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मुंबई के प्रांतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन में हिंदू राष्ट्र के लिए संगठित रूप से कार्य करने का 100 से अधिक हिंदुत्वनिष्ठों का संकल्प

  • हिंदू हित के लिए हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रमुख, मंदिर ट्रस्टी, अधिवक्ता, डॉक्टर, उद्यमी, प्राध्यापक और विचारक हुए एकजुट

  • मान्यवरों के हाथों सनातन संस्था की पुस्तक ‘कौटुंबिक धार्मिक कृती और सामाजिक कृती’ के अमेज़न पर ई-बुक संस्करण का लोकार्पण

बाएं से – सद्गुरु अनुराधा वाडेकर, भार्गवश्री बी.पी. सचिनवाला, श्री अभय वर्तक और डॉ. उदय धुरी

मुंबई – बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीडन, भारत में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, देवताओं का अपमान, लव जिहाद, धर्मांतरण, गोहत्या जैसे हिंदू धर्म पर हो रहे विभिन्न आघातों के विरोध में संगठन बनाकर हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए मुंबई के मुलुंड (पश्चिम) स्थित पद्मावती बैंक्वेट हॉल में 22 मार्च को प्रांतीय हिंदू राष्ट्र अधिवेशन आयोजित किया गया।

इस अधिवेशन का उद्घाटन परशुराम तपोवन आश्रम के संस्थापक पूज्य भार्गवश्री बी.पी. सचिनवाला, सनातन के धर्मप्रचारक सद्गुरु अनुराधा वाडेकर, सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री अभय वर्तक और हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता वैद्य उदय धुरी के हाथों दीप प्रज्वलन द्वारा हुआ।

‘पारिवारिक धार्मिक कृति और सामाजिक कृतियों के पीछे का शास्त्र’ इस सनातन संस्था के ग्रंथ के ‘ई-बुक’ का प्रकाशन करते हुए बाएँ से सद्गुरु (सुश्री) अनुराधा वाडेकर, भार्गवश्री बी.पी. सचिनवाला, श्री अभय वर्तक और डॉ. उदय धुरी

इस अधिवेशन में मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर से 100 से अधिक हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें डॉक्टर, प्राध्यापक, विचारक, अधिवक्ता, उद्यमी, मंदिर ट्रस्टी, हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रमुख और गोरक्षक शामिल थे।

इस अवसर पर वैद्य उदय धुरी ने सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के संदेश का वाचन किया। विभिन्न सत्रों में हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए संगठन की आवश्यकता, हिंदू धर्मरक्षण, हिंदुओं के श्रद्धास्थानों की रक्षा तथा आपातकाल में आवश्यक तैयारी जैसे विषयों पर मान्यवरों ने मार्गदर्शन किया। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हुए आए अनुभव भी हिंदुत्वनिष्ठों ने साझा किए।

हिंदुओं को अपनी निर्णायक लड़ाई स्वयं ही लड़नी होगी ! – श्री रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृति समिति

श्री. रमेश शिंदे

वर्तमान आधुनिक गणराज्य में कहा जाता है कि कानून सभी के लिए समान है। किंतु दुख के साथ कहना पड़ता है कि वर्तमान गणतंत्र देशभक्तों के अस्तित्व की रक्षा के लिए देश में धर्मांध जिहादियों का नाश नहीं करता, बल्कि उन्हें संवैधानिक अधिकार देता है। यदि भारत में वास्तव में संविधान और गणतंत्र प्रभावी होते, तो कश्मीर में साढ़े सात लाख विस्थापित हिंदुओं की घर वापसी हो चुकी होती। न्याय की मांग के लिए जब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाता है, तो न्यायालय कहता है कि इतनी पुरानी बात आज क्यों लाई जा रही है? वहीं न्यायालय गांधी हत्या और सिख दंगों जैसे मामलों को आज भी सुनता है। इसलिए हिंदुओं को अपनी निर्णायक लड़ाई स्वयं ही लड़नी होगी। जाति, पद, पक्ष, संगठन और प्रांत के भेद भूलकर हमें संगठित होना होगा।

अधिवक्ता संजीव पुनालेकर

हिंदू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय सचिव अधिवक्ता संजीव पुनालेकर ने कहा, “स्वयं की रक्षा का अधिकार संविधान ने सभी को दिया है। धर्मरक्षा की निर्णायक लड़ाई में हमें वैधानिक मार्ग से धर्म के पक्ष में संघर्ष करना होगा।”

डॉ. अमित थडानी

प्रख्यात सर्जन और लेखक डॉ. अमित थडानी ने कहा, “पिछले 50 वर्षों में साम्यवादियों ने शिक्षा और फिल्म उद्योग के माध्यम से अपना प्रचार किया और अपनी विचारधारा स्थापित करने का प्रयास किया। हिंदुओं को अपने विचार सभी तक पहुंचाकर अपनी संस्कृति को विश्व के सामने प्रस्तुत करने के लिए ‘हिंदू धर्म के ब्रांड एंबेसडर’ बनना चाहिए।”

श्री महेश वासू

मानवाधिकार कार्यकर्ता और लघु फिल्म निर्माता श्री महेश वासू ने बताया कि, पाकिस्तान में हर वर्ष लगभग 1,000 लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कर निकाह कराया जाता है, और वहां की पुलिस, न्याय व्यवस्था तथा राजनीतिक नेता इन कृत्यों को संरक्षण देते हैं।’ प्रसिद्ध हिंदुत्वनिष्ठ यूट्यूबर श्री सचिन गायकवाड ने ‘लव जिहाद को रोकने के प्रयास और सफलता’ विषय पर मार्गदर्शन किया।

संतों के मार्गदर्शन में कार्य करने से हिंदुओं की विजय निश्चित – अभय वर्तक (प्रवक्ता, सनातन संस्था)

अभय वर्तक ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि हिंदू संतों के मार्गदर्शन में संगठित होकर कार्य करेंगे तो विजय निश्चित रूप से हिंदुओं की ही होगी। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जाति, पंथ, पार्टी और संगठन के भेदों से ऊपर उठकर धर्मकार्य के लिए एकजुट होना चाहिए। प्रत्येक हिंदू को प्रतिदिन धर्मकार्य के लिए सक्रिय होना चाहिए और साधना के लिए प्रयास करना चाहिए।

इस प्रकार हुआ अधिवेशन का प्रारंभ…

  • प्रारंभ में वेद मंत्रों का पाठ किया गया।
  • ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का सामूहिक जप किया गया।
  • श्री गणेश का श्लोक और शंखनाद के साथ अधिवेशन का शुभारंभ हुआ।
  • पूज्य भार्गवश्री बी.पी. सचिनवाला ने विश्वशांति के लिए शांति पाठ किया।

अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखें…

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