकता को कमजोर करने तथा जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि, टीसीएस में कार्यरत हिंदू महिला कर्मचारियों को पिछले 6 वर्षों से गंभीर उत्पीडन का सामना करना पड़ रहा है। पदोन्नति के लिए नमाज़ पढ़ने का दबाव, वेतनवृद्धि के लिए गोमांस खाने का दबाव तथा हिंदू देवी-देवताओं के अपमान को सहन करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

श्री गौड़ा ने “बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित” अभियान के माध्यम से हिंदू समाज एवं महिलाओं की सुरक्षा हेतु व्यापक जनजागृति की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि, हिंदू समाज को दो प्रकार की जागरूकता की आवश्यकता है – पहला ‘स्वबोध’, अर्थात अपनी गौरवशाली संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूकता एवं गर्व; तथा दूसरा ‘शत्रुबोध’, अर्थात समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों की पहचान करने की समझ।

बच्चों में हिंदू संस्कार एवं परंपराओं का संवर्धन आवश्यक – भव्या गौडा, रणरागिनी शाखा

हिंदू जनजागृति समिति की रणरागिनी शाखा की कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्रीमती भव्या गौड़ा ने महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए हुब्बली सहित अन्य क्षेत्रों की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के मित्र, मोबाइल फोन उपयोग तथा सामाजिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया और महिला आयोग व संबंधित अधिकारियों से कठोर कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने बच्चों में हिंदू संस्कृति, मूल्य एवं धार्मिक परंपराओं के संस्कार विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीडन की शिकायत के लिए हेल्पलाइन शुरू करने की मांग

क्लिनिकल रिसर्च विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रूपा गणेश ने कॉर्पोरेट कार्यस्थलों पर होने वाले अप्रत्यक्ष धार्मिक दबाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों की प्रथाओं का पालन करने तथा नमाज़ में भाग लेने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं का उपहास, हिंदू संतों के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियां तथा हिंदू संस्कृति के प्रति अनादर बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। साथ ही कर्मचारियों को धार्मिक उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत दर्ज कराने हेतु अलग हेल्पलाइन या शिकायत तंत्र स्थापित करने की मांग की।

पीडितों को कानूनी, सामाजिक एवं मानसिक समर्थन देने के लिए मजबूत मंच की आवश्यकता – शकुंतला अय्यर

स्टार्टअप बास्केट की सह-संस्थापक एवं इको-विशेषज्ञ श्रीमती शकुंतला अय्यर ने कहा कि, कट्टरपंथी प्रभाव धीरे-धीरे कॉर्पोरेट, शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में बढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर परिवार व्यवस्था, संस्कृति और धार्मिक परंपराएं कमजोर की जा रही हैं।

उन्होंने महानगरों में युवाओं का पारिवारिक मार्गदर्शन एवं सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होना चिंताजनक बताया। श्रीमती अय्यर ने कहा कि, ऐसी घटनाओं को छिपाने की अपेक्षा समाज के सामने खुलकर चर्चा होनी चाहिए तथा पीड़ितों को कानूनी, सामाजिक और मानसिक सहायता प्रदान करने के लिए एक सशक्त मंच तैयार किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में 300 से अधिक धर्मप्रेमी हिंदुओं की उपस्थिति

कार्यक्रम का समापन हिंदू समाज को संगठित एवं सतर्क रहने के आवाहन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक धर्मप्रेमी हिंदू उपस्थित थे।

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