हलाल के कारण खड़ी हुई व्यवस्था ग्राहकों के अधिकारों को चुनौती देने वाली – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृति समिति

पुणे : हलाल जिहाद का दायरा अब केवल खाद्य पदार्थों तक सीमित न रहकर विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं और आर्थिक क्षेत्रों तक फैल चुका है। हलाल प्रमाणपत्र से जुड़े आर्थिक लेन-देन और उसके आधार पर खड़ी हुई व्यवस्था भारतीय न्याय व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए चुनौती बनती जा रही है। एफएसएसएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) अधिनियम में मिस-ब्रांडिंग (भ्रामक जानकारी या चिह्न लगाकर उत्पाद बेचने) संबंधी प्रावधानों के कारण हलाल लोगो पर कानूनी प्रश्न भी उठ सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश सरकार ने हलाल प्रमाणपत्र पर प्रतिबंध लगाया है। यह वक्तव्य हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे ने दिया। वे नागरिक सोशल फाउंडेशन, पवित्रम् फाउंडेशन और पुणेकर व्यापारी संघ द्वारा टिलक स्मारक मंदिर में आयोजित व्याख्यानमाला के छठे सत्र में “हलाल अर्थव्यवस्था और भारत” विषय पर संबोधित कर रहे थे।


कार्यक्रम में अभिनेता राहुल सोलापुरकर, ग्राहक पेठ के सूर्यकांत पाठक, शैलेश टिलक, समस्त हिंदू आघाड़ी के मिलिंद एकबोटे, सनातन संस्था की सद्गुरु स्वाती खाडये, सकल जैन संगठन के अचल जैन, पूना मर्चेंट चेंबर्स के अध्यक्ष राजेंद्र बाठिया, चितळे उद्योग समूह के श्रीकृष्ण चितळे सहित 600 से अधिक नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र का पूजन और दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात तीन बार ओंकार का उच्चारण किया गया, नितीन महाजन के शंखनाद दल ने शंखनाद किया तथा श्री पुष्कराज सप्रे ने संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया। कार्यक्रम का प्रस्ताविक नागरिक सोशल फाउंडेशन के अमेय सप्रे ने तथा आभार प्रदर्शन पवित्रम् फाउंडेशन के शशांक मेंगडे ने किया।
इसके बाद पुणेकर व्यापारी संघ के फतेहचंद रांका ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हलाल प्रमाणपत्र के माध्यम से व्यापारियों और ग्राहकों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर व्यापक जनजागरण की आवश्यकता बताई और ऐसे अभियानों में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रश्नोत्तर सत्र

राजनीतिक एवं सामाजिक विश्लेषक सर्वेश मेहेंदळे द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में श्री रमेश शिंदे ने कहा—
1. क्या मुस्लिम संस्था से हलाल प्रमाणपत्र लेने पर ही वैश्विक व्यापार संभव है?
उत्तर: ऐसा बिल्कुल नहीं है। हलाल प्रमाणपत्र के बिना भी भारतीय उत्पाद अनेक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। ‘चितळे’ जैसे उद्योग समूहों के उत्पाद कई देशों में उपलब्ध हैं। इसलिए यह धारणा गलत है कि हलाल प्रमाणपत्र के बिना व्यापार नहीं हो सकता। भारत को भी पारस्परिक समानता के आधार पर शाकाहारी या जैन प्रमाणपत्र पर विचार करना चाहिए।
2. उत्तर प्रदेश सरकार ने हलाल प्रमाणपत्र पर कार्रवाई की है। क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा हो सकता है?
उत्तर: यह मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। विभिन्न राज्यों में भी इस विषय पर प्रयास जारी हैं। न्यायालय के निर्णय के बाद आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
3. आम नागरिक और व्यापारी क्या कर सकते हैं?
उत्तर: ग्राहकों को खरीदारी करते समय उत्पादों पर हलाल प्रमाणपत्र की जांच करनी चाहिए और यदि वे नहीं चाहते तो ऐसे उत्पाद न खरीदें। उपभोक्ताओं को उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत करने का अधिकार है। साथ ही होटल या विक्रेताओं से यह भी पूछना चाहिए कि भोजन हलाल है या नहीं।
श्री रमेश शिंदे द्वारा बताए गए प्रमुख बिंदु
हलाल केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी करने का माध्यम बन चुका है। इसके आर्थिक लाभ सीमित वर्ग तक पहुंचते हैं, जबकि इसका प्रभाव व्यापक उपभोक्ता वर्ग पर पड़ता है।
हलाल के अंतर्गत मांस विक्रय से जुड़े सरकारी नियमों का कई स्थानों पर पालन नहीं होता। खुले में मांस बेचना, निर्धारित तापमान पर भंडारण न करना तथा अन्य नियमों का उल्लंघन आम है।
भारत में प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और पसंद के अनुसार भोजन चुनने का अधिकार है। ऐसे में किसी विशेष प्रमाणन या खाद्य पद्धति को अनिवार्य बनाने के बजाय उपभोक्ता की पसंद और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।








