ऐतिहासिक मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखने के लिए हिंदुओं के संयुक्त आंदोलन के आगे झुका प्रशासन

पुणे – बकरी ईद के दौरान प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने की विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की संगठित और एकजुट मांग के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पुणे का सारसबाग उद्यान 28 और 29 मई 2026 को बंद रखने की घोषणा की है।
यहां के ऐतिहासिक सारसबाग परिसर में 9 मार्च को ‘रमजान ईद’ के दूसरे दिन बड़ी संख्या में मुसलमानों की भीड़ एकत्र हुई थी। इस पृष्ठभूमि में विश्व हिंदू परिषद, सकल हिंदू समाज, पतित पावन संगठन, स्वातंत्र्यवीर सावरकर विचार मंच, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, स्वातंत्र्यवीर सावरकर युवा विचार मंच तथा हिंदू जनजागृति समिति सहित अनेक हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने एकत्र होकर ‘हिंदू राष्ट्र-जागृति आंदोलन’ किया था।
इस संबंध में पुणे पुलिस, पुणे महानगरपालिका आयुक्त तथा जिलाधिकारी कार्यालय को ज्ञापन भी सौंपा गया था। सारसबाग उद्यान परिसर स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों ने भी प्रशासन को बकरी ईद के बाद सारसबाग उद्यान बंद रखने के लिए निवेदन दिया था। इसके पश्चात “वर्तमान में शहर में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और इसी पृष्ठभूमि में सुरक्षा कारणों से सारसबाग उद्यान बंद रखने का निर्णय लिया गया है”, ऐसी जानकारी महापौर सौ. मंजुषा नागपुरे ने 26 मई को सोशल मीडिया के माध्यम से दी।
महापौर का स्पष्टीकरण
पुलिस उपायुक्त (DCP) की ओर से मिली सूचना और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। महापौर ने नागरिकों से अपील की कि वे गलत सूचनाओं पर ध्यान न दें और प्रशासन का सहयोग करें।
20 मई
सारसबाग में नमाजपठन का मामला : सारसबाग में प्रशासन की ओर से कोई प्रतिबंधात्मक आदेश नहीं !
सारसबाग में नमाजपठन और मांसाहार होने के कारण प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की हिंदुत्वनिष्ठों ने की थी मांग

पुणे – आगामी बकरी ईद की पृष्ठभूमि में सारसबाग और श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखने हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की मांग हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने आंदोलन के माध्यम से की थी; किंतु पुणे महानगरपालिका प्रशासन और पुणे पुलिस प्रशासन ने इस अत्यंत संवेदनशील एवं न्यायसंगत मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। 18 मई की दोपहर तक भी प्रशासन की ओर से इस संदर्भ में कोई प्रतिबंधात्मक आदेश अथवा परिपत्र जारी नहीं किया गया है, ऐसी जानकारी हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संयोजक श्री सुनील घनवट ने दी। इस संपूर्ण प्रकरण और प्रशासन की निष्क्रिय भूमिका पर वरिष्ठ पत्रकार शेखर जोशी ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से तीव्र आपत्ति दर्ज करते हुए प्रशासन और सत्ताधारियों को कठघरे में खड़ा किया है।
बकरी ईद के दौरान सारसबाग में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने की मांग !
कुछ दिनों पूर्व रमजान के दौरान सारसबाग परिसर में हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय का जमावड़ा एकत्र हुआ था। पेशवाकालीन विरासत प्राप्त इस पवित्र स्थल की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा था। इससे पहले शनिवारवाड़ा परिसर में भी खुलेआम नमाजपठन किए जाने की घटना सामने आई थी।
इसी पृष्ठभूमि में 27 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद, पतित पावन संगठन, स्वातंत्र्यवीर सावरकर विचार मंच, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, स्वातंत्र्यवीर सावरकर युवा विचार मंच तथा हिंदू जनजागृति समिति सहित अनेक हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने संयुक्त रूप से ‘हिंदू राष्ट्र-जागृति आंदोलन’ किया था। इस आंदोलन के माध्यम से बकरी ईद के दौरान सारसबाग में भीड़, मांसाहार अथवा किसी भी अनुचित गतिविधि को रोकने हेतु तत्काल प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाएं तथा गैर-हिंदू सामूहिक कार्यक्रमों पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग की गई थी।
पत्रकार शेखर जोशी ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उठाए गंभीर प्रश्न !
१. पुणे महानगरपालिका और राज्य में भाजपा की सत्ता होने के बावजूद हिंदुत्वनिष्ठों की मांगों की अनदेखी क्यों की जा रही है ? शनिवारवाड़ा में नमाजपठन की घटना के विरोध में सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने खुलकर भूमिका ली और आंदोलन किया। फिर पुणे के अन्य भाजपा विधायक, सांसद और पूर्व नगरसेवक इस विषय पर मौन क्यों हैं ? महापौर इस विषय पर चुप क्यों हैं ?
२. बकरी ईद की पृष्ठभूमि में किसी भी परिस्थिति में सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ने दी जाएगी, ऐसी स्पष्ट और कानूनी भूमिका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक रूप से लेते हैं। फिर एक माह पूर्व निवेदन और आंदोलन किए जाने के बावजूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस सारसबाग प्रकरण में अब तक कोई कठोर भूमिका क्यों नहीं ले रहे ?
३. यदि हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थलों की रक्षा के विषय में महाराष्ट्र का प्रशासन और शासन निष्क्रिय बना रहेगा, तो जनता यदि योगी आदित्यनाथ की कार्यपद्धति की तुलना महाराष्ट्र के नेतृत्व से करती है, तो उसमें गलत क्या है ?
26 अप्रैल
बकरीद के मद्देनजर सारसबाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करें : हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की हिन्दू राष्ट्र-जागृति आंदोलन से मांग
सारसबाग को ‘शाहीन बाग’ नहीं बनने देंगे; पुणे में हिंदुत्वनिष्ठ संगठन आक्रामक!
प्रशासनिक विफलता का प्रदर्शनकारियों ने किया विरोध

पुणे – ऐतिहासिक और समस्त हिंदुओं के श्रद्धा केंद्र सारसबाग एवं श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखने के लिए आज हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने आक्रामक रुख अपनाया। रमजान के दौरान इस क्षेत्र में हुई भारी भीड़ के मद्देनजर, प्रशासनिक विफलता का विरोध करने और सारसबाग को ‘शाहीन बाग’ न बनने देने के संकल्प के साथ आज यहाँ विभिन्न हिंदू संगठनों का ‘हिंदू राष्ट्र जागृति आंदोलन’ उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि आगामी २७ मई को होने वाली बकरीद के लिए अभी से प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाएं।

22 मार्च को रमजान के दौरान यहां हजारों की संख्या में भीड़ का इकट्ठा होना एक अत्यंत गंभीर मामला है। पेशवाकालीन विरासत वाले इस पवित्र स्थल की सुरक्षा बनाए रखने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। “यह सारसबाग है या शाहीन बाग?” ऐसा आक्रोशित सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि इस घटना से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
आंदोलन के माध्यम से की गई प्रमुख मांगें

22 मार्च की भीड़ को अनुमति देने वाले संबंधित अधिकारियों की तत्काल जांच कर उनके विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए। सारसबाग मंदिर परिसर में किसी भी गैर-हिंदू सामूहिक कार्यक्रमों पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए। 27 मई को बकरीद के दौरान सारसबाग में भीड़, मांसाहार या किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तुरंत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाएं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, ये घटनाएं महज संयोग नहीं बल्कि व्यवस्थित धार्मिक अतिक्रमण के संकेत हैं, इसलिए सरकार को इसे आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से गंभीरता से लेना चाहिए।

इस आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद के श्री दादा वेदक, सीए श्री सर्वेश मेहेंदळे, पतित पावन संगठन के श्री स्वप्नील नाइक, स्वातंत्र्यवीर सावरकर विचार मंच के श्री विद्याधर नारगोलकर, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के ह.भ.प. दत्तात्रय चोरघे महाराज, स्वातंत्र्यवीर सावरकर युवा विचार मंच के श्री दयानंद बंडगर, हिंदू जनजागृति समिति के श्री पराग गोखले सहित कई संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मांगों पर तुरंत ध्यान न दिए जाने पर लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई। सामूहिक आरती के साथ आंदोलन का समापन हुआ।
22 अक्टूबर
सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए – हिंदू जनजागृति समिति की मांग
पहले पर्वती, फिर सारसबाग, और अब शनिवारवाड़ा में नमाज़पाठ…

पुणे : शनिवारवाड़ा वह स्थान है जो छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य को मराठा साम्राज्य में रूपांतरित करने वाले श्रीमंत बाजीराव पेशवा की कर्मभूमि है। यद्यपि छत्रपति की गद्दी सातारा में थी, परंतु मराठा साम्राज्य का प्रभाव दिल्ली तक बनाए रखने का कार्य शनिवारवाड़ा ने किया। हमारे शौर्य के प्रतीक इस ऐतिहासिक धरोहर में नमाज़पाठ को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले पर्वती टेकड़ी के मंदिर में, फिर सारसबाग गणपति मंदिर के सामने और अब शनिवारवाड़ा के भीतर नमाज़पाठ किया गया। अब तक सड़कों पर नमाज़ पढ़ने वाले लोग अब हिंदुओं की ऐतिहासिक धरोहरों में नमाज़ पढ़ रहे हैं। यदि उन्हें मस्जिदों में नमाज़ नहीं पढ़नी है, तो फिर मस्जिदें किसलिए हैं? सड़क पर पढ़ते हैं, बस-रेलवे-विमान में पढ़ते हैं, और अब हमारे मंदिरों व ऐतिहासिक स्थलों में भी पहुंच गए हैं। यह हम किसी भी हालत में सहन नहीं करेंगे। इसलिए मस्जिदों को छोड़कर किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नमाज़पाठ पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, ऐसी मांग हिंदू जनजागृति समिति की कु. क्रांति पेटकर ने की है।
पहले पर्वती, फिर सारसबाग, और अब #शनिवारवाड़ा में नमाज़पाठ…
सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर प्रतिबंध लगाओ! – हिंदू जनजागृति समिति की मांग
– @Krantipetkar1 हिंदू जनजागृति समिति pic.twitter.com/yf3JQM1lFv
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) October 21, 2025
कु. क्रांति पेटकर ने आगे कहा कि पुरातत्व विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए वह क्या कदम उठाएगा। साथ ही शनिवारवाड़ा परिसर में स्थित अनधिकृत मजार को तत्काल हटाया जाना चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जो लोग यह कहते हैं कि ‘शनिवारवाड़ा किसी के बाप का नहीं’, ‘यह सबका है’, उन्हें यह समझना चाहिए कि आज का हिंदू समाज छत्रपति शिवाजी महाराज, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज, श्रीमंत बाजीराव पेशवा और अन्य वीर हिंदू योद्धाओं के वंशजों का समाज है। इसलिए शनिवारवाड़ा हमारे पूर्वजों के पराक्रम का प्रतीक और हमारी गौरवशाली विरासत है।
कु. क्रांति पेटकर ने आगे कहा कि पुणे की सांसद सौ. मेधा कुलकर्णी ने इस विषय पर आवाज उठाई है, इसके लिए हिंदू जनजागृति समिति की ओर से उनका आभार व्यक्त करती हूं। मुस्लिम महिलाओं को उनकी मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं होती। ‘बिचारी’ और ‘शांतिप्रिय’ कही जाने वाली उन महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश देने के लिए ‘सेक्युलरवादी’ महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए, लेकिन वे इस विषय में चुप रहती हैं और हिंदुओं को ही सेक्युलरिज़्म का उपदेश देती हैं। मेधाताई का यह कदम हर हिंदू जनप्रतिनिधि के लिए आदर्श है। यदि हिंदुओं की ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा हिंदू जनप्रतिनिधि नहीं करेंगे तो क्या मुस्लिम जनप्रतिनिधि आकर शनिवारवाड़ा, किले रायगढ़ जैसी धरोहरों की रक्षा करेंगे?
आज शनिवारवाड़ा में नमाज़ पढ़ी गई, तो कल वहां नगाड़े की जगह अज़ान सुनाई देगी, क्या तब भी हम सेक्युलरिज़्म का राग अलापते रहेंगे? कल तक सड़कों पर नमाज़ पढ़ी जा रही थी, और अगर कल वे आपके घर के सामने आकर नमाज़ पढ़ने लगे तो क्या आप इसे स्वीकार करेंगे? नमाज़ के बहाने छत्रपतियों की विरासत वाले स्थलों को ‘लैंड जिहाद’ के माध्यम से अतिक्रमित करने के प्रयासों को विफल करने के लिए हिंदू समाज को सतर्क रहना होगा, ऐसा आवाहन भी कु. क्रांति पेटकर ने किया है।








