- मुसलमान लडकियों के हिजाब पहनने का सार्वजनिकरूप से समर्थन करनेवाले महिलाधिकार कार्यकर्ता अब जलगांव की इस घटना पर शांत क्यों हैं ? अब हिन्दुओं को ही उनसे इसका स्पष्टीकरण पूछना चाहिए !
- यह क्षोभनीय घटना हिन्दू धर्म पर किया गया आघात ही है । सर्वत्र के हिन्दुत्वनिष्ठों ने इसके विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक ! – सम्पादक, हिन्दुजागृति
बेंडाळे महाविद्यालय में १२ वीं कक्षा की परीक्षा के समय की घटना !
अन्य धर्मी छात्राओं को बुर्का एवं हिजाब पहनने की छूट !

जलगांव : बारहवीं कक्षा की परीक्षा के लिए जाते समय कुछ हिन्दू छात्राओं को उनकी ओढनी एवं ‘स्कार्फ’ निकालने के लिए बाध्य किया गया; परंतु अन्य धर्मी छात्राओं को बुर्का एवं हिजाब पहनकर परीक्षा देने की छूट दी गई । स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठों ने इसके विरोध में बेंडाळे महाविद्यालय के प्राचार्य एवं जलगांव के जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत किया । ज्ञापन प्रस्तुति के उपरांत जिलाधिकारी ने इस घटना की पडताल कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया ।

इस घटना के विषय में महाविद्यालय प्रशासन से शिकायत की गई । प्राचार्य ने संबंधित शिक्षकों पर उचित कार्रवाई करने की तथा उन्हें चेतावनी देने का आश्वासन दिया । महाविद्यालय में ओढनी पहनने के विषय में कोई भी आधिकारिक नियम नहीं बनाया गया है । उसके कारण छात्राओं पर कोई भी प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा ।
इस समय उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों ने छात्रों के साथ किसी प्रकार का धार्मिक, सांस्कृतिक अथवा व्यक्तिगत वेशभूषा के आधार पर भेदभाव नहीं होगा तथा पूरे राज्य में इसका कार्यान्वयन हो, यह मांग की ।
ओढनी को कूडेदान में फेंक देने की शिक्षकों की भाषा !
संबंधित शिक्षकों ने छात्राओं के विषय में क्षोभजनक एवं अपमानजनक वक्तव्य दिया । उन्होंने कहा था, ‘‘परीक्षा के समय में ओडनी पहनकर नहीं आना चाहिए, यह सामान्य बात भी इनकी समझ में कैसे नहीं आती ? ओडनी कूड़ेदान में फेंक दीजिए !








