रत्नागिरी जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत

रत्नागिरी, महाराष्ट्र – कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक से हटाए गए मराठा साम्राज्य के नक्शे को तत्काल पुनः शामिल करने की मांग का ज्ञापन देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के सचिव के नाम पर 17 अप्रैल को यहां के जिलाधिकारी मनोज जिंदल को सौंपा गया।
इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के गोविंद भारद्वाज, गणपत निवळकर, छगनलाल चव्हाण, अरविंद बारस्कर, संजय पावस्कर, संजय जोशी, मंगेश राऊत और अमितराज खटावकर उपस्थित थे।
ज्ञापन में कहा गया है कि, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.) ने कक्षा 8 की ‘हमारे अतीत’ नामक समाजशास्त्र की पुस्तक से मराठा साम्राज्य का विस्तार दर्शाने वाला नक्शा हटा दिया है। यह केवल एक शैक्षणिक त्रुटि नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने का प्रयास है।
आगे कहा गया है कि, छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य केवल एक क्षेत्रीय सत्ता नहीं थी, बल्कि विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध एक सांस्कृतिक और नैतिक क्रांति थी। इसलिए इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी मांग की गई है कि यदि एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों में अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ, किले या क्रांतिकारियों की जानकारी भी हटाई गई हो, तो उन्हें तुरंत पुनः शामिल किया जाए तथा संपूर्ण पाठ्यपुस्तकों का विशेषज्ञों द्वारा पुनरावलोकन किया जाए।
सांगली में 1 मई को एनसीईआरटी के विरोध में ‘मराठा साम्राज्य सम्मान’ राज्यव्यापी मोर्चा

सांगली – एनसीईआरटी के कथित इतिहास-विरोधी निर्णय के विरोध में सांगली में 1 मई को ‘मराठा साम्राज्य सम्मान’ राज्यव्यापी मोर्चा निकाला जाएगा। यह मोर्चा श्री शिवप्रतिष्ठान युवा हिंदुस्थान द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
इस मोर्चे में उदयनराजे भोसले, शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, संभाजीराजे भोसले सहित विभिन्न मराठा सरदारों के वंशज और इतिहासकारों को आमंत्रित किया गया है। यह जानकारी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष नितीन चौगुले ने दी।
उन्होंने बताया कि संगठन हर वर्ष ‘हिंदवी स्वराज्य सेना के पराक्रम’ को दर्शाने वाली ऐतिहासिक यात्राएं आयोजित करता है, जो पहले पानीपत, गोलकोंडा, सूरत और गोवा में हो चुकी हैं।
मोर्चे का मुख्य कारण कक्षा 8 की इतिहास पुस्तक से वर्ष 1759 में मराठा साम्राज्य के विस्तार को दर्शाने वाला नक्शा हटाया जाना है। इस निर्णय का विभिन्न इतिहासकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने विरोध किया है।
नितीन चौगुले ने कहा कि 1759–1760 के कालखंड में मराठा साम्राज्य का प्रभाव उत्तर भारत में अटक तक फैला था और राजस्थान, मालवा, बुंदेलखंड, दिल्ली व पंजाब तक मराठों का वर्चस्व था, जिसके प्रमाण ऐतिहासिक दस्तावेजों में उपलब्ध हैं।
उन्होंने मांग की कि 1759 का नक्शा तुरंत पुनः शामिल किया जाए, इतिहासकारों की स्वतंत्र समिति गठित की जाए और केंद्र सरकार इस विषय में हस्तक्षेप कर स्पष्टीकरण दे। अन्यथा 1 मई के मोर्चे के बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आवश्यक होने पर न्यायालयीन लड़ाई भी लड़ी जाएगी।








