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राष्ट्रध्वज की अवमानना रोकने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति का ‘राष्ट्रध्वज का सम्मान करें’ अभियान

समिति की ओर से प्रशासन को ज्ञापन प्रस्तुति

राष्ट्रध्वज राष्ट्र की अस्मिता है ! २६ जनवरी और १५ अगस्त को अभिमान के साथ राष्ट्रध्वज फहराया जाता है; परंतु उसी दिन ही कागज के अथवा प्लास्टिक के राष्ट्र्रध्वज सडकों, कचरे और नालों में अनेक दिनों तक दिखाई देते हैं । केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्लास्टिक को प्रतिबंधित किया गया है; परंतु अब दुकानों में तथा इ-कॉमर्स वेबसाइट पर तिरंगे के रंग के मास्क, टी-शर्ट एवं अन्य उत्पादन का विक्रय हो रहा है । ‘तिरंगा मास्क’ एवं अन्य उत्पाद देशप्रेम के प्रदर्शन का माध्यम नहीं है, अपितु ध्वजसंहिता के अनुसार ‘राष्ट्रध्वज का इस प्रकार से उपयोग करना’ ध्वज का अपमान ही है । यह ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम १९७१’ का उल्लंघन है । इसलिए ‘तिरंगा मास्क’, टी-शर्ट एवं अन्य उत्पाद का विक्रय व उपयोग करनेवालों पर अपराध प्रविष्ट किए जाएं । साथ ही कहीं भी प्लास्टिक के राष्ट्रध्वज का उत्पादन और बिक्री हो रही हो, तो संबंधित उत्पादकों पर तत्काल कार्यवाही की जाए, ऐसी सख्त मांग लेकर देशभर में अनेक स्थानों पर ज्ञापन प्रस्तुत किए गए।

बुलढाणा (महाराष्ट्र)

चिखली के तहसीलदार विजय सवडे को ज्ञापन सौंपते हुए धर्मप्रेमी

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से चिखली और मलकापुर में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्कूलों और महाविद्यालयों में ज्ञापन प्रस्तुत किए गए।

चिखली में समिति के शिष्टमंडल ने तहसीलदार विजय सवडे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री भूषण गावंडे से भेंट कर चर्चा की। इस अवसर पर धर्मप्रेमी प्रशाद येवले, विजय हरि लहितरकर, स्वप्नील देशमुख, गणेश चव्हाण, नचतम गुप्ता, सचिन सराफे, राकेश चोपड़ा, संदीप ढंग, बबलू महाराज सराफे, शंकर देशमान, दीपक गाडेकर और गणेश देशमुख प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

मलकापुर में पुलिस निरीक्षक भोपळे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान सौ. भारती दहिभाते, सौ. सानिका पोळ, श्री पोळ और डॉ. ज्ञानेश देशपांडे सहित अनेक राष्ट्रप्रेमी नागरिक उपस्थित थे।

मूर्तिजापुर (अकोला, महाराष्ट्र)

धर्मप्रेमियों की ओर से मूर्तीजापुर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर समिति की कु. साक्षी श्रीराव, कु. आकांक्षा हजारे, कु. दीक्षा अहिरवार और सौ. स्मिता महामुने उपस्थित थीं। अकोला में भी जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय स्कूलों के शिक्षकों से भेंट कर जनजागरण (प्रबोधन) की अनुमति मांगी गई।

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