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हिंदू संगठनों की सफलता : सेंसर बोर्ड ने विवादित नाटक ‘इठ्ला’ से आपत्तिजनक दृश्य हटाने के दिए आदेश

वारकरी संप्रदाय और हिंदू संगठनों के संघर्ष को मिली सफलता

नाटक का शीर्षक बदलें और संशोधित स्क्रिप्ट दोबारा मंजूरी के लिए दें – निर्माता को स्पष्ट निर्देश।

मुंबई/रत्नागिरी : वारकरी संप्रदाय, संत परंपरा और विठ्ठल भक्ति का घोर उपहास उड़ाने वाले तथा विठ्ठल भक्तों को हिंसक दिखाने वाले विवादित नाटक ‘इठ्ला’ के विरुद्ध हिंदू जनजागृति समिति और वारकरी संप्रदाय द्वारा चलाए गए संघर्ष को बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र सरकार के ‘रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण मंडल’ (सेंसॉर बोर्ड) ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस नाटक से सभी आपत्तिजनक भाग, श्रीविठ्ठल मूर्ति और संतों के नाम तुरंत हटाने के कड़े आदेश दिए हैं।

यह पूरा विवाद रत्नागिरी में आयोजित 64वीं महाराष्ट्र राज्य शौकिया मराठी नाट्य प्रतियोगिता के दौरान सामने आया था, जहां वीरशैव समाज (लांजा) द्वारा निर्मित और अमोल रेडीज द्वारा लिखित-निर्देशित नाटक ‘इठ्ला’ का मंचन किया गया था। इस नाटक में पात्रों को ‘तुका’, ‘जना’ और ‘नामा’ जैसे पूजनीय संतों के नाम देकर उनके हाथों खून-खराबा होते हुए दिखाई गई थी, जिसके जरिए वारकरी भक्तों को अपराधी के रूप में चित्रित किया गया था। हिंदू जनजागृति समिति और वारकरी संप्रदाय ने इस घृणास्पद प्रस्तुति पर तीव्र आपत्ति जताई थी। विषय की गंभीरता को देखते हुए सेंसर बोर्ड के सचिव सं. पुं. खामकर ने नाट्य निर्माताओं को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों के अनुसार नाटक का शीर्षक ‘इठ्ला’ तुरंत बदला जाए और पात्रों को दिए गए संतों के नाम पूरी तरह से हटाए जाएं। नाटक के मुख्य परिवार को ‘वारकरी’ न दिखाकर केवल एक साधारण, धार्मिक सेवाभावी परिवार के रूप में दिखाया जाए और उनके द्वारा किसी भी प्रकार की हत्या का दृश्य न दर्शाया जाए, जिससे किसी भी विशिष्ट संप्रदाय की भावनाएं आहत न हों। इसके साथ ही रंगमंच पर प्रत्यक्ष विठ्ठल की मूर्ति और उससे जुड़े विवादास्पद दृश्यों को पूरी तरह से टालने के लिए कहा गया है। नाटक के अत्यंत आपत्तिजनक संवाद ‘‘किसी को मारना नहीं चाहिए, ऐसा विठ्ठल ने कहां लिखा है?’’ को स्क्रिप्ट से हमेशा के लिए हटा दिया गया है और संशोधित नाट्य संहिता को पुनः मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

इस पूरे मामले में राज्य के उद्योग व मराठी भाषा मंत्री पालकमंत्री श्री उदय सामंत ने अत्यंत संवेदनशील और त्वरित भूमिका निभाई। हिंदू जनजागृति समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जब मुंबई में उनसे मुलाकात की, तो उन्होंने तुरंत संज्ञान लेते हुए निर्माताओं को कड़ी फटकार लगाई थी। सेंसर बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यह उचित आदेश जारी किया है, जिसके लिए संपूर्ण वारकरी संप्रदाय और हिंदू जनजागृति समिति मंत्री महोदय का आभार व्यक्त करती है।

इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र राज्य संगठक श्री सुनील घनवट ने कहा कि यह केवल किसी एक नाटक का विरोध नहीं है, बल्कि समस्त वारकरी संप्रदाय और हिंदुओं की जागृत अस्मिता की बड़ी जीत है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हमारे आराध्य देव, विठ्ठल माऊली और पूजनीय संतों का जो घोर अपमान इस नाटक के माध्यम से किया जा रहा था, वह अब सेंसर बोर्ड के आधिकारिक आदेश के बाद पूरी तरह से रुक गया है। हालांकि, हमारा यह मूल प्रश्न अब भी कायम है कि आखिर सेंसर बोर्ड ने शुरुआत में ही ऐसे नाटक को अनुमति कैसे दी? भविष्य में सेंसर बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हिंदू देवी-देवताओं और श्रद्धा केंद्रों पर आघात करने वाले नाटकों को किसी भी स्थिति में मंजूरी न मिले और इसके लिए एक कड़क नियमावली तैयार की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाली ताकतों को आगे भी इसी तरह कड़ा जवाब दिया जाएगा।


12 अप्रैल

बंदी के बावजूद रत्नागिरी में विवादित ‘ईठ्ठला’ नाटक प्रस्तुत करने का प्रयास, वारकरी संप्रदाय और हिन्दू जनजागृति समिति ने सौंपा ज्ञापन

‘ईठ्ठला’ नाटक प्रस्तुत करने पर कानूनी कार्रवाई होगी! – रत्नागिरी के पालकमंत्री डॉ. उदय सामंत

विठ्ठल भक्तों ने ‘जनता दरबार’ में पालकमंत्री को दिया ज्ञापन

रत्नागिरी – वारकरी संप्रदाय का अपमान करने वाले ‘ईठ्ठला’ नाटक का वारकरी संप्रदाय, हिंदू जनजागृति समिति, विठ्ठल भक्तों और हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा पूरे महाराष्ट्र में व्यापक विरोध किया गया है। इस नाटक पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध होने के बावजूद इसे प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके विरोध में पालकमंत्री डॉ. उदय सामंत ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि “यदि नाटक प्रस्तुत किया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

पालकमंत्री डॉ. उदय सामंत ने 11 अप्रैल को रत्नागिरी में जिलाधिकारी कार्यालय स्थित जिला नियोजन समिति के सभागार में आयोजित ‘जनता दरबार’ में यह बात कही। प्रतिबंध के बावजूद नाटक के मंचन की कोशिशों के संबंध में वारकरी संप्रदाय और हिंदू जनजागृति समिति की ओर से उन्हें ज्ञापन सौंपा गया, उसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया।

प्रमुख बिंदु

इससे पहले हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ राज्य के संगठनकर्ता श्री सुनील घनवट ने ज्ञापन दिया था। उस समय पालकमंत्री डॉ. सामंत ने नाटक के आयोजकों को सख्त निर्देश दिए थे कि नाटक का नाम बदला जाए, पात्रों को दिए गए संतों के नाम हटाए जाएं और वारकरी संप्रदाय को हिंसक दिखाने की अवधारणा में तुरंत बदलाव किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह नाटक दोबारा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इसके बावजूद ‘ईठ्ठला’ नाटक को विभिन्न स्थानों पर फिर से प्रस्तुत किए जाने की जानकारी वारकरी संप्रदाय और हिंदू जनजागृति समिति के सदस्यों ने जनता दरबार में दी। इस पर पालकमंत्री ने कहा, “यदि प्रतिबंध के बावजूद नाटक प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नाटक प्रस्तुत करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। एक हिंदू के रूप में यह मेरी स्पष्ट भूमिका है। मैं आपके साथ हूं।”

इस अवसर पर लांजा तालुका वारकरी संप्रदाय के ह.भ.प. मनोहर उर्फ दादा रणदिवे, तुळशीराम मोरे, विष्णु लांजेकर, दर्शन आग्रे, गोविंद चव्हाण तथा हिंदू जनजागृति समिति के अमितराज खटावकर, भैरूलाल भंडारी, गोविंद भारद्वाज, संजय जोशी आदि उपस्थित थे। पालकमंत्री के इस रुख का वारकरी संप्रदाय और विठ्ठल भक्तों ने स्वागत किया।

‘ईठ्ठला’ नाटक में क्या दिखाया गया है?

  1. नाटक में दिखाया गया है कि भगवान विठ्ठल की भक्ति में लीन एक दंपत्ति पैसों के लालच में 10 लोगों की हत्या करता है, जो वारकरी परंपरा के सिद्धांतों के पूरी तरह विरुद्ध है।
  2. नाटक के पात्रों को ‘तुका’, ‘जनाई’ और ‘नामा’ जैसे संतों के नाम देकर उनका अपमान किया गया है।
  3. इसमें यह भी दिखाया गया है कि पत्नी के कहने पर पति (तुका) अतिथियों की हत्या करता है और पत्नी अपने ही बच्चे की हत्या करती है, जो अत्यंत आपत्तिजनक चित्रण माना जा रहा है।

7 मार्च

हिंदू जनजागृति समिति एवं वारकरी संप्रदाय की बडी जीत : विवादित नाटक ‘ईठ्ठला’ का प्रदर्शन स्थगित

मंत्री उदय सामंत ने दिए कड़े निर्देश

हिंदू जनजागृति समिति और वारकरी संप्रदाय के कड़े विरोध के बाद झुके नाटक के निर्माता

नाटक के निर्माताओं ने हिन्दुत्वनिष्ठों से मांगी क्षमा

मुंबई/रत्नागिरी: वारकरी संप्रदाय, संतों की परंपरा और भगवान विठ्ठल की भक्ति का अपमान करने वाले विवादित मराठी नाटक ‘ईठ्ठला’ का प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। महाराष्ट्र के उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री श्री उदय सामंत ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए नाटक के निर्माताओं को कड़ी फटकार लगाई और नाटक का नाम, पात्र तथा उसकी थीम (विषय वस्तु) बदलने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला?

रत्नागिरी में आयोजित 64वीं महाराष्ट्र राज्य शौकिया नाट्य प्रतियोगिता के दौरान ‘अमोल रंगयात्री’ (लांजा) द्वारा ‘ईठ्ठला’ नाटक का मंचन किया गया था। इस नाटक में वारकरी भक्तों को ‘हत्यारा’ दिखाया गया था, जिससे हिंदू समाज और वारकरी संप्रदाय में भारी आक्रोश फैल गया।

बाएं से निवेदन स्वीकारते हुए मंत्री उदय सामंत, सुनील घनवट (निवेदन देते हुए) तथा भाजपा के विधायक सत्यजीत देशमुख

हिंदू जनजागृति समिति के राज्य संगठक श्री सुनील घनवट, श्री सतीश सोनार और श्री रवि नलावड़े ने मुंबई में मंत्री उदय सामंत से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री सामंत ने तुरंत निर्माताओं को फोन कर संतों के नाम पर किए जा रहे इस अनाचार को रोकने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों के नाम वाले पात्रों को हटाया जाए और संप्रदाय को बदनाम करने वाली ‘थीम’ बदली जाए।

निर्माताओं ने लिखित में मांगी माफी

मंत्री के कड़े रुख के बाद, निर्माता संस्था ‘वीरशैव समाज, लांजा’ ने लिखित पत्र देकर सूचित किया कि, “हम वारकरी संप्रदाय और हिंदू जनजागृति समिति की आपत्तियों का सम्मान करते हुए फिलहाल इस नाटक को रोक रहे हैं। आवश्यक बदलाव के बाद ही इसका अगला मंचन किया जाएगा।”

नाटक के कुछ अत्यंत आपत्तिजनक अंश

1. नाटक में भगवान विठ्ठल की भक्ति करने वाले एक दंपति को 10 निर्दोष मेहमानों की हत्या करते हुए दिखाया गया है।

2. संतों के प्रति अनादर दिखाते हुए पात्रों को ‘तुका’, ‘जना’ और ‘नामा’ जैसे पवित्र संतों नाम दिए गए और उन्हें अपराधी के रूप में चित्रित किया गया।

3. एक दृश्य में मां (जना) को भक्ति में लीन होकर अपने ही बेटे (नामा) की हत्या करते हुए दिखाया गया, जो वारकरी विचारधारा का सरासर अपमान है।

“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हमारे श्रद्धा केंद्रों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम मंत्री उदय सामंत जी का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने वारकरी समुदाय की भावनाओं को समझा और त्वरित कार्रवाई की।”


1 मार्च

‘ईठ्ठला’ नामक हिंदू-विरोधी नाटक पर प्रतिबंध लगाने की वारकरी संप्रदाय की मांग

जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को ज्ञापन

रत्नागिरी – ‘ईठ्ठला’ नामक नाटक पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए वारकरी संप्रदाय तथा हिन्दू जनजागृति समिति ने जिलाधिकारी मनुज गोयल के माध्यम से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांस्कृतिक मंत्री एवं पालकमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने इस नाटक पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर में तीव्र आंदोलन किया जाएगा। वारकरी संप्रदाय का आरोप है कि इस नाटक के माध्यम से भक्ति को अंधश्रद्धा और अविवेकी बताया जा रहा है।

यह नाटक वर्ष 2025-26 की 64वीं महाराष्ट्र राज्य हौशी मराठी नाट्य स्पर्धा में प्रस्तुत किया गया था। इसे प्राथमिक फेरी में द्वितीय पुरस्कार मिला और यह अंतिम फेरी के लिए चयनित हुआ है। नाटक के निर्माता जयप्रकाश पाखरे तथा लेखक-निर्देशक अमोल रेडीज हैं, जबकि इसका मंचन ‘वीरशैव समाज, लांजा’ द्वारा किया गया है।

नाटक पर प्रमुख आपत्तियां

नाटक को 400 वर्ष पूर्व की घटना पर आधारित बताया गया है, किंतु उसका कोई ऐतिहासिक या ग्रंथीय आधार नहीं है।
इसमें श्री विठ्ठल की भक्ति में मग्न एक दंपती को धन के लालच में 10 लोगों की हत्या करते हुए दिखाया गया है, जो वारकरी तत्त्वज्ञान के विपरीत है।

पात्रों को ‘तुका’, ‘जनाई’ और ‘नामा’ जैसे संतों के नाम देकर उनका अपमान किया गया है।

पत्नी के कहने पर पति द्वारा अतिथियों की हत्या तथा पत्नी द्वारा अपने ही पुत्र की हत्या का चित्रण अत्यंत आपत्तिजनक बताया गया है।

अंतिम फेरी से बाहर करने की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि, इस नाटक को राज्य नाट्य स्पर्धा की अंतिम फेरी से बाहर किया जाए तथा इसे कोई पुरस्कार न दिया जाए। साथ ही लेखक, निर्देशक और निर्माता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई तथा भविष्य में हिंदू धर्म, संतों और राष्ट्रपुरुषों के विडंबन को रोकने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई।

ज्ञापन देते समय ह.भ.प. मनोहर रणदिवे, तुळशिराम मोरे, विष्णु लांजेकर, दर्शन आग्रे, गोविंद चव्हाण, पांडुरंग शिंदे, मनोहर करंबेळे, किशोर लांजेकर, भिकाजी लांजेकर आदि उपस्थित थे।

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