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मंदिरों की भूमि पर दावा करनेवाले वक्फ बोर्ड और वक्फ कानून निरस्त करें ! – सुनील घनवट, राष्‍ट्रीय संगठक, मंदिर महासंघ

​अंत्री मलकापुर (जिला अकोला) यहां ‘महाराष्‍ट्र मंदिर न्‍यास परिषद’ !

बाएं से श्री. किशोर कापडे, श्री. प्रशांत देशमुख, दीपप्रज्वलन करते हुए पू. अशोक पात्रीकर, स्वामी परमानंद राम भारतीजी महाराज, श्री. सुनील घनवट, श्री. अरविंद देठे

४०० से भी अधिक मंदिर विश्वस्‍त, प्रतिनिधि, पुरोहित, अधिवक्ता और मंदिर अभ्यासक सम्मिलित !

अकोला, २९ मार्च (वार्ता.) – महाराष्ट्र में मठ-मंदिरों की भूमि पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है । इसलिए मठ-मंदिरों को अडचन निर्माण होती है । यह षड्यंत्र रोकने के लिए वक्फ बोर्ड और वक्फ कानून, ये दोनों निरस्त होने चाहिए, ऐसा मार्गदर्शन मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने किया । २८ मार्च को अंत्री मलकापुर (ता. बाळापुर, जिला अकोला) के स्‍वयंभू महादेव मंदिर में महाराष्‍ट्र मंदिर महासंघ, श्री चंडिका देवी संस्‍थान कुरणखेड और हिन्दू जनजागृति समिति के संयुक्त विद्यमान से ‘महाराष्‍ट्र मंदिर न्‍यास परिषद’का आयोजन किया गया था । इस अवसर पर सनातन संस्था के धर्मप्रचारक पू. अशोक पात्रीकर की वंदनीय उपस्थिति थी ।

अधिवेशन में ‘अंत्री महादेव संस्‍थान’के अध्‍यक्ष श्री. अरविंद देठे, महाराष्‍ट्र मंदिर महासंघ के श्री. अनुप जयस्‍वाल, हिन्दू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्‍वयक श्री. श्रीकांत पिसोळकर, ह.भ.प. श्री. रमेश इस्‍लापे (पारस), ह.भ.प. वासुदेवराम महल्ले, अकोला, श्री. शुकदास गाडेकर (श्री गुरुदेव सेवा आश्रम पारसुल), श्री. उज्‍ज्‍वल देशमुख (कुरणखेड महादेव संस्‍थान), श्री. तुळसीराम ईस्‍तापे, श्री. महेश गाडे, मुंडगाव, ह.भ.प. श्रीकांत महाराज राऊत आदि मान्‍यवरों सहित अकोला जिले के ४०० से भी अधिक मंदिरों के विश्वस्‍त, प्रतिनिधि, पुरोहित, मंदिरों की रक्षा के लिए लडनेवाले अधिवक्ता और मंदिर अभ्‍यासक सम्मिलित हुए थे ।

परिषद का आरंभ वेदमंत्रपठन से हुआ । तदुपरांत स्‍वामी परमहंस राम भारतीजी महाराज, श्री चंडिकादेवी संस्‍थान, कुरणखेड के अध्‍यक्ष श्री. प्रशांतभाऊ देशमुख, पू. अशोक पात्रीकर, स्‍वयंभू महादेव मंदिर अंत्री के उपाध्‍यक्ष श्री. किशोर कापडे और मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट के हस्तों दीपप्रज्‍वलन किया गया ।

मंदिर संगठन के कार्य में युवकों को सम्मिलित करें ! – परमहंस स्वामी राम भारतीजी महाराज, संन्यास आश्रम, चांगेफळ

हमने युवकों को भारी संख्या में रामकथा से जोडा है । काकड आरती के लिए सवेरे हमारे यहां १ सहस्र से डेढ सहस्र युवक सम्मिलित होते हैं । मंदिर संगठन के कार्य में युवकों को सम्मिलित करना चाहिए ।

विश्वस्‍ताें को संगठित होकर कार्य करने पर विशाल दबावगुट निर्माण होगा ! – प्रशांत देशमुख, अध्‍यक्ष, श्री चंडिका देवी संस्‍थान, कुरणखेड

मंदिरों के कारण हिन्दू संस्कृति और परंपराओं का जतन और संवर्धन होता है । सामाजिक जीवन में मंदिरों का अनन्‍यसाधारण स्थान है । यह ध्यान में रखते हुए अकेले-दुकेले मंदिर चलाने की तुलना में सभी मंदिरों के विश्वस्‍तों को ‘महाराष्‍ट्र मंदिर महासंघ’के अंतर्गत संगठितरूप से कार्य करने पर विशाल दबावगुट निर्माण होगा । उससे सभी मंदिरों का विकास करना संभव होगा ।

श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक लाभ के लिए मंदिरों का सुव्यवस्थापन आवश्यक ! – अरविंद देठे, अध्‍यक्ष, अंत्री महादेव संस्‍थान

मंदिरों की पवित्रता रखने के लिए विश्वस्तों को प्रयत्नशील रहना चाहिए । इससे भक्तों को मंदिर का आध्‍यात्मिक स्‍तर पर लाभ हो सकता है । विश्वस्तों को सामूहिक आरती, संतों का मार्गदर्शन, धर्मशिक्षावर्गों का नियमित आयोजन करना चाहिए । इसके साथ ही महापुरुष और अध्यात्म की जानकारी देनेवाले फलक मंदिर में लगाने से श्रद्धालुओं में जागृति होगी ।

क्षणिकाएं

१. मंदिर महासंघ के प्रेरणास्रोत सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा दिया गया संदेश सनातन संस्था के श्री. गिरीश कुलकर्णी ने पढकर सुनाया ।

२. उपस्थितों का स्वागत और प्रस्तावना महाराष्‍ट्र मंदिर महासंघ के श्री. प्रशांत देशमुख ने की । आभार प्रदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के अकोला समन्‍वयक श्री. अमोल वानखेडे ने की । कार्यक्रम का सूत्रसंचालन श्रीमती आनंदी वानखडे एवं श्री. हेमंत खत्री ने किया ।

​मंदिर न्‍यास परिषद में एकमत से संमत हुए कुछ प्रस्ताव !

१. काशी एवं मथुरा, ये तीर्थक्षेत्र धर्मांधों के अतिक्रमण से मुक्त करने हेतु अभियोग शीघ्र गति न्यायालय के माध्‍यम से निर्णय दिया जाए ।

२. मंदिरों का व्‍यवस्‍थापन ‘सेक्युलर’ सरकार नहीं कर सकती, यह न्‍यायालय के अनेक बार बताने के पश्चात भी आजतक महाराष्‍ट्र के अनेक मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण है । सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेशों का पालन करते हुए सरकार को राज्य के सभी मंदिरों को सरकारमुक्त कर उन्हें भक्तों के स्वाधीन करें ।

३. मंदिरों में भक्तों द्वारा श्रद्धा से अर्पण की गई निधि सरकार को चंदा अथवा कर नहीं है । इसलिए सरकार को मंदिरों का पैसा विकासकाम के लिए उपयोग करने का अधिकार नहीं । इसके लिए महाराष्‍ट्र सरकार मंदिरों की संपत्ति विकासकाम के लिए उपयोग न करने की घोषणा करे ।

४. धर्मादाय आयुक्त कार्यालय मंदिरों को विविध कारणों के लिए चंदा देने के लिए आज्ञापत्र भेजते हैं । ऐसे नियमबाह्य सरकारी पत्र महाराष्‍ट्र सरकार रोके और मंदिरों की निधि केवल धार्मिक कार्य के लिए उपयोग में लाई जाए, ऐसी सूचना धर्मदाय आयुक्त कार्यालय को दे ।

५. महाराष्‍ट्र का पौराणिक अथवा ऐतिहासिक महत्त्व है; इसलिए प्रशासन, पुरातत्व विभाग द्वारा उपेक्षित मंदिरों का तत्काल जीर्णोद्धार करने के लिए सरकार को अर्थसंकल्‍प में उत्तम प्रावधान करे ।

६. महाराष्‍ट्र में धार्मिक महत्त्ववाले तीर्थक्षेत्र, श्रीक्षेत्र एवं गढदुर्ग पर मंदिरों पर हुए अतिक्रमण का महाराष्‍ट्र सरकार सर्वेक्षण कर, तत्काल वे अतिक्रमण दूर करें । इस संदर्भ में चल रहे न्‍यायालयीन अभियोग के लिए शीघ्र गति न्यायालय निर्माण किए जाएं ।

७. मंदिरों के परिसर में, इसके साथ ही तीर्थक्षेत्रों पर पवित्रता की रक्षा हो, इसलिए मद्य-मांस की बिक्री नहीं होगी, इसकी घोषणा महाराष्‍ट्र सरकार करे और इसके लिए अधिसूचना जारी करें ।

८. महाराष्‍ट्र के मंदिरों के पुजारी वर्ग की उत्पन्न नगण्‍य है । इसलिए महाराष्‍ट्र सरकार मंदिरों के पुजारियों के लिए प्रतिमाह मानधन देने की व्‍यवस्‍था करे ।

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