सातारा

सातारा – कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक में छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन (एकेरी) में उल्लेख कर उनका अपमान किया गया है। इतना ही नहीं, बल्कि इस पुस्तक में अनेक घटनाओं को इतिहास का विकृतिकरण करके गलत रूप में प्रस्तुत किया गया है, ऐसा आरोप लगाया गया।
इसी कारण इस पुस्तक पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए और संबंधित व्यक्तियों/संस्थाओं पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, इस मांग को लेकर ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आंदोलन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। आंदोलन के बाद जिलाधिकारी संतोष पाटील को ज्ञापन सौंपा गया।
इस दौरान हिंदू महासभा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष अधिवक्ता दत्तात्रय सणस, कार्यकारिणी सदस्य उमेश गांधी, पाटीदार समाज के जयंतीभाई पटेल और रामजीभाई पटेल, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष विजय गाढवे, पूर्व शहराध्यक्ष जितेंद्र वाडेकर, सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक संगठन के राजकुमार सावंत, श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान के प्रदीप साळवे, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के अधिवक्ता जनार्दन कर्पे, हिंदू जनजागृती समिति की सौ. भक्ती डाफळे, सुरेश पंडित, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के हेमंत सोनवणे और शंकर पवार सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं ने आंदोलन को संबोधित भी किया।
“छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन में उल्लेख करने वाले प्रकाशक पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए!” – विजय गाढवे
विजय गाढवे ने कहा कि ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज की पूरी तरह गलत छवि प्रस्तुत की गई है। महाराज का ‘एकेरी उल्लेख’ न हटाने वाले प्रकाशक और संबंधित संस्था पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना और महापुरुषों का अपमान) तथा धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाकर सामाजिक शांति भंग करना) के अंतर्गत आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।
साथ ही, ई-कॉमर्स वेबसाइटों और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इस पुस्तक की डिजिटल प्रतियां और पीडीएफ को साइबर कानूनों के तहत ब्लॉक करने की भी मांग की गई।
सोलापूर

27 अपैल
ईश्वरपुर (जिला सांगली) में ‘शिवाजी कौन था?’ पुस्तक का वाचन हिंदुत्वनिष्ठों ने रुकवाया!

ईश्वरपुर (जिला सांगली) – यहां छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने 25 अप्रैल को प्रगतिशील संगठनों की ओर से कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित और अत्यंत विवादित मानी जाने वाली पुस्तक ‘शिवाजी कौन था?’ के वाचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर एकत्र हो गए और उन्होंने इस वाचन का तीव्र विरोध किया। उत्पन्न तनाव को देखते हुए पुलिस ने मध्यस्थता की और अंततः यह कार्यक्रम बंद करवा दिया गया।
इस दौरान हिंदुत्वनिष्ठों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रश्न किया कि महाराज की प्रतिमा के सामने इस प्रकार के “गलत इतिहास” का वाचन करके धार्मिक और सामाजिक सौहार्द क्यों बिगाड़ा जा रहा है? इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई। हिंदुत्वनिष्ठों का बढ़ता विरोध देखकर पुलिस ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद प्रगतिशील कार्यकर्ताओं को वाचन रोकना पड़ा।
इस अवसर पर श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान के अविनाश जाधव, शेखर खांडेकर तथा अन्य हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ता जैसे प्रवीण परीट, अमोल ठाणेकर, अक्षय पाटील, बबलू जाधव आदि सहित धारकरी उपस्थित थे।
वहीं प्रगतिशील संगठनों की ओर से कॉ. धनाजी गुरव, संजय बनसोडे, प्रो. शामराव पाटील, शाकीर तांबोळी, डॉ. सुदाम माने, डॉ. काशिलिंग गावडे, अजित हवलदार, उमेश शेवाळे, प्रो. बी.आर. जाधव आदि उपस्थित थे।
२५ अपैल
कोल्हापुर

कोल्हापुर : कॉ. गोविंद पानसरे द्वारा लिखित पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता?’ में छत्रपति शिवाजी महाराज का एकेरी (अपमानजनक) उल्लेख करने और इतिहास का विकृतीकरण करने का आरोप लगाते हुए, हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति की ओर से कोल्हापुर के शिवाजी चौक पर तीव्र प्रदर्शन किए गए। इस पुस्तक के माध्यम से महाराज के गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने विकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। गलत और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला इतिहास बताने वाली इस पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर समस्त हिंदुत्वनिष्ठों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन स्वीकार करने के बाद पुलिस उपाधीक्षक प्रिया पाटिल और अपर पुलिस अधीक्षक धीरजकुमार बच्चू ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
‘शिवाजी कोण होता?’ इस पुस्तक में दावा किया गया है कि ‘भवानी देवी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को तलवार नहीं दी थी’ और “हिंदू धर्म के प्रति निष्ठा के कारण शिवाजी को सफलता मिली, यह सच नहीं है”। ये दावे ऐतिहासिक प्रमाणों के पूर्णतः विपरीत हैं। साथ ही ‘हिंदवी स्वराज्य’ महाराज की अपनी इच्छा थी, इस मूलभूत विचार को भी पुस्तक में नकारा गया है। यह प्रकार हिंदू अस्मिता के आधार स्तंभ महापुरुषों का ‘वैचारिक दमन’ करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। राजमाता जिजाबाई ने महाराज को रामायण-महाभारत जैसे धर्मग्रंथों की कथाएं सुनाकर उन्हें मुगलों के विरुद्ध लड़ने के लिए तैयार किया था। इसी कारण छत्रपति शिवाजी महाराज ने पांच पातशाहियों को उखाड़ फेंका, मुगलों को यमलोक भेजा और अनेक स्थानों पर मंदिरों का निर्माण कराया। वे हिंदुओं के राजा बने, जबकि इस पुस्तक के माध्यम से उनकी पूर्णतः गलत छवि बनाने का प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर शिवसेना के उपजिल्हाप्रमुख श्री किशोर घाटगे, भाजपा के श्री महेश जाधव, हिंदू एकता आंदोलन के शहराध्यक्ष श्री गजानन तोडकर, शिवशाही फाउंडेशन के संस्थापक श्री सुनील सामंत, आरोग्य भारती की वैद्या अश्विनी मालकर, सनातन संस्था के डॉ. मानसिंग शिंदे, महाराजा प्रतिष्ठान के संस्थापक श्री निरंजन शिंदे, हिंदु जनजागृति समिति के श्री शिवानंद स्वामी, उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष के उपजिल्हाप्रमुख श्री संभाजीराव भोकरे, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री अशोक गुरव, हिंदु महासभा महिला आघाडी की शीलाताई माने, हिंदु राष्ट्र समन्वय समिती के श्री रामभाऊ मेथे और अन्य मान्यवर बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
आंदोलकों ने सरकार से इस पुस्तक की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि महाराज का अपमानजनक उल्लेख न हटाने वाले प्रकाशकों और संबंधित संस्थाओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 196 के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। साथ ही, महाराष्ट्र सरकार इतिहास विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति नियुक्त कर पुस्तक के प्रत्येक विवादास्पद बयान का अध्ययन करे और ई-कॉमर्स साइट्स (अमेज़न, फ्लिपकार्ट) पर उपलब्ध डिजिटल प्रतियों व पीडीएफ लिंक्स को साइबर कानून के तहत ब्लॉक करे।








